मर्यादा

मर्यादा
दुपहिरियाक समय छल। हमरा दलानपर तास खेलिनिहार लोकनिक मजरेटी लागल छल। खेलाड़ी लोकनिक अतिरिक्तो लगभग 7-8 गोटे खेल देखबा लेल बैसल छला। ओहिमे हमहुँ सन्हिया कऽ बैसल रही। तखने मोबाइलमे आयल मैसेजपर नजरि पड़ल। पंकज बाबुक मोबाइलसँ मैसेज आयल छल। तै ँ हम झट दऽ एस.एम.एस. पढ़बा लेल मोबाइलपर क्लिक केलौ। मैसेजक पहिल लाइन ‘शशिप्रभा दीदी नहि रहली’ पढ़ैत देरी जेना हमरा देहमे करेण्ट लागि गेल। पहिने तँ विश्वास नहि भेल, मुदा पंकज बाबुपर अविश्वास करबाक कोनो काराणो नहि छल। किछु कालक बाद जखन स्थिर भेलौ। तँ दलानपरसँ बाहर आबि पंकज बाबुकेँ हम फोन केलौ।
-पंकज बाबु की सत्ते प्रभा दीदी आब एहि धरा धामपर नहि रहली ?
-हाँ हमरो एखने ई समाद भेटल अछि। तै ँ जँ अहा। दरभंगामे छी तँ शीघ्र डीएमसीएच पहुँची।
-पंकज बाबु हम तँ एखन गाममे छी। संगे भोरेसँ बरखा छूटबाक नाम नहि लऽ रहल अछि। एहनमे हमर दरभंगा पहुँचब संभव नहि अछि।
-यैह समस्याँ तँ हमरो संग अछि... एहिमे आब कयले की जा सकैछ। जाय वाली तँ चलि गेली।
पंकज बाबुसँ बात करबाक बाद मोन जेना विचलित भऽ उठल। रहि रहि कऽ शशिप्रभा दीदीक आभा हमरा सोझामे ठाढ़ होबऽ लागल। हृदय एखन धरि मानबा लेल तैयार नहि छल जे प्रभा दीदी हमरा लोकनिके ँ छोरि कऽ चलि गेली। एखन उमेरो कहाँ बेसी भेल छलनि। लगभग 40-45 बरख भेल हेतनि। एखने तँ किछु दिन पहिने हुनक बेटाक विवाहमे भेट भेल छल। प्रभा दीदी बड़ प्रसन्न छली। समाजक नियमक विपरीत जा ओ अपनो बेटाक विवाह देखऽ हेतु बरियाती गेल छली। किछु गोटे एहि बातक कुचर्च सेहो केने छला, मुदा चन्दा दीदी लेल धनिसन। ओ तँ बस अपन बातक पक्का छली।
प्रभा दीदीसँ हमर कोनो व्यक्तिगत संबंध नहि छल। हुनकासँ मात्र एक आध बेर भेट भेल छल। ओहि एक-आध भेटमे हम हुनकासँ बड़ प्रभावित भेल रही। बाजब-भुकबमे ओ बड़ बोल्ड छली। कोनो तरहक बात करबामे हुनका धाख नहि होइत छल। भने ओ बात सेक्ससँ सम्बन्धित कियक नहि होइ।
हमरा आइयो बड़ नीकसँ मोन अछि। पहिल बेर हुनका ओहि ठाम हम अपन मित्रक संग गेल छलौ। एहि क्रममे किछु गप उठल। चुकि बात छौड़ी-छौड़ा वला छल तै ँ हम हुनका सोझामे बेसी दिलचस्पी नहि लेलौ मुदा प्रभा दीदी निधोख भऽ बाजैत रहली। हम आ हमर मित्र हुनका हाँमे हाँ मिलबैत रहलौ। प्रभा दीदीक कहब छलनि जे ओही छौड़ीक नानीक घर हुनके टोलमे छनि। तै ँ ओ ओकरा रग-रगसँ वाकिफ छथि। एहिमे ओहि लड़काक कोनो दोष नहि अछि। सभटा खेल ओहि अबंड छौड़ी द्वारा खेलल गेल अछि।
