सब गोटे अछि भिखमंगे बनल

रस्ता पर ओ भिख मांगिरहल
फाटल गुदरि मे लटपटायल
जाढ स कपकपाइत शरीर
थरथराइत हाथ आश स भरल

बिना बजोने जेना ओ बाजिरहल
आंखि स ऽ कहानि गाबिरहल
भुखले सुतल कतेको दिन सऽ
आंत मे आंत अछि ओकर सटल

भाबुक भऽ दु पाइ खसादेलौ
हर्षकऽ सिमा नहि रहलै ओकर
क्रितग्य भऽ मुसकियैत छल
नोर बहा धन्यबाद दैत रहल

आगा बढि मुडिकऽ जे देख्लौन
हजारो हाथ हुमरा दिस बढल
फाटल गुदरि मे सब कियो
लाचार भऽ किछु मांगिरहल

अतबे ज कियो कम त कियो बेसि
लाचारि आ बिबसता सऽ भरल
किछु नै किछु सब मांगिरहल
सब गोटे अछि भिखमंगे बनल

3 comments:

अजित कुमार झा said...

काज स लौटैत रहि त अनायसे किछु फुरल ...झट्ट द खेस्रा बना ब्लोग मे उताइर्देलौन...त्रुटि क लेल क्षमा करब /धन्यबाद

कुन्दन कुमार मल्लिक said...

कतय नुकायल छलहुँ। एहन भावपूर्ण प्रस्तुति आ ओहि पर कविता'क सौन्दर्यता आ साथे-साथ मात्रा'क पूर्णता एकरा एकटा सम्पूर्ण रचना बना रहल अछि।
किछु ध्यान टाइपिंग पर सेहो दिऔक!
हार्दिक बधाई स्वीकार करु। अगला पोस्ट'क प्रतीक्षा रहत।
सादर-
कुन्दन कुमार मल्लिक, बंगलोर,
सम्पर्क- +91-9739004970

naresh said...

hamra apne mein shabd k kami kahi ya ai kabita k lel uchit shabd nai hobak kaaran kahu, hamra apan majboori par khed yai ki ham uchit shabd nai da sakai chhi. par hamra lag j shabd yai oi k pryog sa kahab j bahut bahut bahut neek kabita. aur ai kabita k sab sa prasansiya baat j lachari aur majboori k drisyatmak roop dene chhi ajit jee satam baat prasansiya yai. dil bhabuk ta kaiye delau lekin j aanad oi bhabukta k khusi mein yai , man prassan bha gel. bhut neek kabita ajit jee

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