कथा....भैरवी

कथा....भैरवी

विवाहक पाँचम बरखक बाद अनायास भैरवीसँ चन्द्रेश्वर बाबाक मन्दिरमे भेट भेल छल। नरक निवारण चर्तुदशीक व्रत केने रही। मायक जिदपर आयल रही पूजा करऽ।  मन्दिर मे प्रवेश करिते रही कि हमर ध्यान भैरवीपर गेल। लाल रंगक नूआमे ओ बड़ सुन्नरि लागि रहल छली। मन्दिरसँ बाहर एबाक बाद दुनू गोटे एक दोसरसँ कु शल क्षेम पुछलहुँ। किछु काल धरि एमहर-ओमहरक बात करबाक बाद हम भैरवीसँ ओकर पतिक सन्दर्भमे पुछलहुँ। लज्जा वश ओ बेचारी किछु नञि बजली। किछु क्षण चुप रहबाक बाद ओ हमरासँ प्रश्न केने छली- हमर तँ सभ किछु ओहने अछि जेहन पहिने छल, अपन कहू की सभ भऽ रहल अछि आइ-काल्हि?
हमरा लोकनि गप करिते रही कि गाम वाली भौजी हमरा दुनूकेँ एकान्तमे ठाढ़ भऽ बात करैत देखि लग आबि गेली आ चुटकी लैत कहलनि- की यौ, अहाँ दुनू गोटेकेँ लाजो धाख नञि होइत अछि जे एना रास रचा रहल छी?
हुनकर रास रचेबाक बात छूलक, मुदा ओकरा टारैत कहने रहियनि- लाज कथीक होयत भौजी? जँ हमरा लोकनि किछु अनर्गल करब तखन ने, बात करबापर सेहो रोक छै की?
- नञि-नञि एहन कोनो बात नञि, हम तँ बस एहिना किछु कहि दैलहुँ। कतेक नीक रहैत जँ अहाँ दुनूक विवाह.....।
भौजी ई कहि चुप भऽ गेली। हम देखलहुँ जे भैरवी असहज अनुभव कऽ रहल अछि। तेँ बात बदलबा लेल हम आन गप आरम्भ कऽ देलहुँ। 
- भौजी आब एहि ठामक मेलामे पहिने वला बात नञि रहलै, नञि?
‘से तँ ठीके कहि रहल छी अहाँ’- हमरा बातपर ओ दुनू गोटे सहमति व्यक्त केलनि। 
गाम एबाक बाद हम अपना मायसँ भैरवीक सन्दर्भमे बात के लहुँ। हुनकर जवाब सुनि हमरा बड़ बेसी आश्चर्य भेल जे एकैसम शताब्दीक कोनो युवक अपन पत्नीक संग एना कोना कऽ सकैत अछि। 
भौरवी सन सुन्नरि गाम भरिमे क्यौ नञि छल। गामक सभ युवक ओकरा आँगा-पाछाँ मड़राइत रहै छल, मुदा ओ ककरो भाव नञि दै छली। एक टोल हेबाक कारणे ँ कखनो काल ओकरासँ भेट भऽ जाइ छल। एहि क्रममे कहियो काल गप-शप सेहो भऽ जाइ छल। तरे तर हम ओकरासँ प्रेम करऽ लागल रही, मुदा समाजक डर, घरक लोक-वेदक प्रतिष्ठाक कारणे ँ कहियो ई बात अपन परिवार आ भैरवीसँ नञि कहि सकलहुँ। नञि जानि भैरवी हमरासँ प्रेम करै छली वा नञि। ओना एक गोट बात तँ सोलह आना सत्त छल। आन युवक केर तुलनामे ओ हमरासँ बेसी गप करै छली। एहि कारणे ँ गाम वाली भौजी हमरा भैरवीक नाम लऽ कहियो काल किचकिचा दैत छली। एक दिन नञि जानि गाम वाली भौजीकेँ की फुरेलनि, ओ अपना आङन बजा हमरासँ कहलनि- ‘बौआ एगो बात पूछू? सत्त सत्त कहब ने?’ 
- की भेल भौजी? पहिने ई तँ कहू जे बात की अछि?
- नञि पहिने अहाँ हमर सप्पत खाउ, जे अहाँ हमरासँ लाथ नञि करब।
कनी काल सोचबाक बाद हम भौजीक माथपर हाथ दऽ सपत्त लेलहुँ जे हम हुनकासँ किछु नञि नुकायब। आ पुछलिनि- ‘आब तँ कहू, हम सपत्त सेहो खा लेलहुँ अछि।’
-की अहाँ भैरवीसँ मने मन प्रेम करै छी?
भौजीसँ एहि तरहक प्रश्न पूछल जेबाक हमरा कनिको आभास नञि छल। हम किछु जवाब नञि दऽ सकलहुँ आ चुपचाप ओहि ठाम बैसल रहलहुँ। हमरा चुप देखि गाम वाली भौजी बजली- ‘देखू अहाँ हमरा माथपर हाथ दऽ सपत्त खेलहँु अछि। जँ आब अहाँ फूसि गप बजलहुँ तँ हमर मरल मुँह देखब। 
- नञि भौजी एहन बात जुनि बाजू।
- तखन सत्त सत्त कहू। अहाँ भैरवीसँ प्रेम करै छी वा नञि?
- भौजी भैरवीसँ हम एतेक प्रेम करै छी जे ओकरा बिनु रहब हमरा लेल सम्भव नञि अछि। जाहि दिन ओकरासँ गप नञि होइछ तहिया भोजन करब धरि नञि सोहाइत अछि। 
- तखन ई बात अहाँ भैरवीसँकिए नञि कहै छी?
