जलकुम्भी भाग-४ (कड़ी-४)

 एखन धरि अपने लोकनि पढलहुँ जे कोना वर्षा'क भेँट अमोल सँ होयत छैक. वर्षा'क मोन मे अमोल आ रँजीत'क केहेन इमेज छैक. रुद्र बाबु अमोल आ रँजीत केँ कोन नजर सँ देखैत छथिन्ह. रँजीत'क परिवार'क लोक रँजीत सँ कोन तरह'क अपेक्षा राखैत छथिन्ह. आ सबसँ अन्त मे रँजीत'क रुद्र बाबु'क घर मे आगमन सँ केहेन परिवर्तन भेल. आब आगु पढु.
एहि बेर वर्षा केँ अमोल'क आगमन सँ कोनो परिवर्तन नहि बुझना गेलन्हि. वा ई बुझु जे वर्षा पुरा तरहेँ मोन बना लेने छलीह जे अपन दिमाग के भटके नहि देतीह. एही क्रम मे अमोल'क जे हुनकर घर आयल छलाह ते हुनकर कोनो बात पर कान नहि दैत छलीह. दुनियाँक इएह नियम थीक. लालसा आदमी केँ विचलित करैत छैक. आ अपूर्ण लालसा मोन केँ पूर्ण रूप सँ अस्थिर क'दैत छैक. यदि आदमी'क मोन मे कोनो विशेष लालसा नहि ते हुनकर जीवन बहुत सुखी रहैत छैक. एखन वर्षा अपन लालसा केँ अपन काबु मे कय लेने छलीह तेँ मोन मे कोनो विकार नहि छलन्हि.
उम्हर रँजीत'क गाम मे एकटा महत्वपूर्ण घटना भेलन्हि. मधुबनी'क किछु घटक ताकैत ताकैत रँजीत'क घर पर अयलन्हि. हुनकर जेठ भाई के रँजीत'क विवाह'क बारे मे बहुत किछु बात कहि के गेलथिन्ह. ओहि मे जे हुनका लोकनि केँ सबसँ महत्वपूर्ण लागलन्हि ओ छल दहेज'क रु मे बहुत पैसा आ समान. प्रस्तावित कन्या मैट्रिक तक पढल छलीह. मुदा हुनका लोकनि केँ रँजीत'क बात याद आबय लागलन्हि जे विवाह करताह ते कमसँ कम ग्रैजुएट लड़की सँ. ई बात नहि छलैक जे रँजीत मैट्रिक पास लड़की के संग जीवन नहि निवाहि सकैत छलाह. हुनकर विचार छलन्हि जे मिथिला मे स्त्रीगण'क शिक्षा पर एखनो बेसी ध्यान नहि देल जैत अछि. जखन लोक केँ कम पढल लिखल लड़की केँ विवाह करबा मे दिक्कत होयतन्हि तखन लोक अपने आप ध्यान देब' लागथिन्ह.
कोनो भाजेँ रँजीत'क भाई रँजीत के फोन कय एहि कथा'क बारे मे कहल्थिन्ह. रँजीत एक्के शब्द मे सब लोकनि केँ मना कय देल्थिन्ह. हुनकर कहब छलन्हि जे एकते ओ एखन बियाह नहि करताह. आ यदि कहियो वियाह करबो करताह ते कम सँ कम ग्रजुएट लड़की सँ. कतेको तर्क वितर्क भेल मुदा रँजीत एक्के ठाम कोनो भी कीमत पर राजी नहि होमय चाहैत छलथिन्ह.
