मैथिली साहित्य’क मे अद्वितीय घटना. सितम्बर ०४, २००९.

31.3.07

रोपनी

कहु की हाल समाचार यौ? सब दुरुस्त ने? हमर हाल की कहु, रोपनी शुरु भऽ गेल अछि. अहि बेर हथिया बढिया जकाँ बरिसलय कहाँ? तैयो कोनो तर्हे धान तऽ रोपै के छैहे. टोल पर जा कऽ काल्हि साँझे जौन अढा एलहु. आइ भोरे खेत पर कादो करय के छल. हरवाह सन्गे खेत पर पहुँचलहु. भरोसी ६कठवा में झिमनी लत्ती उखाइर रहल छल, सन्गे ओकर छोट भाइ परिछ्न सेहो छलइ. परिछन पंजाब रहैया. कनी काल ओकरे सँ बतियेलहु. कहलक जे पंजाब में बडि-बडि टा खेत होइ छै. सब खेत एके सन्ग. मालिक अपने टेक्टर चलबै छै. आ दोआबक माटि त ओनाहु सोने उग्लै अछ. सोन त अपनो अपनो धरती उगलै छल. ओत पढल लिखल किसान सब नब-नब ढंग सऽ खेती करैत अछि. परिछना तऽ कहलक जे रोपनियो मशीने सऽ होइ छै. जोताइ, कोराइ, रोपाइ आ कटनी सभ मशीने करै छै. ओत धान बेगर कादो केनहे रोपै अछि. नबका किनुआ बीया सब कमे दिन में पाकि जाइ छै. ताइ पर सऽ लोक आयुर्वेदी दबाइ सब सेहो उपजबै अहि. रेडियो में तऽ कहै छलै जे पंजाबक किसान तऽ आब अमेरिको दिस जै लागल अछि खेति करै लेल. आब कहु जे ई सभ कहियो अपन सभ दिस हेतै की नै. आइ कल्हि तऽ केयो खेती करहे नहि चाहै अछि. खेतीहर तऽ कन्गाल भेल जा रहल अछि. अबुझ किसान अपन पुरान तरीका सऽ खेती करै अछि जाहि सऽ दु परानि के आश्रम चल्नाइ सेहो कठिन अछि. जगह जमीन बिलैल से जा रहल अछि. पढल लिखल नबजुबक के लेल खेति केनाइ बड्का बेज्जतीक बात भ गेल छै. कतेक त अन्नो आब दुर्लभ भ गेल अछि. माढ, साम, कुर्थि अइ सभ के तऽ अपने लोकनि नामो सुनने होयब की नहि! खेती में नफ़ा कोना हेतै? खेतीहरक इज्जैत कोना हेतै? अपने सँभ जकाँ पढल लिखल बुझनिक लोक सँभ जों रिटैर भेलाक बादो गाम वापिस आबि आ अपन अनुभव आ ग्यान हमरा सनक लोक सन्गे बान्टि त किछु अन्तर त जरूरे एतै. हजारो भरोसि आ परिछ्न के गाम नहि छोडय पडतै. गाम में पाइ ऐतै तऽ रोड, बिजली उद्योग, बड्का बजार ई सभ त अप्ने मोने भ जेतै. होउ बड सपना सभ देखलहु. बीया ल क जौन आबि गेल अछि. कादो भऽ गेलै, आब रोपनी कैल जै.

2 टिप्पणी (Give your comments):

ankurindia said...

nice blog

Rajesh said...

Ropni ke madhyam san je kichhu Bichar delon se nik ta lagal muda jakhan badhi man parait aichh ta kono ta sujhav dela san chaur,gahum ke kahai ghaaso bhenai bad kathin.