- डेराइ छी भौजी, जँ ओ हमरा प्रेमकेँ स्वीकार नञि केलक तखन हम कोना जीयब? एखन कमसँ कम एहि विश्वासक संग जीबि तँ रहल छी जे की पता ओहो हमरासँ प्रेम करैत होय। 
गाम वाली भौजी आ हम एहि सन्दर्भमे गप करिते रही आ कि भौजीक घरसँ भैरवी बाहर एली। हम हड़बड़ा गेलहुँ। अकबका कऽ भौजी दिस तकलहुँ। ओ मन्द-मन्द मुस्किया रहल छली। बुझबामे बेसी भाङठ नञि भेल जे गाम वाली भौजी आइ हमरासँ भैरवीक सन्दर्भमे एना खोधि-खोधि कऽ किए पूछि रहल छली।  
हम चट ओहि ठामसँ उठि आङनसँ बहराय लगलहुँ। भैरवी पाछाँसँ हमर हाथ पकड़ि लेलनि। हम थकमका गेलहुँ। ओ कहलनि- ‘अहाँ हमरासँ एतेक प्रेम करै छी जे हमरा बिनु अहाँ जी नञि सकै छी। तखन आइ धरि ई बात हमरासँ किए नञि कहलहुँ?’
- डर होइ छल।
- ककरासँ, की एहि समाजसँ?
- नञि अहाँसँ।
- कथीक डर?
- अहाँ हमर प्रस्ताव स्वीकार करब वा नञि एहि बातसँ डेरायल छलहुँ। 
- जँ यैह प्रस्ताव हम अहाँक सोझाँमे राखी तँ अहाँ की करब?
- हम सहर्ष स्वीकार कऽ लेब। 
ई कहि हम भैरवीकेँ अपना हृदयमे साटि लेलहुँ। भैरवीक आँखिसँ दहो-बहो नोरक धार बहराय लागल। नोर पोछि हम हुनका कनबासँ चुप करेलहुँ। गाम वाली भौजी सेहो भैरवीके ँ चुप करेने छली।
ओहि दिनक बादसँ हम आ भैरवी कॉलेज जेबाक क्रममे वा कलम गाछीमे नुका कऽ एक दोसरसँ गप शप करऽ लगलहुँ। कहियो काल गाम वाली भौजीक आङन सेहो हमरा लोकनिक मिलन स्थल बनऽ लागल। ओना एहि प्रेम मिलनक क्रममे हमरा लोकनि मर्यादाक उल्लंघनक कोनो प्रयास नञि केलहुँ। सम्भवत: ईहो एक गोट कारण छल जे गाम वाली भौजी हमरा लोकनिक मदति कऽ रहल छली। 
इण्टरक परीक्षा पास करबाक बाद हम आइआइटी करबा लेल कोलकाता आबि गेलहुँ। भैरवी जेके कॉलेज बिरौलमे कला विषय लऽ आगाँ पढ़ऽ लगली। मोबाइल-फोनक युग नञि हेबाक कारणे ँ कोलकाता एबाक बाद हमरा आ भैरवीक बीच सम्पर्क केर कोनो माध्यम नञि रहल। ओना कहियो काल गामवाली भौजीक नाम चिट्ठी लिखि भैरवीक कुशल क्षेम जानि लै छलहुँ। भौजीक माध्यमे भैरवी सेहो मास दू मासक बाद चिट्ठी पठबै छली।
दोसर सेमिस्टरक परीक्षासँ किछु दिन पहिने गामवाली भौजीक चिट्ठी आयल छल। एहिमे ओ हमरा चेतौनी दैत कहने छली जे भैरवीक सन्दर्भमे अपना मायसँ हम शीघ्र गप करी। कारण भैरवी लेल ओकर माता-पिता वर ताकि रहल छथि। सम्भव अछि जे अन्तिम लगन धरि विवाहो भऽ जाय। चिट्ठी पढ़बाक बाद हम नेयारि नेने छलहँु जे एहि बेर छुट्टीमे गाम जा माय-बाबूजीसँ भैरवीक सन्दर्भमे अवश्य बात करब। हमरा पूर्ण विश्वास छल जे हमर बात माय अवश्य मानती। 
गाम एबाक बाद सभसँ पहिने हम मायसँ एहि सन्दर्भमे बात के लहँु। हुनका ई जानि बड़ आश्चर्य भेलनि जे हम भैरवीसँ प्रेम करै छी आ विवाह सेहो करऽ चाहै छी। पहिने तँ माय हमर बात मानबा लेल तैयारे नञि भेली, मुदा अन्तमे हमर ई धमकी काज कऽ गेल जे भैरवीसँ विवाह नञि भेल तँ हम आजीवन कुमारे रहब। ओ बाबूसँ बात करबा लेल मानि गेली। कने नाकर नुकुरक बाद बाबू सेहो एहि प्रस्तावपर अपन स्वीकृतिक मोहर लगा देलनि।
ई खुशखबरी सुनेबा लेल जखन हम गामवाली भौजीक आङन जा हुनकासँ कहलहुँ तँ हुनका कोनो तरहक प्रसन्नता नञि भेलनि। हुनक ई व्यव्यवाहर देखि हमरा बड़ आश्चर्य भेल। जखन हमरासँ नञि रहल गेल तँ हम भौजीसँ पूछलहुँ-
भौजी की बात अछि? की अहाँ केँ ई बात सुनि नीक नञि लागल?
- नञि से बात नञि अछि, मुदा .......।
- मुदा की भौजी, किछु भेल अछि की, कहू ने।
- आब की कही, किछु कहबा लेल आ सुनबा लेल नञि बचल अछि। 
- सोझ-सोझ कहू भौजी की बात अछि? बातकेँ एते जिलेबी जकाँ किए घुमा रहल छी?