समय बीतल जा रहल छल. वर्षा अपन मोन केँ स्थिर कौ देने छलीह. मोन के स्थिर करबाक उपक्रम के ऒ आब अमोल'क बारे मे बिल्कुल नहि सोचैत छलीह. मुदा हुनकर घर पर प्रत्येक रवि केँ नियमानुसार रँजीत'क एनाई जेनाई लागल छलन्हि. ओ आबतथि ते रुद्र बाबु सँ दुनियाँ प्रत्येक विषय पर चर्चा करतथि. ओहि मे कखनो कखनो वर्षा सेहो हिस्सा लैत रहथिन्ह आ अपने एक्के तर्क मे कहि दैत छलथिन्ह जे कन्ग्रेस कोन आ बी.जे.पी कोन सब एक्के थारी'क चट्टा बट्टा थीक. सब नेता एक्के. मुदा रँजीत आ रुद्र बाबु'क अपन अपन तर्क छलन्हि. जतय रुद्र बाबु कान्ग्रेस के कट्टर समर्थक ओतय रँजीत बी.जे.पी''क. कोनो दिन बात खतम नहि होमय आ जखन अगिला दिन राजनीति'क चर्चा शुरु होमय ते फेर सँ ओएह तर्क एक एक क' के रीपीट भेनाई शुरु भ' जाए.
मुदा जखन वर्षा केँ रँजीत सँ गप्प होमय ते रँजीत फिलोसोफीकल भ' जाथि. जीवन'क मतलब बताबे लागैथ. ई दुनियाँ, ई पैसा, ई घर द्वार, ई ठाठ बाट वाला जीन्दगी, सब किछु क्षनिक थीक असल बात ते आदमी'क वैल्यू मे रहैत छैक. एक दिन ते अमोल वर्षा के कहि देलथिन्ह जे जेना कोनो वस्तु'क कोनो मोल होयत छैक ओहिना आदमी'क मोल होयत छैक. मुदा एकटा अन्तर होइत छैक, वस्तु'क मोल हमेशा स्थिर होइत छैक आ आदमी'क मोल समय के हिसाब सँ घटैत बढैत रहैत छैक. आदमी चाहे ते अपन मोल बढा सकैत अछि आ चाहे ते घटा सकैत छैक. तेँ आदमी केँ हरदम अपन मोल बढेबा'क प्रयास करक चाही. रँजीत वर्षा के कहने छलथिन्ह जे एखन भ'सकैत छैक जे अहाँ हमर बात नहि बुझि सकब, कोनो दिन राति मे सुतय सँ पहिने एहि पर विचार क'देखब हमर बात अक्षरशः सत्य बुझना जायत.
ओहि दिन वर्षा सचमुचे राति के सुतय सँ पहिने रँजीत'क बात पर ध्यान केने छलीह.  बात ते ठीके कहने छलथिन्ह जे आदमी'क सेहो मुल्य होयत छैक. आ सबसँ बेसी जे आदमी यदि चाहय ते अपन मुल्य केँ घटा बढा सकैत छैक. लागलन्हि जे रँजीत'क विचार कोनो महान व्यक्ति'क लागैत छैक. अगिला दिन रँजीत के फोन कय कहल्थिन्ह जे अहाँ'क विचार सँ हम सहमत छी. आ हमर प्रयास रहत जे हम अपन मुल्य बढेबा'क हर सम्भव प्रयास करी. बाँकी ते सब किछु अपन हाथ मे नहि रहैत छैक. रन्जीतो हुनका जवाब देल्थिन्ह जे किछ चीज उपरवाला के उपर छोड़ि देबाक चाही.
ओहि दिन सँ वर्षा किछु गम्भीर रहय लागलीह. विशेष रुप सँ रँजीत'क प्रत्येक गप्प'क उपर मे विशेष ध्यान देब लागलीह. ओकर बात जतेक रवि केँ रँजीत रुद्र बाबु सँ भेँट करय आबथि वर्षा हुनकर बातचीत मे बढि चढि के हिस्सा लैथि. एहि बात'क नोटिस रुद्र बाबु सेहो लेलथिन्ह आ रँजीत केँ सेहो आभाष भय गेलन्हि जे वर्षा आब हुनकर बात के बेसी वैल्यू देब लागलथिन्ह.

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