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24.4.07

अंतिम प्रणाम

हे मातृभूमि, अंतिम प्रणाम

अहिबातक पातिल फोड़ि-फाड़ि,
पहिलुक परिचय सब तोड़ि-ताड़ि,
पुरजन-परिजन सब छोड़ि-छाड़ि
हम जाय रहल छी आन ठाम
माँ मिथिले, ई अंतिम प्रणाम

दुःखओदधिसँ संतरण हेतु
चिरविस्मृत वस्तुक स्मरण हेतु
सूतल सृष्टिक जागरण हेतु
हम छोड़ि रहल छी अपना गाम

माँ मिथिले ई अंतिम प्रणाम

कर्मक फल भोगथु बूढ़ बाप
हम टा संतति, से हुनक पाप
ई जानि ह्वैन्हि जनु मनस्ताप
अनको बिसरक थिक हमर नाम

माँ मिथिले, ई अंतिम प्रणाम !

- वैद्यनाथ मिश्र ’यात्री’ (नवंबर १९३६)

1 टिप्पणी (Give your comments):

Opensourcia said...

Bahut khushi hui is naye prayas ke baare mein jaankar. Aasha hai kee aap sab isi prakar is madhur bhasa ka prachar prasar karte rahenge