- आब भैरवी अहाँक नञि रहली। 
- हमर नञि रहली, माने।
- माने ई जे ओकर मामा आ नाना दू दिन पहिने ओकर विवाह चोरा कऽ करा देलथिन। बेचारी अहाँक बाट तकैत-तकैत अन्तमे हारि मानि गेली। 
भौजी ओहि ठामसँ एबाक बाद हम बिना किनको किछु कहने कोलकाता घुरि गेलहुँ। एकरा बाद जेना गामसँ हमर मन उचटि गेल। गाम आयब-जायब बन्ने जकाँ भऽ गेल। एक-दू बेर एबो केलहुँ तँ टिकलहुँ नञि। केम्हारो जाइ नञि। जेम्हरे जाइ ओमहर भैरवीक छवि नजरि आबय। एहि बेर एलहुँ तँ घरसँ बहरा सोझे मन्दिर गेल रही। गेल तँ रही मन मारि कऽ मुदा घूमल रही प्रसन्नता आ उदासी नेने। प्रसन्नता छल भैरवीसँ भेट हेबाक। मने मन हुनक उज्ज्वल आ सुखद भविष्यक कामना बाबासँ केने रही। संगहिँ उदासी छल एहि बातक जे परिस्थिति अनुकूल होइतो भैरवी हमरासँ बहुत दूर भऽ गेल छली। 
आ जखन मायसँ ई जानकारी भेल जे भैरवी गाममे रहैत अछि, सासुर नञि जाइत अछि तँ अकचका उठल रही। मायसँ बेसी पूछब उचित नञि लागल आ हम पूरे पाँच बरखक बाद गामवाली भौजीक आङन पहुँचि गेल रही। आङनमे सभ किछु ओहिना छल, मुदा आब ओ भैरवीक संग भेट केर स्थल नञि रहल से उदास लागल। भौजीक कुशल-क्षेम पुछलियनि। भैरवीक बात चलिते ओ भौजी उदास भऽ गेली। ओ जे किछु कहलनि से सुनि हमरा अपनापर बड़ तामस चढ़ल। संगे पछताओ रहल छलहुँ जे विवाहक बाद भैरवीसँ बिनु भेट केने हम कोलकाता किए चलि गेल रही। 
भौजी कहलनि जे विवाहक पन्द्रहमे दिन भैरवी गाम आयल छल। ओकरा संग पति गाम नञि आयल छलै। पहिल बेर जे ओकर पति गाम गेलै से आइ धरि घूरि कऽ नञि एलै। भैरवी गाम एबाक बाद हुनकासँ कहने छल जे ओकरा  पतिक संग बियाहे टा भेलै। ओकर पति तँ विवाहक रातियेमे कहि देने छलै भैरवीक मामा आ नानासँ जे जहिना अहाँ लोकनि हमर जीवन बर्बाद कऽ रहल छी, तहिना हम अहाँक नतनीक जीवन नारकीय कऽ देब। ओना ताहि समय भैरवीक नाना आ मामा एहि बातपर कोनो ध्यान नञि देलनि। एकर परिणाम ई भेल जे भैरवीक पति ओकरा कहियो नञि टोकलक। टोकत की, घुरि कऽ एबो ने कयल। 
विवाहक जखन तीन बरख बीति गेल आ भैरवीक पति घूरि कऽ नञि एलै तखन गामक लोक भैरवीक सासुर जा ओकर पति, सासु आ सुसरपर पञ्चैती बैसेलनि। पञ्चैतीमे भरैवीक पति साफ कहलक जे ओकर विवाह जबरदस्ती कराओल गेल ते ँ ओ एहि विवाहकेँ नञि मानैत अछि। भैरवी लेल ओकरा हृदयमे कोनो स्थान नञि अछि। 
गामक लोकवेद द्वारा बेसी दबाव देल जेबाक बाद भैरवीक पति ओकर द्विरागमन करेबा लेल तैयारत भेल, मुदा एक गोट शर्तपर। ओकर कहब छल जे ओ भैरवीकेँ अपना घरमे राखत, मुदा खर्चा देबाक अतिरिक्त ओ कोनो तरहक सम्बन्ध नञि राखत। 
भैरवीकेँ जखन एहि शर्तक सम्बन्धमे ज्ञात भेल तँ ओ सासुर जेबासँ साफ नठि गेल। माता-पिताकेँ कल जोड़ि ओ दू टूक कहलक जे एक बेर तँ अहाँ लोकनि हमर जीवन नष्ट कऽ चुकल छी। दोसर बेसी कमसँ कम एहन नञि हेबाक चाही। एहन पतिक संग रहि कोन लाभ जे अपना घरमे स्थान तँ देत, मुदा हृदयक केबाड़ बन्न राखत। ओहि दिनक बादसँ भैरवी गाममे रहि गेली। नीक शिक्षा प्राप्त हेबाक कारणे ँ ओ गामक धिया पुताकेँ ट्यूशन पढ़ाबऽ लगली आ एहि माध्यमे अपन जीवन बितबऽ लगली। 
गामवाली भौजीक मुँहे भैरवीक सभ स्थिति जानि हमरा मनमे आशाक किरण जागि गेल। भौजीक माध्यमे हम भैरवी लग समाद पठेलहुँ जे हम हुनकासँ एसगरमे भेट करऽ चाहै छी। 
तय भेल जे हमरा लोकनि चन्दे्रश्वर बाबक मन्दिरपर भेट होयब। ककरो कोनो तरहक सन्दहे नञि हो एहि लेल गामवाली भौजी सेहो भैरवीक संग आयल छली। बाबाकेँ साक्षी मानि हम भैरवीकेँ अपनासँ विवाह करबाक प्रस्ताव देलहुँ। हमर प्रस्ताव सुनि आवेशमे आबि ओ तमसाइत बजली- अहाँकेँ बूझल अछि ने जे हम विवाहिता छी, तखन एहि तरहक प्रस्तावक कोन प्रयोजन?
