एक जंगल के किनारे वाले हिस्से में एक गिलहरी रहती थी। उस गिलहरी का नाम था चिंटू । चिंटू एक दिन घुमते हुए जंगल में दूर तक निकल आई। वहाँ उसे एक चीते का बच्चा टिनटिन मिला दो नो ने एक दोसरे का हाल पूछा और एक दूसरे के साथ खेलने लगी। खेलते हुए चिती के बच्चे से टिनटिन ने पूछा - भैया तुमलोग कहाँ खेलते हो? क्या मैं भी वहाँ खेल सकता हूँ? चीते के बच्चे ने कहा - क्यों नहीं चलो अभी चलते हैं। आज बाहर बहुत खूबसूरत दिन है मैं भी बाहर जाना चाहता हूम खूब पानी पीना चाहता हूँ.
जय जय मैथिल जय मिथिला
हर–हर गङ्गे जय कमला
कवि- श्री विनित ठाकुर
जन्म- 01 मार्च, 1976 ई.
शिक्षा: बी. एड.
प्रकाशित कृति: बाँकी अछि हमर दूधक कर्ज
सम्प्रति: शिक्षक (प्रगति आदर्श ई. स्कूल, लगनखेल, ललितपूर, नेपाल)
स्थायी पता: मिथिलेश्वर मौवाही–६, धनुषा, नेपाल
उठू यौ मैथिल भेलै भोर
चुनमुन चिरैया करैय शोर
कोशी कमला अमृत जल धारा
आलस छोरु कहे भुरुकवा तारा
माटि पानिके लगाक छाती
बुढिया दादी गावे पराती
गाई महिष खोललक चरवाहा
हर लऽ विदाह भेल हरवाहा
मन्दिर मस्जिद मिथिलाक शान
रुप अनेक एकऽही भगवान
जनक सलहेशक ई कर्मभूमि
स्वर्ग समान बनाऊ मातृभूमि
दुख:क ठोर पर हंसी कोना भेंटत ?
जेकरा भाग्ये में अछि दुःख,
ओकरा ख़ुशी कोना भेंटत ??
जे नहि बेचलक अप्पन आत्मा कें,
ओकरा नौकरी कोना भेंटत ??
गामो कए रहल अछि शहरक देकसी,
आब कतहु सादगी कोना भेंटत ?
चान पर बढि रहल अछि प्रदुषण,
भला कहू ! चांदनी कोना भेंटत ??
ओना त' मोन सबहक होएत छैक,
मुदा सबहक "परी" कोना भेंटत ?
हाट पसरल अछि मौअतिक सभ तर ,
एहि में जिनगी कोना भेंटत ??
दुख:क ठोर पर हंसी कोना भेंटत ??
- करण समस्तीपुरी