किछु त कहू…

कहय के अछि अहाँ सँ,
एना ने रहू !
चुप-चाप की छी बैसल,
किछु त कहू !!

बीतल पहर,
सांझ आयल नजर !
ई छी जिनगी'क गाड़ी,
आ जग के'र डगर !!
बौरायल सवारी,
बाट बिसरल अनाड़ी !
ने अछि केकरो आशा,
अपन बल करू !
चुप-चाप की छी बैसल,
किछु त कहू !!

नहिं बैसू बनि के पत्थर,
छथि भाव देने ईश्वर !
वैह भाव के दी'अ स्वर,
अभाव नहिं करू !!
चुप-चाप की छी बैसल,
किछु त कहू !!

ई छी काल'क तराजू,
आ किस्मत के पलडा !
कोनो दिस हल्लुक,
कोनो दिस तगरा !!
अछि अपने पर निर्भर,
जे किछु भs रहल अछि,
मरू भीतरे-भीतरे,
कि हँसी के सहू !
चुप-चाप की छी बैसल,
किछु त कहू !!
- करण समस्तीपुरी

10 comments:

rajeevranjanlall said...

नहिं बैसू बनि के पत्थर,
छथि भाव देने ईश्वर !
वैह भाव के दी'अ स्वर,
अभाव नहिं करू !!
चुप-चाप की छी बैसल,
किछु त कहू !!


केशव जी, बहुत बढ़ियाँ भाव अछि। अहाँक पहिल रचना के स्वागत कतेक रास बात मंच पर। आगाँ अहाँ से बहुत रास अपेक्षा एहि मंच के आउर प्रतिष्ठित बनाबय के लेल।

सादर,
राजीव रंजन लाल

Manish Kumar Jha said...

Karan ji,

Bahut nik kavita achi,kiyak tah ii Samoocha panti ek taa sandesh de rahal achi,je ki kono ne kono tarhe humra,ahan aur humra lagay yaa samoocha manav jeevan ke parilaxiit karait yaa,ahi hetu ahan ke humra taraf se koti koti dhyanbad.

Manish

rachna said...

कहय के अछि अहाँ सँ,
एना ने रहू !
चुप-चाप की छी बैसल,
किछु त कहू !!
keshav ji...

bahoooot achha laga padh kar... is kavita ka jo moral hai jaha tak mai samjh pai hun .. wo hai... Recognize yourself !
Believe in yourself !
It's only you who can turn things around you !
ye kafi pasand aaya meko....
1st mathili peom likhne ke liye apko bahot bahot mubarakbad..
aise he ap achhe achhe maithili poem likha karo.

Regards
Rachna

कुन्दन कुमार मल्लिक said...

कि यौ सरकार,
ई अपनेक रचना अछि की? बुझना नहिं पडैत अछि जे इ ओहि व्यक्ति'क लेखनी सँ निकलल अछि जे जहिया सs राजीवजी'क "बेगरता" पढलथि तहिया सँ बौरायल घुमि रहल छथि!
बहुत नीक प्रस्तुति, गम्भीर सोच, कथ्य आ शिल्प दूनू में सहजता आ संगे-संग सौन्दर्य सेहो।
शुभकामना
अपनेक-
कुन्दन कुमार मल्लिक

डा. पद्मनाभ मिश्र said...

हमरा बुझने कतेक रास बात'क इतिहास मे आई तक के सबसँ बढ़ियाँ कविता. बाँकी लोकनि ते कोनो भाजेँ कविता लिखि दैत छथि मुदा करण जी अहाँ बिल्कूल पेशेवर छी. कतेक रास बात पर अहाँक उपस्थिति बहुत सहायक सिद्ध होयत. हमरा अहाँ सन सन'क यूवा मैथिल'क आवश्यकता अछि जे समाज मे मैथिली के आगू लऽ जा सकैत अछि. अहीँ सन लोक मैथिल यूवा केँ सन्देश दऽ सकैत अछि जे मैथिली बाजनाई, लिखनाई एक सम्मान'क गऽप्प थीक.

@रचना जी;
हम अपनेक टिप्पणी सँ १००% सहमति राखैत छी. एक्केटा बात'क शिकायत अछि यदि अहाँ एहि सब बात मैथिली मे लिखने होइतहुँ तऽ आरि चाँद लागि गेल होयत.

अपनेक
डा. पद्म्नाभ मिश्र

डा. पद्मनाभ मिश्र said...

करण जी;
पहिल टिप्पणी सँ मोन नहि भरल. अहाँक कविता मे एक पैराग्राफ हम अपना दिश सँ जोड़ि दैत छी.
........
हमरा बुझल अछि जे,
अहाँ चुप्प नहि रहब,
कहियो ने कहियो,
किस्मत'क पलड़ा भारी होयत,
अहाँ'क मुँह सँ निकलत ओएह बात,
जकर ताकि रहल छी हम बाट
मुदा प्रतीक्षा सँ व्याकूल छी हम,
अन्तर्द्वन्द्व मे फँसल छी हम,
हमरा एहि सँ उबारू,
चुप चाप की छी बैसल,
किछु तऽ कहु....

आर कतेक रास बात

डा. पद्मनाभ मिश्र

Rajesh said...

ki kahu kena kahu kichhu ne furaiye,
rahi- rahi hamar man ahin dish jaiyai,
kahan kahu, kat' kahu jee udhiyaiye,
ja fer kichhu likh bhejab, ta ki hal hait se kekra sa ki kahu,

Bisrab nahi hamro,
hamar mon bahlabait rahu.

Hamre chhi sapath kichhu ne kichhu likhait rahu.

Bahut Badiya
Nihshabd Chhi
DHANYABAD

डा. पद्मनाभ मिश्र said...

राजेश जी;
हम अहाँक चारि लानि सँ निशब्द छी. कतेक रास बात मे अहाँ'क रचना'क स्वागत अछि.

टीम;
अगिला कन्ट्रिब्यूटर श्री राजेश जी केँ स्वागत कायल जाओ. राजीव जी, राजेश जी केँ ब्लोग'क लेखक/कवि'क लिस्ट मे शामिल कऽ लेल जाए आ हुनका निमन्त्रण पठाओल जाए.

राजेश जी अहाँ टिप्पणी द्वारा अपन ई-मेल बताबु.

Anonymous said...

Sir,

Apne hamro tippni par dhyaan deliyaik, Hriday san Dhanyabad!

Hamra paas me DEVNAGRI FONT ke Abhav aichh, Maithili bhasa ke English font me dekhi ke khud hamra apne sharm jekan hoit aichh,

Salah Chahait chhi, aa ego mouka avshya chahait chhi. Apan teem me laik lel Punah DHANYABAD.

Hamar ID aichh:
rajesh90ranjan@gmail.com

santosh Kr. Mishra said...

ehi kabita ka bhab nik aichha muda rhythm bahoot ber tuita gel chhain.

te kabi mahodaya sa aagraha je kane sudharaka aawasyakta jaruri chaina

कथा....भैरवी

कथा....भैरवी विवाहक पाँचम बरखक बाद अनायास भैरवीसँ चन्द्रेश्वर बाबाक मन्दिरमे भेट भेल छल। नरक निवारण चर्तुदशीक व्रत केने रही। मायक जिदपर...