-भैरवी अहाँकेँ चन्द्रेश्वर बाबाक सपत्त अछि सत्त-सत्त बाजू..... सीथमे सिनुर लगेबाक अतिरिक्त अहाँक पति अहाँसँ कोन सम्बन्ध रखलक अछि? हमरा लेल एखनो अहाँ वैह भैरवी छी जे पहिने छलहुँ। जँ अहाँ अपन ओहि पतिक प्रतीक्षा कऽ सकै छी जे आइ धरि अहाँकेँ अपन नञि मानलनि, तखन हम अहाँ लेल अवश्य प्रतीक्षा करब किए तँ अहाँ सामाजिक संस्कारक हिसाबे भने हमर नञि छी, मुदा हम तँ अपन मानिते छी, भैरवी! हम जीवनक अन्तिम क्षण धरि अहाँक प्रतीक्षा करब......।
ई कहि हम चट ओहि ठामसँ विदा भऽ गेलहुँ। 
घर आबि एहि सन्दर्भमे हम ककरोसँ किछु नञि क हलहुँ। छुट्टी समाप्त हेबामे एखन दू दिन बाँचल छल। माय हमरा सोझाँ विवाह करबाक प्रस्ताव रखलनि। हम हुनका दू टूक कहि देलहुँ जे हम विवाह नञि करब। माय केर कहब छलनि जे हम कमसँ कम कन्याक फोटो तँ देख ली। एकरा बाद जे हम निर्णय करब, माय तकरा स्वीकार करती। हुनकर अवज्ञा नञि हो एहि लेल हम कुमोनसँ फोटो देखबा लेल मानि गेलहुँ। हुनका हाथसँ फोटो लऽ अनमानायल मनसँ हम फोट देखबाक प्रयास केलहुँ, मुदा ई की.....फोटो देखि हमर मन सातम आसामानपर उड़ऽ लागल। फोटो वाली युवतीतँ सत्ते बड़ बेसी सुन्नर छली। हम मायसँ पुछलहुँ- की ई हमरासँ विवाह करबा लेल तैयारी हेती? 
हुनका किछु बजबासँ पहिने परदाक अढ़मे नुकायल भैरवी बाहरि आबि बजली- जखन अहाँ हमरा लेल जीवनक अन्तिम क्षण धरि प्रतीक्षा कऽ सकै छी, तखन की हम अहाँ लेल सीथमे नव सिनुर नञि सजा सकै छी?
ताबत बाबूक संग टोलक कतेको गणमान्य आङन आबि ठाढ़ भऽ गेल छला। हम भैरवी आ माय-बाबूक संग समाजक उपस्थित गणमान्यक मुँह ताकि रहल छलहुँ आ मने मन सोचि रहल छलहुँ जे समाज एक डेग आगाँ बढ़ेलक आ एकैसम शताब्दीमे आबि ठाढ़ भऽ गेल अछि। 
गामवाली भौजी कखन एली से नञि बुझलियै। बुझलियै तखन जखन ओ चौल केलनि- ए भैरवी दाइ, अहूँ सभ किछु घोरि कऽ पीबि गेलहुँ। सिनूर नञि देलनि तेँ की आब तँ घरेवला ने छथि। लोक सभ ठाढ़ छथि आ ई वरकेँ देखि तिरिपति भऽ रहल छथि। 
गामक सम्माननीय वयोवृद्ध भोलन बाबा कहलनि- एहन डेग अनर्गल नञि...नीक निर्णय छऽ सभक। ओ लाठी खुटखुटबैत बिदा भऽ गेला। लाठी केर ठक-ठक स्वरसँ लागि रहल छल जेना पुरना शताब्दी नवका शताब्दीक सकारात्मक निर्णयपर मोहर मारि रहल हो।  

नोट- 81म कथा गोष्ठी सगर राति दीप जरयमे हमरा द्वारा पढ़ल गेल कथा

-रोशन कुमार मैथिल
मिथिला आवाज 
दरभंगा (मिथिला)
08292560971

अंतिम फेसबुक अपडेट

लेखक: आदि यायावर
मूलनाम: डा. कुमार पद्मनाभ


पीयूस आफिस पहुँचि गेल छलाह. सबसँ पहिने अपन लैपटॉप खोलि फेसबुक में स्टेटस अपडेट केलाह आ सरपट अपन काज में जुटि गेलाह.
उम्हर हुनकर पत्नी “अँशु” केँ कनियों अपरतिव नहि लागलनि जे पीयूश भोरे सुति उठि के बिना चाह-नाश्ता केने आफिस चलि गेलाह. हुनका बुझल छलनि जे एहेन परिस्थिति मे पीयूश केँ मनेनाय निरर्थक. एहेन रुसब-फुलब कएक बेर भेल छल आ ओ मनेबाक कतेक बेर असफल प्रयास केने हेतीह. ओ चाह-नाश्ता करबाक लेल किन्नहुँ नहि मानि सकैत छलाह. ओहो किएक बेर-बेर मनाबैक लेल जेतीह. अँशुक जीद्द छलनि जे आब अपन जिंदगी अपन अनुकूल जीतीह, बिना कोनो लाग-लपेटक. किओ रुसौथ आकि किओ मानौथ अपन मर्जी सँ.
इ त रोजेक गप्प छल. आइ कोनो विशेष घटना नहि
प्रिय पाठक लोकनि... अपने लोकनिक कमेंट टिपण्णी कोनो ना कोनो भाँजें आबैत रहैत अछि. पाठक लोकनिक टिप्पणी एक लेखक लेल मेहताना (बोइन) होइत अछि. एकर आभाव मे लेखक केँ इ लागैत अछि जे मेहनत मे कोनो कमी रहि गेल. आ कोनो टिप्पणी एलाक बाद होइत अछि जे मेहनत सफल रहल आ आओर बेसी लिखबाक प्रेरणा भेटैत अछि. कृपया लेखक केँ प्रोतसाहित करी एहि ब्लोग मे कमेंट द्वारा.
घटल छल, तैयो अँशु के आइ सब किछु याद आबए लागलनि. आइ हुनकर विवाहक चारिम वर्षगाँठ रहनि. आ चारिए साल मे सब किछु एना तहस-नहस भ जेतनि तकर हुनका कनियोँ अँदेशा नइँ छलनि. एके घर मे रहिकेँ दुनू प्राणी अनचिन्हार बनल रहैत छथि. कएक दिन भ जैत छनि पीयूश सँ गप्प भेलाक. यदि कहियो गप्प होइतो छनि त मात्र ओतबे जाहि सँ काज चलि जानि. दोसर पति-पत्नि युगलकेँ देखि हुनका खुब सेहंता होइत छनि जे हुनको जीवने ओहने रहनि, मुदा नहि जानि किएक ओतेक प्रयासक के बावजूदो एना सँभव नहि भेलनि.