हुनका एहि ठामसँ एबाक बाद हुनका सन्दर्भमे हम आ हमर मित्र बड़ी काल धरि बात करैत रहलौ। हमर मित्रक कहब छलनि जे आइ धरि ओ एतेक बोल्ड महिला नहि देखने छला। एकरा बाद प्रभा दीदीसँ कतौ ने कतौ भेट होइत रहल। एहि क्रममे संबंध प्रगाढ़ होइत गेल।
आइ प्रभा दीदीक मुइला लगभग 2 मास भऽ गेल। हम गामसँ दरभंगा आबि गेल रही। एहि क्रममे किछु गेाटेसँ ज्ञात भेल जे प्रभा दीदीक मृत्यु नेचुरल नहि छल। ओ विष खा नेने छली। ओतहि किछु गोटेक कहब छलनि जे डाॅ. हर्ष बाबु प्रभा दीदीके ँ विष खुआ मारि देलनि। ओना हमर मोन ई मानबा लेल पहिने तँ तैयारे नहि भेल मुदा जखन प्रभा दीदीक पड़ोसी आ हुनक सहेली उषासँ भेट भेल तँ सभ किछु स्पष्ट भऽ गेल। उषा दीदी हमरा आरम्भसँ अन्त धरिक कथा सुना देलनि।
प्रभा दीदी बेटाक विवाह करेबा लेल बड़ व्याकुल रहऽ लागल छली। घटक सभक कोनो कमी नहि छल मुदा डाण् हर्ष कोनो परिवारके ँ पसिनने नहि करै छलथिन। अन्तमे जखन प्रभा दीदीक हठ बहुत बढ़ि गेल तखन डाक्टर साहेब दरभंगा मेडिकल काॅलेजमे पढ़ि रहल हुनक एक गोट छात्रा अरपिताक पिताके ँ विवाहक हेतु प्रस्ताव पठौलनि। प्रभा दीदी अरपिताके ँ देखैत देरी पसिन कऽ लेने छलथिन। ओ तँ मात्र आब विवाहक प्रतीक्षा कऽ रहल छली। डाक्टर साहेबक प्रतिष्ठा देखि अरपिताक माता-पिता विवाह लेल तैयार भऽ गेला। धुमधुमाक संग विवाह संपन्न कराओल गेल। चतुर्थी दिन प्रभा दीदी द्विरागमन करा अरपिताकेँ अपना घर लऽ अनली। चतुर्थी रातिक लगभग 12 बजे अरपिता कोनो बात पर तमशायल छली। कियक तमशायल छली आ किनकापर से ककरो ज्ञात नहि भेल। ओना अन्तमे उषाजीसँ ज्ञात भेल जे सत्ते प्रभा दीदी विष खेने छली। प्रभा दीदी एहन डेग कियक उठेलनि ताहिपर उषाजी चुप्पी साधि लेलनि। ओना हमरा द्वारा बेर बेर आग्रह करबापर उषाजी ई अवश्य बतेलनि जे हुनको सन्देह छनि जे डा. हर्ष बाबु चन्दा दीदीकेँ विष खूवेलनि अछि। सन्देह हेबाक कारण पुछबापर उषाजी कहलनि जे सन्देहक पहिल कारण अछि जे प्रभाा जीकेँ जखन हाॅस्पिटलमे एडमिट कराओल गेल तखन ओ प्रायः मरि चुकल छली आओर दोसर जे हॅास्पिटलमे पोस्टमार्टम नहि होइ एहि लेल डा. हर्ष जमीन आसमान एक कऽ देने छला। एहिलेल ओ अपन पत्रकार मित्रक सहयोग लेबाक संग-संग शहरक एक गोट प्रतिष्ठित आ वरिष्ठ डाक्टरक सेहो मदति नेने छला। आब अहीं कहू जे जँ प्रभा दीदीक मृत्यु नार्मल छल तखन डा. हर्षक डरक कारण की ? कियक हुनक एक गोट मित्र पोस्टमार्टम रिपोर्ट बदलऽ हेतु बोरा भरि पैसा देबाक प्रस्ताव फोनपर देलनि।
