मिथिला के तरुआ

सौजन्य : निखिल रंजन झा
 
भिंडी
भिनभिनायत भिंडी के तरुआ, आगु आ ने रे मुँह जरुआ
हमरा बिनु उदास अछि थारी, करगर तरुआ रसगर तरकारी
 
कदीमा
गै भिंडी तोईं चुप्पहि रह, एहि सऽ आगु किछु नहि कह
लस-लस तरुआ, फचफच झोर, नाम सुनतहि खसतय नोर
खायत जे से खोदत दाँत, देखतहि तोरा सिकुड़ल नाक
हम कदीमा नमहर मोंट, भागलैं नहि तऽ काटबौ झोंट
 
आलू
जमा देबय हम थप्पड़ तड़-तड़, केलहिन के सब हमर परितर
छै जे मर्दक बेटा तोय, आबि के बान्ह लंगोटा तोय
की बाजति छैं माटि तर स', बाजय जेना जनाना घर स'
हमरे पर अछि दुनिया राजी, आब ज' बाजलैं बान्हबौ जाबी
हमर तरुआ लाजवाब, नाम हमर अछि लाल गुलाब
 
परवल
बहुत दूर स' आबि रहल छी, ताहि हेतु भऽ गेलऔं लेट
हम्मर तरुआ सेठ खायत अछि, ताहि हेतु नमरल छन्हि पेट
दु फाँक कऽ भरि मसाला, दियौ तेल नहि गड़बड़ झाला
दालि भात पर झटपट खाउ, भेल देर औफिस चलि जाउ
 
तिलकोर
सुनि हाल तिलकोर पंच, हाथ जोड़ि के बैसल मंच
सुंदर नाम हमर तिलकोर, हमरा लत्तिक ओर ना छोर
भेटी बिना मूल्य आ दाम, मिथिला भर पसरल अछि नाम

6 comments:

Niku said...

neek kavita. ahan blog chaloo rakhu!

Ajit said...

Badd nik lagal ...jihh me pani sang mon tarangit bha uthal aa jhatt da bidah bhelau kichhu tari ka khay lel...

NikhilJha said...

Aahan sabhak comments deikh ka humra ehsaas bha rahal aich je.. humra kich kich hameshe likhak chahi aa ee tham post karak chahi...

S M Jha said...

Bahut nik kavita jahi je appan mithila ke sugandh sa sugandhit achi. ekta nik prayas. baahar rahanihar lok je tarua bagharua ke bisari gel chathi........ hunka aab tilkorak paat lel jaroor bauaaey partani.........

Dilip said...

Wah Wah majaa aagel aahan ke "Mitila ke Tarua" padhke aapan sabhak kaleja chouda bhagel aur DIL kah uthal 'Wah TARUA Wah' 'Wah MITHILA Wah'

Sunil said...

Bahut nik lagal, ham sab mithila me ta mithila me ta nahi rahi pabi rahal chchi, muda anha sabke bajah san mithila ke darshan bha jaiya.

Sunil Mishra