चारि साल पहिलुका गप्प याद आबए लागलनि. इंटरनेटक दुनियाँ नइँ चाहितो कतेक लोकक दुनिया बदैल देने छल. विवाहक तौर तरीका बदलि गेल छल. अँशु एकर सद्यः प्रमाण थीकीह. चारि साल पहिने ओ ग्रैजूएशनक अंतिम साल में छलीह. हुनकर बाबुजी इंटरनेट मैट्रीमोनी मे हुनकर प्रोफाइल द देने छलाह. पहिलुके सप्ताह मे हुनका कएकटा प्रस्ताव आबि गेल छलनि. बाबुजीक इमेल अँशुए बनेने छलीह. तेँ हुनका पासवर्ड सब बुझल छलैन्ह. चोरा-नुका केँ ओ सबटा प्रस्ताव केँ देखि नेने छलीह.
पीयूशक प्रोफाइल हुनका सबसँ नीक लागल छलनि. पाँच-फीट एगारह इँच ऊँच, एथलेटिक बॉडी आ बहुराष्ट्रीय कम्पनी में नौकरी. ओहि में दरमाह सेहो लिखल छलनि. अँशु सँ रहल नइँ गेल छलनि. चोरा-नुका केँ हुनकर फेसबुक प्रोफाइल केँ नियमित रुपेँ देखय लागल छलीह. पीयूशो सँ बेसी नीक, आओर प्रोफाइल सब आबि सकैत छलनि. तीनूटा भाए, बाबूजी आ माँ सब किओ कहने छलनि कनिएँ आओर बाट ताकबाक लेल. मुदा सब केँ कहि देने छलीह जे हुनका पीयूशे पसंद छनि. फेर हुनकर बाबुजी कथा ल केँ पीयूशक घर पर गेल रहैथ.
घर-द्वार सब किछु बढियाँ मुदा दहेजक बेसी डीमांड सेहो. पीयूशक फेसबुकक देवाल पर लिखल ओतेक बढियाँ बढियाँ फिलोसोफी आ दहेजक एतेक घटिया गप्प. तीन भाएक उपरांत में भेल अँशु, माए-बापक सबसँ बेसी दुलारू संतान छली. पहिने फेसबुक सँ “फ्राइंड रीक्वेस्ट” पठा देलथिन्ह आ एक्सेप्ट भेलाक बाद तुरंते एक पेजक इमेल पीयूश केँ पठा देने छलीह जे इ दहेजक डीमाँड कोन सभ्यताक निशानी थीक. ओ केवल इमेले टा नइँ छल. ओ पीयूशक पुरुषार्थ केँ चुनौती देल गेल छल. ओना शादी व्याहक मामला मे पीयूश कोनो हस्तक्षेप नहि करैत छलाह मुदा हुनकर पुरुषार्थ केँ चुनौती भेटल छलनि. ओ अपन माए बाबूजी सँ बात क केँ दहेज शब्द केँ अपन विवाह सँ हँटा देने छलाह. अँशु केँ पहिने पीयूश नीकेटा लागल छलनि मुदा हुनकर एहेन प्रयास सँ अँशुक मोन में हुनका लेल इज्जत बढि गेल छलैन्ह. मोने मोन हुनकर सम्मान करए लागल छलीह. अँशुक माए हुनका कतेको बेर बुझेने हेतीह जे लड़काक रंग पीर्श्याम अछि. मुदा अँशुक कहब छलनि जे पीर्श्याम लड़का आओर बेसी नीक. पीयूश सेहो एहने बोल्ड स्त्री केँ अपन जीवन सँगिनि बनाबए चाहैत छलाह. घर में घुसल फुसियाही गप्प पर झगडा करय वाली लड़की सँ नहि.
समय बदलल गेल जा रहल छल आ सँगहिँ अँशू-पीयूशक फेसबुक “अपडेट” सेहो भेल गेल. सबसँ पहिने एक दोसरक “फ्रेंड-लिस्ट” में शामिल भेल गेल, जे किनको ध्यान आकर्षित नहि केलक. ओकर बाद प्रत्येक फोटो, कमेंटक “लाइक”. ओकर बाद किछु दिनक लेल कोनो आवरजाह नहि. ओकर बाद फेसबुक स्टेटस अपडेट भेल... अँशु इनगेज्ड विद पीयूश. ओकर तीन महीना धरि पुनः शाँति. फेर व्याहक फोटो, किछु दिनक बाद हनीमूनक फोटो. अँशु, पीयूश आ फेसबुक में अन्योन्याश्रित सँबँध बनि गेल छल.
ड्राइँग रुम में विभिन्न चैनलक बीच में विचारक उहापोह में अँशु डुबकी लगा रहल छलीह. कएक बेर मोन करैत छलनि जे एकबेर फेसबुक केँ देखल जाए. मुदा हुनका बुझल छलनि जे वर्षगाँठक बधाइ लेल कम सँ कम आइ पचास टा मैसेज आएल हेतनि. हुनकर कतेको फोटो पर दोस्त महीम रिश्तेदार लिखने हेतनि जे मेड-फोर-इच-अदर-कपल. सम्भवे नहि छलनि नहि त चीकैर चीकैर केँ फेसबुक पर सब केँ कहए चाहैत छलीह जे हुनकर विवाह एकटा असफल प्रयोग छल. भोरे-भोर पीयूश यदि हुनका एकबेर प्रेम सँ नीक भाषा में व्याहक वर्षगाठक बधाइ द दैतथि त हुनकर मोनक सबटा मैल आइए खत्म भ जैतन्हि. मोन करैत छलनि जे अपन माए केँ फोन क के कहैथ “माँ गे, कारी लड़काक हृदय सेहो कारी होएत अछि. काश! आइ तोहर बात मानि गेल रहितहुँ”. सोचिते सोचिते हुनकर आँखि सँ नोर आबि गेल छलनि. मुदा ओ अपना आप केँ कमजोर नहि साबित करय चाहैत छलीह.
