इन्द्रजाल

मनीष झा ’बालचन’
समग्र मिथिलावासी के हमर प्रणाम। हमर ई पहिल पत्र थिक तें हेतु त्रुटिक लेल पहिनहे क्षमाक अभ्यर्थना करैत छी। भेलै ई जे राम भरोसे छ महिना पर काल्हि डिल्ली सऽ गाम आयल। साँझु पहर चौक पर भेटल छ्ल। भरोसिया लक्ष्मी नगर में फ़लक ठेला लगबैत अछि। मोन में विचार उठल जे अखन तऽ गर्मी में फ़ल खूब बिकाइत हेतै, तखन ई धंधा छोरि गाम में की झख मारऽ चलि आयल? पुछला पर कहलक जे मोन बड जोर खराब भऽ गेल छल, गाम में कनि दिन सुस्ता क जायब। भरोसियाक बदरंग मुँह कान देखि आब के कहतै जे कुश्ती में असगरे ई चारि टा जवान के पटकी दैत छल। धारक कात माघ मासक पूर्णीमा मेला में जत्थाक जत्था लोक अहि भरोसियाक तमाशा देखऽ अबैत छल। आब तऽ गाम में ने लोक रहल ने रहल सहल लोक में ओ बात। इहे सब बिचारैत दलान पर पहुँचलहु।बरद घर कऽ क कनि रेडियो धरौलहु। खेती बारिक कार्यक्रम चलि रहल छल। कोनो बिग्यानी धान में लागऽ बला कीडा सभक उपाय बुझा रहल छ्लाह। कनि काल में भरोसी धार दिस सऽ भऽ क दलान पर आयल। बडा गम्भीर जकाँ गप्प करै लागल। हम सब मिडिल स्कूल में सन्गे रहि। सन्गहि बड्का मालिक के ताड़ गाछ पर तर्कुन तोडैत पकरायल रहि। सब मिला क हमर सभक जोड बरद आ गर्दानी जकाँ छल। बात सऽ बुझायल जे बीमारी साधारण नहि थिक। ओकर पेट में पथरी भऽ गेल छलई। अपरेसऽनक लेल पाइ के जोगार में गाम आयल अछि। गाभिन महीस बेचऽ छारि आर कोनो उपै अखन नहि छै।महेस ठाकुर १० हज़ार देब लेल तैयार भेलै अछि मुदा ४ टका सुदि पर। महीस बेचि कऽ हेतै १५ हज़ार, तहु सऽ काज नहि चल्तै। भरना धरबाक लेल खेतो पथार त नहि छै भरोसिया के। लऽ दऽ क १० धुर घरारी बस, मुदा घरारी बेच जेता कतऽ? हम छि खेतीहर, दु बिघा जरसीमन अहि आ ४ कट्ठा गाछी। छ परानिक आसरम अहि। अपनेहे लोकनि कहियौ जे हम कतेक मददि करबै? बड भेलै त ३-४ हज़ार, सेहो घरबालि सऽ मारि कऽ क ग्रामीन बैंक बला फ़िक्स तोडेला पर। पर साल आम बेचने रहि तेकर पाइ धेने छी। भरोसीक भरोस आब टुटल जा रहल छल। ओ अपन घर दिस बिदा भेल। हम भोजन कऽ क दलान में परि रहलहु, मुदा नीन नहि भेल। हम कतौ बाहर कमै नहि गेलहु। गामक माटि कहियो जाने नहि छोडलक। जबान भेलहु त हमर सब संगी डिल्ली, पंजाब, बम्बई, कलकत्ता आ की जानी कतऽ कतऽ चलि गेल। गाम सऽ लोक बाइर‍हक पानि जकाँ बिला गेलै। पाइ के पियासल खेतिहर मजदूर आब चट्कल में, मिल में, दोकान में मजदूरी करय लागल, रिक्शा चलबै लागल, ठेला लग्बै लागल। अतेक केलाक बादो ओ गरीबीक आ बेबसिक अइ इन्द्रजाल सऽ नहि निकल सकल। देशक अजादी सऽ हमरा सन लोक सभ के कोन मतलब? अहिं सब कहु जे कोना अइ इन्द्रजाल सऽ गरीब बहरायत। आइ एत्बै, राति तीन पहर बीत गेल छै, कोतवाल अखनहि पहर दैत धार दिस गेल। आब सुतऽ दियऽ।

9 comments:

पद्मनाभ मिश्र said...

