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11.10.07

आजुक अखबार

धीरेन्द्र कुमार झा "धीरू"

सुर्य उदय सँ पहिने पहुँची, हम आजुक अखबार
बिना हमरे नित्य क्रिया नहि, योग, ध्यान, आहार।

ने हम्मर अछि जाति-पांति, ने बोली, ने भाषा
जेकरा जेहन भाव अपन छै दिअए हमर परिभाषा।
केओ सजाकर हमरा राखय, केयो दिअए फटकार
सुर्य उदय सँ...

दुपहरिया तक हमर गत्र के कियो चीड़ कए राखय
हमरे बात के ध्यान राखि कए, नेता भरि दिन भाखय।
हमरा ने चाही आरक्षण, बुद्धि हमर तलवार
सुर्य उदय सँ...

राजा-प्रजा, दोष-न्याय, कला, ज्ञान-गुण सागर
राग, द्वेष, ईर्ष्या ने हमरा, सबके करी उजागर।
मनुक्ख भले रंग के बदलय, हमर रंग अति गाढ़
सुर्य उदय सँ...

साँझ-राति तक हमर अधर के बदलि दिअए स्थान
चनाचूर के पाकेट बनबे, नहि त कूड़ादान।
तैयो हम निर्भीक सिपाही, भोरे फेर तैयार
सुर्य उदय सँ...

संस्कृति अध्यात्म में, आगु मिथिला भारत
देश मैथिल अपन शूक्ति निखारू, हम पँहुचायब सन्देश।
"धीरू" विश में देखा दिअउ, कोने कोन बिहार
सुर्य उदय सँ...

5 टिप्पणी (Give your comments):

अजित कुमार झा said...

Bahut nik lagal ..dhirendra bhaiji ak lekh padhba me..hunak lekhani sav me ekta alag swad bhetait aaichh ...dhanyabaad hunak lekh k blogikrit karva lel..

बालचन said...

Ati uttam Dhiru jee. apnek agila post ke pratiksha ahi.
Manish

डा. पद्मनाभ मिश्र said...

धीरेन्द्र जी;
बहुत नीक लागल अपनेक कविता आ अपनेक प्रयास. अपने एहि ब्लोग पर अपन कविता प्रकाशित कयलहुँ एहि लेल हम अपने केँ धन्यवाद दैत छी.
मुदा एतबे सँ नहि होमय वाला अछि. अपने केँ अपन मैथिली मे लिखबाक लेल पुन: प्रयत्न करय पड़त. हम सब अपनेक अगिला कहानी कविता’क लेल बाट ताकैत रहब.

Ashu said...

Hamra Sabd nahin bhet rahal aachi ki ki kahi.Bahut nik lagal

Ashu said...

Hamra Sabd nahin bhet rahal aachi ki ki kahi. Bahut nik lagal.