बारह बजे धरि तीन कप्प चाह बना केँ पीबि लेने छलीह. अपन ध्यान पीयूश सँ हँटेबाक प्रयास करय लागलीह. अपन हारि किन्नहुँ मानबाक लेल तैयार नइँ छलीह. ओ सब किछु में पीयूशक बाट किएक ताकतीह. ओ रुसल रहताह त हुनकर मर्जी. ओ चाह, नाश्ता आ खाना नहि खेताह त हुनकर मर्जी. हुनका लेल ओ अपना आप केँ किएक सज़ा देतीह. किचेन जा केँ दालि भात तरकारी रान्हि चुकल छलीह. आइ खाना खेबाक काल में डायटिँग शब्द बिसरि गेल छलीह.
आब ड्राइँग रूम में आबि पुनः टेलीविजनक चैनल बदैल बदैल केँ देखय लागल छलीह. चारु दिस शाँति छल. हुनकर मोन बेर बेर पीयूश दिस भटकबाक लेल जाइत छलनि मुदा अपन व्यथित मोन केँ टेलीविजनक चैनल पर एकाग्रचित करबाक प्रयास करय लागलीह. यैह क्रम में हुनकर आँखि झलफलाय लागल छलनि. अधनीने में छली जखन हुनकर मोबाइलक घँटी बाजलनि. मोबाइल में लिखल आबैत छलैन “पीयूश इज कालिँग”. पीयूशक कॉल आ ओहो दिन में अढाई बजे, अँशु के तामस उठि गेल छलनि. मुदा ओ फोन केँ उठा लेलीह. उम्हर सँ आवाज आयल,
“हू इज दिस, आप कौन बोल रही हैँ”.
ओ पीयूशक आवाज नहि छल. आवाज बदल छल. “यू टेल मी... हू आर यू..., यू काल्ड मी”. अँशु अकचकाएल उत्तर देने छलीह.
“मै पुछ रहा हूँ जिस आदमी का यह फोन है आप उसकी क्या लगती हैँ”
“क्योँ, आप कौन बोल रहे हैँ?”.
“बहनजी कृपया आप अन्यथा नहीं लेँ. इस आदमी का एक्सीडींट हो गया है. सड़क के किनारे यह पड़ा हुआ है. इसके जेब मे यह मोबाइल था और इसके इमरजेंसी नम्बर पर मैने आपको काल किया हूँ. कृपया बताइए आप कौन हैँ. इसके घर वालोँ को कृपया काल करके बता दीजिए कि इसका इक्सीडेंट हो गया है. इसके सिर से बहुत खून बहा है. इसको तुरंत अस्प्तल ले जाना चाहिए. वैसे हमलोँगोँ ने पुलिस और एम्बूलेंस को भी खबर कर दिया है”. फोन कटि गेल छल.
पीयूश !
एक्सीडेंट!
खून!
एम्बुलेंस!
पुलिस आ अस्पताल!
ई शब्द सब अँशुक दिमाग में कौंधे लागलनि. पीयूशक एक्सीडेंट भ गेल छलनि.
आब ओ की क सकैत छलीह. हुनका किच्छो नहि बुझि मे आबैत छलनि.
आइ भोरे सँ पीयूश लेल ओ कतेक गलत बात सोचने जा रहल छलीह. मानि लेल जाए जे पीयूश नहि रुकलाह... त की भेल एक बेर ओ हुनका रोकि सकैत छलीह. विवाहक वर्षगाँठक तैयारी ओ अपने सँ क सकैत छलीह. एकबेर हुनका नाश्ता करबाक लेल कहि सकैत छलीह. छट्टी लेबाक लेल कहि सकैत छलीह.
ओह! पीयूशक एक्सीडेंट भ गेल.
आइ दिन भरि हुनका कतेक कोसने छलीह. कोन कोन गप्प मोन में आनने छलीह.
हुनका माथ में कोन ठाम चोट लागल छलनि. कतेक खून बहल छल.
कहीँ किछु अनहोनी भ जानि तखन?
आइ विवाहक वर्षगाँठ पर हुनका एतेक श्रापने छलीह. कहीँ ई एक्सीडेंट ओही कारणसँ त नहि भेल?
अँशुक मोन कोनो एक दिशा में नहि जा रहल छलैन. कोनो निर्णय पर नहि पहुँचि रहल छलीह. मोन अपराधबोध सँ ग्रसित भेल छलनि. आँखि नोर सँ लाल भेल छल. मुदा नोरक धार नहि बहि रहल छल. नोरक धार दुख़क उपसँहार होइत छैक. दु:खक त ओ शुरुआते छल ओहो अनचोके. ओ आदमी कोन जगहक नाम कहने छलनि सेहो बिसैर गेलीह. टैक्सी आबए में टाइम लगेतन्हि आ बस रुकि रुकि केँ चलतनि. एहि परिस्थिति में हुनका के मददि लेल एतन्हि.
मोन भेलन्हि ठोहि पाड़ि के कानतीह. कि तखने फ्लैटक डोर-बेल बाजि उठल. ओह नीके भेल. किओ त आएल. ओ चटाक द केवाड़ खोलि देलथिन. आगू में पीयूश ठाढ छल. हुनकर हाथ में लैप-टोप नदारद छलनि. ओ घामे-पसीने तर बतर छल. ओ मुस्की मारि रहल छलाह.
तखन की... एहेन परिस्थिति मे हुनका सँ एकटा भद्दा मजाक काएल गेल छल? व्याहक वर्षगाँठ पर पतिक एक्सीडेंट हेबाक मजाक!
अँशु देखैत छथि जे पीयूश एखनहुँ धरि ठाढ छलाह. मुस्कि मारि रहल छलाह. एहेन भद्दा मजाक बुझबाक बाद हुनकर मोन आओर तामसेँ घोर भ गेल छलनि. ओ किछु नइँ बाजलीह. सोफा पर जा केँ धम्म सँ पड़ि गेलीह. कुशन में मुँह नुका केँ कानए लागलीह. दु:ख मे नोर, सुख में नोर, तामस में नोर, घृणा में नोर, यदि कोनो वश नइँ चलय तखन फेर सँ नोर. एहि बेर हुनकर नोर अनवरत बहि रहल छलनि. साइत एक घटनाक उपसँहार तैयार भ रहल छल.
