एकसरि- सुभाष चन्द्र

1. एकसरि

भटकैत-बौआइत छी, एम्हर-ओम्हर
लोक कहैत अछि कोनो भूत-पिशाच'क असर
एतय चर्च नहिं करब ओकर
टीस रहि जायत उमरि भर
देखल जहिया सँ परछई ओकर,
भटकैत छी, एक शहर सs दोसर शहर
के कहत एक्के बाट'क बटोही छी
अलग-अलग होयत अछि सभहक रस्ता
ओहिठाम करैत छी प्रार्थना
जतय नहिं कोनो देबाल
आ नहिं कोनो घर
रहैत छी एकसरि।
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2. मजबूरी
अन्हरिया फेर घेरलक आई,
आबि गेल फेर नव प्रभात
एहि चिडैं के किछु नहिं बुझल
होएत कोन डारि पर बसेरा आई
चहुँ ओर घुमैत अछि करिया नाग
ताकू ओ,
कतय अछि सपेरा आई
कतेक हरियल-भरल-पूरल
भs गेल बोन-झाँखुर
फूल'क सुगन्ध सँ आई
एहिठाम त फूल खिलैत छल
कोना कय पतझड'क भेल एतय ठौर
होयत रक्षक'क कोनो मजबूरी
जे बनि के आयल लुटेरा आई
सभ केँ छन्हि तूफान'क भय
जाहि में डूबल अछि हमर शरीर आई।
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3. बिछुडन
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जे सच अछि अहाँ सँ कहैत छी
आई हम धरैन जेकाँ खसैत छी
घेर लैत अछि पुरनका स्मृति
जेखन हम एकसरि उदास रहैत छी
ओ सभ तs भs गेल गंगाजल
मुदा, हम सागर में भसियाइत छी
जहिया सँ अयलहुँ एहि शहर में
दुख हरेक दिन बिछुडन'क होयत अछि।
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(एक बेर फेर श्री सुभाष चन्द्रजी'क रचना लय के आयल छी। एहि मंच पर युवा रचनाकार सुभाषजी'क इ दोसर प्रस्तुति छी। हुनक दूनू रचना गजल शैली में अछि। पेशा सँ पत्रकार सुभाषजी हिन्दी आ मैथिली साहित्य में सेहो सक्रिय छथि। एहि मंच पर हुनक पहिल रचना आ परिचय के लेल एतय क्लिक करु
सम्पर्क- सुभाष चन्द्र,
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नई दिल्ली- 110088,
मो.- +91-98718 46705
ई-मेल-
subhashinmedia@gmail.com)

3 comments:

करण समस्तीपुरी said...

सुभाष जी'क ग़ज़ल के गुणवत्ता त प्रशन्सा'क परिधि पार केने अछि ! तिन्नु रचना एका पर एक !!! मुदा तेसरका रचना हमरा किछु बेसिए नीक लागल ! किए'क, पीड़ा के अनुभूति के अभिव्यंजना हमरा बुझने बड़ा कठिन कार्य छी आ तेकरा सुभाष जी एतेक सहजता आ सरसता से व्यक्त केने छथि, जे हम एक्कर तारीफ में शब्दे बिसरि रहल छी ! बड नीक सुभाष जी ! अहिना लागल रहू आ हमरो सब के काव्यानंद से आह्लादित करैत रहू एक्के टा आग्रह फेर, जे कविता के जटिलता से बचयेबा'क एहने प्रयास करैत रहू !! साथे, सुभाष जी सन कोहिनूर हीरा का परखानिहार जौहरी कुन्दन जी सेहो अनन्य धन्यवाद के पात्र छथि !

Rajesh said...

Subhash jee!!

Ahank likhal gajal rupi kaveta ber-ber dil chhulak. apan besura gla san tarj daik koshish kayal muda
nahi bha sakal.
Bichhuran andar me tis utha delak aichh.
"DHANYABAD"
Bishesh Dosar Ber..
Rajesh Jha
Darbhanga
rajesh90ranjan@gmail.com

subhash said...

bhai karan jee,

ahank utsahvardhanak lel kotisah abhar. prayas kareit chhi likhbak. kon nik hoit chhai aa kon bejay, ekar nirnay ta aha savhak vichar bhetlak baade gyat hoit achhi.
apne savhak sahyog sa deg badha rahal chhi.