जलकुम्भी (कडी-३) ... मैथिली भाषा'क धारवाहिक उपन्यास

एखन धरि अपने लोकनि पढलहुँ एक अनजान मैथिल (अमोल) सँ एकटा मैथिल परिवारक जान-पहचान मुम्बईक लोकल रेलवे स्टेशन पर भेल छलन्हि. एहि परिवार मे वर्षा नामक आइ काल्हुक यूवती छलीह. अमोल'क एकटा मध्यम वर्गीय परिवार'क एकटा कर्मठ आ तेज यूवक छलाह. रँजीत केवल कर्मठ मुदा मेहनत'क बल पर आगू बढयवाला यूवक, जिनका उपर परिवार'क भिन्न-भिन्न सदस्य'क अपेक्षा छलन्हि. वर्षा अमोल केँ ई-मेल कय हाल चाल लेबाक कोशिश कयलन्हि मुदा एकटा छोट सन जवाब भावहीन जवाब पाबि अपने आप सँ कतेको प्रश्न पुछय लागय लागल्थिन्ह. आब आगू पढू...
अपने लोकनि पिछला भाग के एहि लिँक मे पढि सकैत छी.
अमोल ते मुम्बई मे छलाह मुदा हुनकर बाबुजी केँ चिन्ता रहैत छलन्हि. सबसँ पैघ चिन्ता जे अमोल'क बहिन विभा'क  विवह कोना होयत. एकते ओ जे.एन.यू मे एम फिल करैत छलीह, तेँ लडको ओहि प्रकृतिक चाही, आ दोसर जे विभा देखबा मे कोनो सुन्दर नहि छलीह, तेँ आइ काल्हि के कोन लडका हुनका पसन्द करतन्हि. आब ओ जमाना ते छल नहि जाहि मे लडका आ लडकी'क अपन वियाह मे अपन पसन्द'क बात करब एकटा अपराध मानल जायत छल. आब लडका कहु वा लडकी दुनू अपने पसन्द सँ वियाह करैत छैक. ओना गाम घर'क बात दोसर छैक. ओतय एखनो साबिक'क नियम'क पालन होयत अछि. माए बाप'क ताकल गेल जीवन-साथी'क सँग जीवन गुजरि जाति छैक. एकते पायरलाइसिस'क बीमारी आ दोसर चिन्ता मोन मे अमोल'क बढियाँ नौकरी'क कोनो बोध होमय नहि दैत छलन्हि. बोधे टा'क गप्प नहि चिन्ता अमोलो'क ल' के छलन्हि. कतओ अमोल अपने सँ वियाह कय लेथिन्ह ते की होयत? इएह सब उहापोह मे हुनका लागैत छलन्हि जे हुनकर जिन्दगी दिन-प्रतिदिन कम भ' रहल छन्हि.
इम्हर रँजीतक परिवार'क लोक केवल अपेक्षे टा बाँधि रँजीतक बाट ताकैत छलन्हि आ अमोल'क परिवार इच्छा नहि डर सँ कुपइत छ्ल ते उम्हर वर्षा'क मोन मे अन्तर्द्वन्द्व जारी छल. कखनो अमोल केँ बहुत नीक, ते कखनो बहुत खराप बुझैत छलीह. आ ताहु पर अमोल'क भाव-विहीन इ-मेल पाबि अपन शँका कएँ आओर ओझरा देलखिन्ह. ओहि दिन कालेज सँ वापस भेलीह तेँ बेर बेर अमोल'क दूई लाइन मे लिखल ई-मेल केँ लाख चाहितो बिसरि नहि पाबैत छलीह. राति मे हुनकर शँका'क केँ आओर मजबूती भेटलन्हि. बेसी परेशान भ' गेलीह. एहिना होइत छैक, मानव जाति'क प्रकृतिये इएह थीक. जे चीज आसानी सँ भेट जाए ओ चीज खराप आ जे सोचो मे अपन दायरा सँ बाहर छैक ओ बहुत नीक. नहि ते रँजीत जे हुनका सँ एत्तेक सभ्य आ बढियाँ जेकाँ बात करैत छलाह ओकरा बारे मे कोनो खयालो नहि आनि अमोल'क दूइ लाइनक इ-मेल'क पचड़ा मे ओ किएक पैरतथि. दूनियाँ मे यदि सबसँ बेसी कोनो वस्तु खतरनाक होइत छैक ते ओ थीक अपेक्षा. यदि अपेक्षा कयलहुँ ते गेलहुँ, आ एखन वर्षा केँ मोन मे एत्तेक ओझरी लागबाक कारण केवल अमोल सँ एकटा पढियाँ ई-मेल'क अपेक्षा छल.