उषाजीक ओहि ठामसँ एबाक बाद हम एहि खोजबीनमे लागि गेलौ जे आखिर मामला की अछि। एहि क्रममे हमरा जे ज्ञात भेल से सुनि हम अवाक रहि गेलौ। सत्त वा झूठ से तँ नहि कहि मुदा तरे-तर समाजमे एहि बातक चर्चा छल जे डा. हर्ष अपन पुतहु अरपीताक संग विवाहसँ पूर्वहिसँ फसल छथि। मधुश्रवाणीक प्राते ई बात प्रभा दीदी जानि गेल छली। पहिने तँ ओ लोक-वेदक लाजे एहि बातके ँ गौण रखलनि। संगहि हर्ष बाबुके ँ समझेबाक प्रयास केलनि। ओना हर्ष बाबु जखन अरपीतासँ सम्बन्ध तोड़बाक बात नहि मानलनि तखन प्रभा दीदी अरपीताके ँ समझेबाक प्रयास केलनि। अरपीता हुनक बात मानबासँ साफे नठि गेली। अरपीताक कहब छलैक जे आब ओकरा लग कोनो विकल्प नहि अछि। कारण ओकर पति ओकरा प्रसन्न रखबाक क्षमता नहि रखैत छथि। तै ँ जेना चलि रहल अछि। तहिना चलल देल जाय। अन्यथा ओ एहि बातक भंडाफोड़ कऽ देती जे हनुक पुत्र हुनका योग्य नहि अछि। संगहि एहन पुत्रक संग विवाह करा ओ लोकनि ओकर जीवन बर्बाद केलनि अछि। प्रभा दीदी लग आब अरपीताक बात मानबाक अतिरिक्त कोनो आन चारा नहि छल। तै ँ ओ बेचारी आँखिक सोझामे अरपीता आ डा. हर्षक रसलीला देखैत रहली। पहिने तँ डा. हर्ष आ अरपीता, प्रभा दीदीक परोक्षमे खेला बेला करैत छली मुदा ओहि दिन जखन प्रभा दीदी बजारसँ आपस एली तँ ओ देखलनि जे हुनका बेडरूममे हुनके पंलग पर अरपीता अपन ससुर डा. हर्षक संग आपत्तिजनक स्थितिमे छथि। ई बात हुनका बर्दास्त नहि भेलनि। तै ँ ओ भनसाघरमे राखल मूस मारबाक दवाई खा लेलनि। ओमहर अरपीता आ डा. हर्षक जखन खेला बेला समाप्त भेल तँ ओ लोकनि देखलनि जे प्रभा दीदी फर्शपर ओंघरायल छथि आ गज पोटा हुनका मुँहसँ जा रहल छनि। एकर बादो ओ लोकनि प्रभा दीदीके तखन हास्पिटलमे एडमिट नहि करा अगिला दिन अर्थात 10-15 घंटाक बाद हुनका हास्पिटलमे एडमिट करेलनि।
आइ प्रभा दीदीक पहिल बरखी अछि। डा. हर्ष एहि बातक जनतब फेसबुकपर सेहो देलनि अछि। आइ ओ अपना घरपर प्रभा दीदीक आत्माक शान्ति हेतु श्रद्धांजली सभाक आयोजन केने छथि। हम आ हमर मित्र सेहो ओहिमे उपस्थित हेबा लेल आयलौ अछि। हर्ष बाबुक चेहरापर दुखक कोनो छाप नहि अछि। अरपीता शोलह श्रृंगार केने अतिथि लोकनिक स्वागतमे लागल छथि। एहि क्रममे हमर ध्यान अरपीतापर जाइत अछि जे इशारासँ डा. हर्षके ँ बजा रहली अछि। किछुए कालमे डा. हर्ष अपना कोठली दिस विदा होइत छथि। हुनका पाछा-पाछा हमहुँ जाइत छी आ खिड़कीक अढ़सँ कोठलीमे झाखि कऽ देखैत छी। हर्ष बाबु आ अरपीता अलिंगनबद्ध छथि। अपना आँखिसँ देखल ई दृष्य हमरा ओ बात मानबा लेल विवश कऽ दैत अछि जे आइसँ किछु दिन पहिने किछु गोटेक मुँहे सुनने रही। संगहि ई सोचबापर सेहो विवश कऽ दैत अछि जे ई केहन मर्यादा अछि जेकर पालन ई लोकनि घरक भीतर तँ नहि मुदा बाहर समाजक बीच पालन करै छथि।