एहि उपसँहारक मतलब छल जे हुनका आब यैह जिनगी जीबए पडतनि. अँशु केँ होएत छलनि जे स्त्रीक कोमल भावनाक पीयूश में कनियोटा ज्ञान नइँ छलनि. हुनकर फोनक घँटी फेर सँ बाजैत छनि. ओ विचारशुन्य छलीह. फोन में पुनः लिखल आबि रहल छलनि, “पीयूश इज कालिँग”. एहि बेर ओ सोचि नेने छलीह जे एहि भद्दा मजाकक लेल ओ पीयूशक कोनो दशा नहि छोडतीह. ओ फोन उठा नेने छलीह.
उम्हर सँ आवाज आएल, “मैडम, मैं इंसपेक्टर हारुण बोल रहा हूँ. मै इस आदमी को अपोलो अस्पताल के इमर्जेंसी वार्ड में भरती करवा दिया हूँ. आप रिशेप्शन पर आकर इनका वार्ड नम्बर पता कर सकते हैँ. मुझे थोड़े देर बाद में यहाँ से जाना पड़ेगा. जी हाँ, एक और बात... आप मडीवाला पुलिस स्टेशन पर इस आदमी का डीटेल लिखवा सकती हैँ”.
एत्तेक बात सुनि केँ अँशु केँ विश्वाश नहि भेलनि. एखने तुरंते तपीयूश घर आएल छल. जरूर कोनो पेँचीदा मामला छल. मुदा किओ एहि तरहेँ बेर बेर नहि फोन क सकैत अछि.
अँशु वैह नम्बर पर पुनः काल बैक केलैथ. उम्हर सँ आवाज आएल, “इंस्पेक्टर हारुण स्पीकिँग. जी मैडम आप कहाँ हैँ. मडीवाला पुलिस स्टेशन पर आपने डिटेल लिखवाया?
“जी नही? कृपया आप पुलिस स्टेशन का नम्बर दीजिए”
“अच्छा मैँ अभी एस.एम.एस. करता हूँ.” फोन कटि गेल आ किछुए काल मे एकटा एस.एम.एस हुनकर फोन पर आएल.
अँशु के किछु बुझि में नहि आबि रहल छलैन. ओ बेडरुम मे आबि केँ देखिलीह. ओतय नहि त पीयूशे उपस्थित छल आ नहिएँ हुनकर कोनो कपड़ा. हुनका भेलनि जो ओ जरुर बालकोनी मे प्लास्टिकक कुर्सी पर बैसल हेताह. ओ बरामदा में गेलीह. मुदा पीयूश उपस्थित नइँ छलाह. ओ गेस्ट रूम में जा केँ देखैत छैथ, ओ ओतहुँ नहि छलाह. स्टडी रुम ओहिना वीरान छल.
पीयूश कतओ नइँ छलाह. एतबी देर में कतए अलोपित भ गेलाह. ओ पुनः प्रत्येक रुम-बालकोनी में जा केँ निरीक्षण केलीह. डबल-बेडक नीचा मे जा केँ देखलीह. कतओ नहि भेटलनि. एतबी देर में फेर सँ अलोपित भ गेल. ओ हुनकर नाम सँ जोर सँ चीकरए लागलीह. कतओ सँ कोनो उत्तर नहि भेटलनि.
एस.एम.एस. मे आएल नम्बर पर ओ काल केलीह. उम्हर मडीवाला पुलिस स्टेशनक सर्किल आफिसर फोन उठेने छल. अँशुफोन पर पुछय छथि, “जी हाँ, आउटर रिँग-रोड पर भेल एक्सीडेंटक बारे में मैं बताना चाह रही थी”.
“जी हाँ बोलिए. नाम क्या है, इस आदमी का?
...नाम है, पीयूश कुमार.
“उम्र ?“
“बत्तीस साल”
“पता ?“
“कहाँ काम करते हैँ...”
“किधर जा रहे थे?“
दस तरहक जानकारी लेने होएत. अँशु सब किछु फटाफट कहैत गेलीह. लेकिन अंतिम प्रश्न में हुनकर कोँढ फाटि गेलनि”.
“जी हाँ, मैडम आप इस आदमी की क्या लगती हैँ”
“हम हिनकर पत्नी छिअनि”.
सर्किल आफिसर कहलकनि, “जी हाँ आप अस्पताल जाकर सब काम निपटा दीजिए. सुना है उसका हालत बहुत गम्भीर है. यदि कोई अनहोनी होती है तो मुझे उस बस वाले के उपर 302 धारा लगाना पडेगा. इसके लिए आपको कम से कम एक बार पुलिस स्टेशन आना पडेगा”.
अँशु केँ किछु नइँ फुरा रहल छलनि. ओ एक बेर फेर सँ जोर आवाज देलथिन, “सुनै छी.. कतय छी”. कतओ सँ कोनो जबाव नइँ आएल. ओ पुनः प्रत्येक रुम आ बालकोनी जा केँ देख एलीह.कतओ कोनो पता नहि.
पीयूश निपत्ताभ गेल छलाह. आब अँशु के विश्वाश होमए लगलैन जे एक्सीडेंटक घटना सत्य थीक. तखन ओ के छल जिनका लेल ओ गेट खोलने छली. हुनका लगे-रहो-मुन्ना-भाईक “केमिकल-लोचा” याद आबए लागलनि. व्यथित मोनक परेशानी बढ़लापर अलग अलग आकृतिक आभाष होइत छैक. ओ भोरे सँ परेशान छलीह. एक्सीडेंटक घटना सुनि आओर परेशान भ गेल छलीह. भ सकैत छल जे केमिकल लोचा सँ हुनका मोने मोन पीयूश देखा पड़लनि.
फेर सँ भोर सँ सोचल गेल नीगेटिव बात याद आबए लागलनि. यदि कोनो तरहेँ यदि कोनो अनहोनी भ जान्हि त अपना आप केँ कहियो माफ नइँ क सकैत छथि. कोन पति-पत्निमे नोक झोँक नइँ होइत छै. कोन पति पत्नि में लड़ाई नहि होइत छै. मुदा प्रत्येक लड़ाइक बाद समझौता सेहो होइत छैक. एही सँ जीवनक गाड़ी चलैत छैक. अँशु समझौताक लेल कोनो अवसरे नइँ दैत छली. भोर सँ निर्णय काएल गेल प्रत्येक आरोप में हुनका अपन गलतीक आभास भेलनि. ओ प्रत्येक गलती केँ चिह्नित क रहल छलीह जतय ओ अपन कनिए उदारता सँ मामला केँ सम्हारि सकैत छलीह.
