विरह

सजन हमर छथि दूर हम स’,
मोन कोना के लागय री,
बलम हमर छथि दूर हम स’,
मोन कोना के लागय री।

सपना में देखलहुँ जे मूरत हुनकर,
मोने मोन मुसकाय री,
एक बेर देखतौं जे सूरत हुनकर,
दिल हमर हर्षायत री।
सजन हमर छथि दूर हम सं...

सभक सजन छथि संगे हुनकर,
हमर किया तरसाय री,
कतेक बरस गेल बीत हमर,
ई बरस कोना बिताय री।
सजन हमर छथि दूर हम सं...

अबकि जे औता ऊ पास में,
नहि देबैन हम जाय री,
सोना के देबैन्ह बान्हि सोना सँ,
देखबैन्ह कोना छुड़ाय री।
सजन हमर छथि दूर हम सं...

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कथा....भैरवी विवाहक पाँचम बरखक बाद अनायास भैरवीसँ चन्द्रेश्वर बाबाक मन्दिरमे भेट भेल छल। नरक निवारण चर्तुदशीक व्रत केने रही। मायक जिदपर...