प्रिया मनीष जी,

अपनेक जतेक प्रशंशा कएल जाए ओतेक कम. हम सत्ते कहैत छी अपनेक ई प्रयास मैथिली भाषा आ ब्लोग केर ईतिहास मे एकटा अद्वितिय स्थान राखत. अपने सँ एकेटा आओर आग्रह जे किओ मैथिल बन्धु एहि प्रोजेक्ट (मैथिली ब्लोग) मे हिस्सा लेबाक इच्छा राखैथ अपना लोकनि केँ हुनकर स्वागत करबाक चाही. यदि अपनेक नजर मे एहेन कोनो एहेन व्यक्ति होयथि ता बताबी, हम हुनको हकार देबन्हिं.

अपनेक पद्मनाभ मिश्र

saketjha said...

hamra umid nahi chal je maithili me e sab cheej padhbak bhetat. ham ahina try keliye je ki mithila ke ahn kiyo sapoot chath je e sab likhtah. padhi ke mone bahoot khus bhel. e sab dekhi man hamra ash lagal je akhne maithil saput chath je maili ke aga bdheba pryash karait chath. ham hunka naman karaith chi.

Nearly Man said...

Bad neek Blog aa pahil chitthi Mithilak vartmanak peera sa sojhe sakshatkar karbait acchi.Badhai.

Rajeev Ranjan Lall said...

मनीष जी,
जखन हम अहाँ के Orkut प्रोफाइल पढलहुँ, तखन हमरा बुझा गेल छल जे नागार्जुन के रचना में रूचि राखय बला ई कोनो सामान्य जन नहि छैथ । आय अहाँ के ई ब्लोग पढि के हमरा विश्वास भऽ गेल जे अहाँक सूक्ष्म दृष्टि आ ओकरा प्रस्तुत करै के शैली प्रशंसनीय अछि । एनाहि अपन लेखनी के चलैत रहऽ देबै।
धन्यवाद सहित,
अपनेक राजीव रंजन लाल

Narayanjee said...

Pryia Mitra Manishji, Adbhoot lekhni aachi apne ke. Aatma sihar uthal apnek vichhar dekhi kai. Ham orkut ke samast maithil bandhu ke taraf san apne ke HARDIK ABHINANDAN karit chhi. Dhanyawad.

Anonymous said...

Dear manish ji,
Namaskaar..!
Hum aahan key sab khissa padhlon han. Sab got khissa padhi key ena lagal kii apan gam mein pahuchi gelon. Vah bahut bahut neek lagal.
Hum akhan Infosys Bangalore mein kaaj kay rahal chi, jatay hardum tay angreji mein batiyay aaor likhaya parait achi. Sey aahi mahol mein iiy sab padhi kay bahut hi mon prasanna bhay gel.

Aapnek ek maithil mitra
Sandip Kumar Ranjan

Muchkund Thakur said...

pahil prayash yadi atek nik achi ta aagu humera sab bhut beshi ke aasha karait chi. bahut badhiya, uttam.

Muchkund Thakur said...
This comment has been removed by the author.
Madan Kumar Jha said...

Bahut sundar Manishji Aajuk Mithilanchalak Gaam aa Garib Lok ke eyeh hal chhai Purn rupen satik chitran ehina aguo likhait rahab takar aash karait chhi... dhanyawad.

Madan Kumar Jha

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