बिछौन पर पडल वर्षा के नीन्द नहि अबति रहन्हि. हुनकर ध्यान पिछला महीना मे भेल घटना क्रम मे चलि गेलन्हि. रँजीत कतेक शिष्ट आ व्यवहारी. कतेक केयर लबय वाला. पिछला बेर जँ रँजीत आयल छलाह तेँ अपने मोने हुनका कहने छलाह, "वर्षा पकौडी नहि बनायब की?" आ हुनकर व्यबहारे देखि कहियो किचेन नहि जाए वाली वर्षा एत्तेक रास प्याज'क पकौडी बनौने छलीह. नीक बात सोचि लोक'क मोन स्थिर होइत छैक आ खराब बात सोचि बैचैनी. वर्षा एखन नीक बात सोचने छलीह, मोन मे शांति भेटलन्हि आ नहि जानि कखन सूति गेलीह.
समयक्रम बदलि रहल छल. इम्हर अमोल केँ रुद्रा बाबु'क निमन्त्रण याद छलन्हि आ मोने मोन पूरा प्लान करैत छलाह, जे अगिला शनि केँ जायब ते कोना जायब. सोचलाह जे उम्हरे ते हुनकर एकटा सँगी सेहो रहैत छलन्हि. तेँ अगिला शनि केँ लन्च अपन सँगी सँग काय चारि बजे दिन मे रुद्र बाबु'क ओतय जेताह. मुदा जेताह कोना. की हुनका कोनो सँदेश ल' जेबाक चाही वा नहि. रुद्र बाबुक घर मे कोनो छोट बच्चा ते छन्हि ने जे सँदेश'क अपेक्षा राखितन्हि. मुदा फेर सँ पाय'क कहल गेल बात मोन पडैत छलन्हि, "आब अहाँ विद्यार्थी नहि, अमोल ! आब अहाँ नौकरी करैत छी ? कतहु खाली हाथ नहि जाउ". ठीक ते अमोल मोन बना लेलक जे खाली हाथ नहि जायब. किछु ल' के जायब. फेर मोने मे प्रश्न उठलन्हि जे स्न्देश की ल' के जायब. मिठाई'क भाव ते मुम्बई मे आसमान छुने अछि आ ओहो कोनो नीक स्वाद वाला नहि. एक बेर मोन भेलनहि जे चाकलेट'क एकटा पैकेट ल' ली. १०० टाका मे काज भ' जायत आ कोनो परेशानी से नहि. मुदा फेर भेलन्हि जे रुद्र बाबु'क घर मे हुनकर बेटी जवान छन्हि. कहीँ हो न हो किछो आउर बुझि नहि जाथि. स्टेशन पर भेल बातचीत मे वर्षा कोनो बात नहि बाजल छलीह आ ओकर प्राते एकटा ई-मेल पठौने छलीह. पहिल नजर मे वर्षा कोन प्रकृतिक छलीह से बुझि मे नहि आयल छलीह. तेँ सन्देश मे ल' की जायब. ड्राई फ्रुट्स? मुदा रुद्र बाबु हुनका एकटा पक्का मैथिल बुझना जाइत छलन्हि, तेँ मैथिल'क घर मे चिनियाँ बादाम आ किश्मिश ल' के जायब ते अलगे परेशानी. आब अन्तर्द्वन्द्वक बेर अमोल'क छलन्हि. मुदा ई अन्तर्द्वद्व बहुत देर नहि चललैक आ अमोल विचार कयलन्हि जे आब ओ चाकलेट मिठाइ किछो नहि ल' जेताह. ओ एकटा कोनो नीक सन किताब कीनि रुद्र बाबु केँ भेँट देताह.
