मिथिला ! अपन मिथिला !

मिथिला ! अपन मिथिला !
फ़ुइसक घर,
घरक चार पर लतडल कदीमा आ सजमईन,
भीतर सीक पर टांगल दही,
दलान पड कूट्टी खाइत बडद,
गणु झाक खीस्सा सुनबैत बुढहा,
खढियान मे राखल धानक बोझ,
भीति पर लीखल कोहबर,
आंगन मे लिखल अडिपन,
सामा-चकेबा,बगीया, पुडिकिया, तिलकोड,
पोखडि मे माछ आ मखान,
आर कतेक रास बात,
मिथिला, अपन मिथिला, अपन मैथिलि, अपन मैथिल !

5 comments:

Sanjay Jha said...

Padmanathji,
Excellent poem. It encompassed all the attributes of a Mithila's village. What can I say, it could be a poet using words instead of brush and paint on the canvas to paint the image of a village!! Believe me, while seating in the downtown of Toronto, this poem took me to my village!!!
Great efforts as well, please tell me how can I help you in your efforts. I am little disappointed, the way Maithil yahoo groups have been marginalised to a casual jokes, meaningless discussions and job posting forums! I sincerely loud your efforts to do something for Maithil and Mithila. Great efforts and my best wishes to you.

पद्मनाभ मिश्र said...

आदरणीय संजय बाबु,

बहुत नीक लागल अहाँक टिप्पणी पढि के. मैथिलीक प्रचार प्रसार केर वास्ते यदि अपना सभ केवल मैथिलीए मे लिखि तँ एहि सँ बढियाँ तरीका आओर की भ' सकैत अछि. हम स्वागत करैत छी अपनेक मैथिलीक ब्लोग मे. आ अपने सँ आग्रह करैत छी जे जखन लिखु मैथिली मे लिखु. आवश्यकता पडला पर हम हरदम साथ देबाक लेल तैयार छी. हम अपने सँ अपेक्षा राखैत छी जे अहां साढे चारि करोड मैथिलक बीच मे ब्रह्मान्डक दोसर व्यक्ति होयबाक सौभाग्य प्राप्त करब, ई अतिशयोक्ति नहि मुदा सार्वभौम सत्य थीक की अहां दोसर व्यक्ति होयब कारणे हम ब्रह्माण्डक पहिल व्यक्ति छी मैथिली भाषा केँ देवनागरी लिपि मे ईन्टरनेट पर आनय वाला.

पुनश्च हम अपनेक आदर आ स्वगत करैत छी. अपनेक मैथिलीक ब्लोगक अविलम्ब अपेक्षा आ आशा मे अपनेक,

पद्मनाभ मिश्र

travisgibson68373816 said...
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Nearly Man said...

Bhageerath prayasak lel Padmanabhjee ka bahut bahut badhai.Neek kavita chal muda ekhan dhari Mithilak gam sarasjeek shabda men ekaisham shadi men ghuskal ghuskal pahuchal achi.Yatrijeek 1947k kamna je parhta likhta kartah pass Jugal kamait aa Cheetan Khabash aa pratiyogitak ran men ee prant agrasar ho ekhan dhai apoorna achi.Lekin ee blogak madhyam sa Yatrijeek ek aur prarthana satya bha rahal achi "Atyant shaktishali je Desh achi tahu par ahi desh ker bhasa aa bhesh ke asar ho."Kam sa kam kichu ABCD ahi site par abi,kichu gunait heta.

S M Jha said...

Padmanabh Ji,
Ahank kavita padhi kay aankhi dabdaba gel. Office men baisal chhi. Lok puchhi rahal achi je ki bhel je anhan kanait chhi.

Pahil ber Ramdhari Singh "Dinkar" ke "Rashmirathi" padhalak bad men ham kanal rahi aar dosar ber ahank kavita padhi kay. Anhan ehan lok je hamesha sayad computer aur techonolgy ke baat karait hoyab, hunko karej men apan mati ke lel atek sneh!!!! Anhi ehan lokak maujoodagi san hamar Mithila banchal achi.

Rajeev ji ke kotisah dhanyavad je hamara ehi group men samil kaylah. Ham anhan dunu gote ke aabhari rahab.

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