आजुक अखबार

धीरेन्द्र कुमार झा "धीरू"

सुर्य उदय सँ पहिने पहुँची, हम आजुक अखबार
बिना हमरे नित्य क्रिया नहि, योग, ध्यान, आहार।

ने हम्मर अछि जाति-पांति, ने बोली, ने भाषा
जेकरा जेहन भाव अपन छै दिअए हमर परिभाषा।
केओ सजाकर हमरा राखय, केयो दिअए फटकार
सुर्य उदय सँ...

दुपहरिया तक हमर गत्र के कियो चीड़ कए राखय
हमरे बात के ध्यान राखि कए, नेता भरि दिन भाखय।
हमरा ने चाही आरक्षण, बुद्धि हमर तलवार
सुर्य उदय सँ...

राजा-प्रजा, दोष-न्याय, कला, ज्ञान-गुण सागर
राग, द्वेष, ईर्ष्या ने हमरा, सबके करी उजागर।
मनुक्ख भले रंग के बदलय, हमर रंग अति गाढ़
सुर्य उदय सँ...

साँझ-राति तक हमर अधर के बदलि दिअए स्थान
चनाचूर के पाकेट बनबे, नहि त कूड़ादान।
तैयो हम निर्भीक सिपाही, भोरे फेर तैयार
सुर्य उदय सँ...

संस्कृति अध्यात्म में, आगु मिथिला भारत
देश मैथिल अपन शूक्ति निखारू, हम पँहुचायब सन्देश।
"धीरू" विश में देखा दिअउ, कोने कोन बिहार
सुर्य उदय सँ...

कथा....भैरवी

कथा....भैरवी विवाहक पाँचम बरखक बाद अनायास भैरवीसँ चन्द्रेश्वर बाबाक मन्दिरमे भेट भेल छल। नरक निवारण चर्तुदशीक व्रत केने रही। मायक जिदपर...