मुदा आब कोनो उपाय नइँ. यदि भगवान हुनका एक अवसर दैथि त कहियो पीयूश सँ झगड़ा नइँ करतीह. एक बेर पीयूश केँ भगवान सही सलामत क दैथि. सब किछु ठीक भ जायत. ओ जतेक देवी देवताकेँ नाम सुनने छलीह सबहक आह्वाहन करए लागलीह. समय बिल्कूल नइँ छलैन्ह. अपोलो अस्पताल जल्दी सँ जल्दी पहुँचबाक छलनि. ओ निर्णय केने रहैथ जे आटो ल केँ सीधे अस्पताल पहुँचतीह.
अपन वार्डरोब खोलि केँ दस हजार टाका आ एकटा क्रेडीट-कार्ड सँग में राखि लेलीह. जल्दी मे केवाड़ लग पहुँचली तखन याद एलनि जे ओ त एखन जींस आ टीसर्ट पहिरने छथि. पति के एहि अवस्था में देखबाक लेल जींस आ टीशर्ट में किओ देखतनि, लोक की कहतनि.
पुनः अपन वार्ड रोब केँ खोलि दैत छथि. एकटा सलवार-सूट ल केँ पहिरबाक तैयारी करए लागैत छथि. कि तखने बेडरुम सँ अटैच बाथरूम सँ जोर सँ फ्लस चलबाक आवाज ओएत अछि. ओ घबरा जैत छथि. बाथरूम में के नुकाएल छल.
बाथरुमक केबाड़ खुलैत अछि...
अफिसे वाला पैंट सर्ट पहिरने पीयूश एक बेर फेर सँ देखा पडैत छनि.
किछु देर लेल अँशु पुनः स्तब्ध भ जैत छथि. “केमिकल लोचा” फेर सँ मोन पडैत छथि. ओ अपन जगह पर कोनो मूर्ति सदृश्य ठाढ़ भेल रहलीह. किछु नइँ फुरा पड़ि रहल छलनि. ओम्हर पीयूश बाथरुमक चौकठि पर ठाढ़ फेर सँ मुस्कि मारि रहल छलाह.
“सौरी... कोनो बात नहि साल भरि भ गेल छल ओकरा. आब नव नव कीनि लेब, आईए” माने एखने पीयूश शाँति आ नीरवता केँ भँग केने कहने छलाह.
“कोनो चीज नव नव कीनब अहाँ...”
“किएक हमर अंतिम फेसबुक अपडेट अहाँ नहिँ पढने छी, सैह..”  
“नइँ हम आइ फेसबुक नइँ खोलने छलहुँ. की अपडेट केने छलहुँ?
“अरे, हमर मोबाइल फोन चोरी भ गेल छल. बस में चढैते काल किओ पार क देलक. सैह ने अपडेट केने छलहुँ. अनेरो लोक सब फोन करैत होएत. एखन ककर फोन आएल छल”
मोबाइल फोनक चोरी, एक्सीडेंट, भगवानक विनती, पछिला दस मिनट सँ भेल इमोशनल ड्रामाक जड़ि बुझि में आबि गेल छलनि. भावनाक विर्रोह जतबे तीव्रता सँ उठल छल ओतबी जल्दी खत्म सेहो भ गेल छल.
भगवान सँ काएल गेल अपन प्रतिज्ञा हुनका एखनो याद छलनि. मुदा केमिकल लोचा हुनका एखनो धरि मोन केँ स्थिर नइँ होमए देबए चाहैत छलनि. ओ एक बेर पीयूश केँ छुबि केँ निश्चिँत होबए चाहैत छलीह जे कोनो “केमिकल लोचा” त नइँ. ओ जा केँ पीयूश केँ भरि पाँजर पकैड़ लैत छथि. पीयूश एकरा व्याहक वर्षगाँठक अनुराग बुझि रहल छलैथ. पीयूश अपन पकड़ के आओर मजगूत क दैत बाजैत छथि, “चालू ने आइ हमरा एकटा नीक सन मोबाइल फोन कीनि दिअ. हम अहीँक पसंद सँ लेब. कोनो आर्गूमेंट नहि. कखनहुँ हम अपन सीमा केँ उल्लँघन क दैत छी. हम कोशिश करब जे आब सँ एना नइँ होएत.
अँशु अपन पकड़ केँ से मजगूत क दैत छथि. हुनका मुँह सँ एकेटा शब्द निकलैत छनि... “गलती त हमरो रहैत अछि.”
“चलु कोनो बात नइँ फोन कीनबाक बाद अपना सब समरकंद रेस्टोरेंट चलब. ओतुका बिरियानी सुनलहुँ जे बहुत नीक होएत अछि.
ओकर बाद...?
ओकर बाद...!
रुकु आई पहिने हम चाह बनाबैत छी. कएक महीना भ गेल अछि अहाँ के चाह बना केँ पीएबाक लेल”
अँशु किछु नइँ बाजि रहल छलीह. हुनका आँखि सँ नोर अनवरत बहि रहल छलनि.
पीयूश कीचेन जा चुकल छलाह. अशुँ फेसबुक में लॉगिन करैत छथि. हुनकर देवाल पर चौरासी टा मैसेज छल, आ किओ हुनका दुनू लोकनिक फोटो पर कमेंट पोस्ट केने छल, “मेड फोर इच अदर कपल”. भोर सँ भेल घटनाक्रम केँ ओ बिसरि जेबाक प्रयास करय लगैत छथि.

कथा....भैरवी

कथा....भैरवी विवाहक पाँचम बरखक बाद अनायास भैरवीसँ चन्द्रेश्वर बाबाक मन्दिरमे भेट भेल छल। नरक निवारण चर्तुदशीक व्रत केने रही। मायक जिदपर...