एहि बीच वर्षा अमोल'क बारे मे सोचनाइ बन्द क' देने छलीह. एहि सँ मोन मे शाँति रहन्हि. शुक्र केँ रँजीत'क मोबाइल पर फोन केने छलीह. रँजीतो बढियाँ सँ बात केने छलाह. एहि हुनका नहि जानि किएक मोन मे किछु बेसीए शाँति भेटलन्हि. एहि क्रम मे ओ लगभग बिसरि गेलीह जे अगिला शनि केँ अमोल घर पर आबय वाला छलाह. यदि पूर्ण रूपेन बिसरने छलीह ते कम सँ कम यादो नहि केने छलीह. आ याद नहि करय मे ओ जे सफल भेल छलीह ओहि सँ हुनका मोन मे किछु विशेष खुशी आ कन्फिडेन्स छलन्हि. सफलता आदमी'क अन्दर कन्फीडेन्स केँ बढाबैत छैक आ वर्षा'क ई घटनाक्रम एकर एकटा सटीक उदाहरण थीक.
शनि'क दिन. चारि बजे मे २ मिनट भेल छल. डाइनिन्ग रूम मे एम.टी. वी चैनल गाना सुनैत छलीह. रुद्र बाबु केँ ओ सब गाना कम आ नौटँकी बेसी बुझना जायत छलन्हि. तेँ अखबार मे आँखि गारि ओ एम. टी.वी' क उपस्थिति केँ फुसियेबा'क हर सम्भव प्रयास करैत छलथिन्ह. की हठाते घर'क घँटी बजि उठल. कनि देर लेल सन्न भ' गेल छलाह. बुझि मे नहि एलन्हि जे केवाड़ खोलबाक चाही. जाबय धरि अपना आप केँ सम्हारितथि ताबय मे वर्षा केवाड़ि खोलि देने छलीह. रुद्र-बाबु' के~म ते प्रसन्नता सँ आखि चमकि गेलेन्हि मुदा वर्षा चौँकि गेल छलीह. ओ सामान्य तखने भेल्खिन्ह जखन अमोल'क मुह सँ निकलल, "हाय हाउ आर यू?".
अमोल रुद्र बाबुकेँ आई पैर छुबि केँ गोर लागल रहथिन्ह. मना केला पर जवाब देने छलथिन्ह, " ई अपना लोक'क सँस्कृति थीक हमरा पालन करय दिअ". हुनको कोनो जवाब नहि छलन्हि आ पहिल नजर मे अमोल'क स्थान रुद्र बाबु'क हृदय मे ऊँच भ' गेल रहन्हि. क्रमशः हाल चाल पुछल गेल. आ सोफा मे धँसि अमोल'क चर्चा गम्भीर होमय लागल. बहुत बढियाँ सँ गप्प भेल छल ओहि दिन. कोनो टापिक नँहि छुटलन्हि. मिथिला आ मैथिल'क स्थिति सँ ल'क के देश दुनिया'क, राष्ट्रीय कोन अन्तरराष्ट्रीय कोन. सबसँ चर्चा भेल. अमोल अपन प्रतिभा'क छाप छोड़ि देने रहथिन्ह. आ अमोलो रुद्र बाबु सँ कम प्रभावित नहि भेल छलथिन्ह.
.........क्रमशः
पद्मनाभ मिश्र]

2 comments:

हेलो मिथिला said...

पद्मनाभजी,
सादर प्रणाम. अहांक पत्र मिलल. अहांक ब्लॉग देखलौं. बड़ नीक लागल. मन प्रसन्न भ गेल. सत्य कहल जाय त हमरा अहांक एहि ब्लॉग के बारे में पता नहिं छल ताहि कारणे नहिं देख पाबैत छलहुं.ओतेक दिन हम अहांक एतेक सुंदर ब्लॉग सं दूर रहलौं. चलु आब बराबर देखैत ..पढैत रहब....अहां सं काफी किछु सीखय लेल सेहो मिलत. अहां बताबय के कोशिश करब कि आओर कि सभ कएल जा सकय छै.. अहां आईटी...ओहि में इंफोसिस सं छी...आब त हम अहां के तंग करैत रहब.
एकटा बात आओर अचरच वाला छल कि बंगलौर में एक लाख मैथिल छी.. हुनका सभ के एक संग लाबय लेल विद्यापति समारोह...या मैथिल कार्यक्रम करय पड़त.
धन्यवाद
अहांक
हितेन्द्र गुप्ता
98736066966
guptehitendra@gmail.com

हेलो मिथिला said...

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