कुमारै रहबै

खोलह आँखि हे औढर-ढर तौं,
हम की आब कुमारै रहबै।

बौक बताह सब पार उतरि गेल,
नेंगरो मारै मोछ पर तान।
लगनक जोरगर कहु लुखबा केँ,
छोरेलक उहो गदहा छान।
नेना-भुटका राज भोगय यै,
हम सभ दिन झामें बुरबै...
खोलह आँखि हे औढर-ढर तौं,
हम की आब कुमारै रहबै।

सीनीयर के की बात पुछय छी,
जुनियर आब कहाबै पापा,
हम अखनि धरि भटकि रहल छी,
चढत मौर नहि हमरा माथा।
हमहुँ अनसन ठानि दैत छी,
माँग कोना मंजूर ने करबै...
खोलह आँखि हे औढर-ढर तौं,
हम की आब कुमारै रहबै।

हम तँ छाती पाथर केलहुँ,
हमरा विधि नहि लिखलनि ई।
बिनु रोजगारक विवाह करब नहि,
निश्चय हमर प्रतिज्ञा छी,
हमरा नहि अछि अपन चिन्ता,
दोसरक भार हम कोना उठैबे...
खोलह आँखि हे औढर-ढर तौं,
हम की आब कुमारै रहबै।

उमर नौकरीक बिती रहल अछि,
घर पर नहि अछि खेत पथारी।
मुँह बौने हम ठाढ देखै छी,
विकट समस्या बेरोजगारी।
घटक महोदय जे फेर में परलाह,
हुनको टाँग तारबे करबै...
खोलह आँखि हे औढर-ढर तौं,
हम की आब कुमारै रहबै।

5 comments:

Ajit Kumar Jha said...

Attiuttam j kahab taiyo kam rahat...bahu bahut dhanyabaad aahan lokainak aahi prayas ak lel...aagraha ja maithilikrit blogging k bikash ak lel hamra san lok k kichhu sikhebak prayatna kari..mail me likhabak tarika bistrit roop me likh pathabi ta kritagya hointau....

shushant said...

लय बड़ा जोरगर देने छी। बहुत नीक। एतेक नीक शैली के हेने अहाँ के हम जानैत नहि छलौंह। आउर कोनो एहने चुटकीला ल’ क’ आउ।

nitin said...

ehan laagal jena ahaan hamar-e manak baat kavitaa roop mein kanik layabaddha kay ka mahaadev sa kahi rahal chhi.............bahut bahut dhanyawaad ahaan ke.

Mani said...

wah wah...katek neek se aahan shabd ke prayog kayene chhi...padhi ka mon gadd gadd bha gel...
prays jari rakhu.....dosar kavita ke pratiksha achhi

करण समस्तीपुरी said...

जय हो इन्द्रकांत बाबू !
की कहू यो सरकार ! हम त राजीव जी के "बेगारता" पैढ़ के पहिनही मारे बेगारता के दू फांक भेल जाइत छालौंह आब उप्पर सा अहाँ एहन ने विकट समस्या सुनेलौं की करेज थमनाई मुश्किल ! मुदा एक्के बात ल के संतोष अछि जे अपनाहू ई समस्या से पीड़ित छी ! चलू, एक से भले दो ....