कतेक रास बातक सम्पादक मंडली द्वारा "सामूहिक कथा-सृजन" हेतु सुनिश्चित नियमावली :
कहानी कें आरम्भ केओ कए सकैत छथि ! २. पहिल भागक प्रकाशनोपरांत केओ दोसर लेखक अगिला भाग लिखए खातिर अपन दावा पेश कए सकैत छथि ! ३. कथाक आरंभकर्ता स्वतः एकर मोडरेटर रहताह ! ४. कुनो लेखक कथानक के बढाबैत कतेको लिख सकैत छथि. मुदा गत कथानक से विरोधाभाष वा विसंगति नहि होएबा चाही ! ५. प्रथम लेखकक अतिरिक्त केवल केओ दू लेखकगण कथा मे नव पात्रक प्रवेश करा सकैत छथि. ६. कथाक आरम्भ मे सुनिश्चित लेखकदल के क्रमागत अंतिम लेखक कथा कें समापन कए सकैत छथि. अंतिम लेखकक असमर्थताक स्थिति मे केओ आन लेखक एहि कार्य के संपादित कए सकैत छथि. ७. कथाक एक भाग लिखबाक लेल प्रत्येक लेखक कें अधिकतम पांच दिन आवंटित छैन्ह ! ----------------------------------------------- एहि अद्वितीय घटना’क गवाह बनु. कतेक रास बात केँ विजिट करैत रहु. -पद्मनाभ मिश्र
आमन्त्रण
"कतेक रास बात" केँ अवैतनिक मुख्य सम्पादक’क तलाश: बन्धुगण कतेक रास बात मे मुख्य सम्पादक’क स्थान रिक्त अछि आ अवेदन आमँत्रित अछि. एहि लेल अहर्रता निम्न अछि, एहेन लोक जे (१) मैथिली मे एम.ए. आ १० साल’क साहित्य अध्यापन केने होइथ, अथवा (ब०) मैथिली मे पी.एच.डी होइथ, अथवा (स०) कम सँ कम तीन मैथिली पुस्तक के रचना केने होइथ आ (२) इन्टरनेट के प्रयोग जानैत होइथि आ सप्ताह मे दू घँटा योगदान कऽ सकैत होइथि. आवेदन padmanabh @vidyapati.org ई-मेल पर काएल जा सकैत अछि. उद्देश्य: सर्वश्रेष्ट, अति सम्मानित, योग्य एवम आसान मैथिली वेबसाईट प्रदान करब जे मैथिली रचनाकार हेतु अपन रचना प्रकाशित करबाक हेतु एकीकृत मँच हो. कतेक रास बात: मैथिली रचनाकार केँ अपन रचना प्रकाशित करबाक लेल एकटा मँच प्रदान करैत अछि. मैथिली भाषा आ देवनागरी लिपि मे लिखल कविता, कहानी, सँस्मरण अथवा सम समायिक विषय पर लेख आमन्त्रित अछि. मैथिली लिखबा'क तकनीकी सहयोग'क लेल अथवा अपन रचना प्रकाशित करबा'क लेल अपने लोकनि editor @vidyapati.org पर सम्पर्क करु.
मुख्य-संपादक (कार्यवाही) १. डा० पद्मनाभ मिश्र
सम्पादक मन्डली; २. राजीव रंजन लाल ३. केशव करण (समस्तीपूरी) ४. कुन्दन कुमार मल्लिक ५. श्री सुभाष चन्द्र झा
जुआइल टिप्पणीकार
दस सबसँ बेसी टिप्पणी लिखए वाला लोक. ई अपने आप अपडेट होयत.
"कतेक रास बात" में अहाँक माताजीक स्वर विविधता आनि रहल अछि आ ई हमरा सभक लेल अहोभाग्य जे ई मंच के अहाँ उपयुक्त माध्यम बुझलौं। अखन बहुत रास प्रयास के जरूरत छैक तकनीक के सहज रूपे आम आदमी के लेल कारगर बनाबै के लेल।
आशा अछि जे अहाँक देल विविधता (दृश्य/श्रव्य माध्यम) "कतेक रास बात" के आगाँ बेसी मनोरंजक बनाओत।
3 टिप्पणी (Give your comments):
Shriman,
Jadi yehi geet ke shrvya madhyam ke alawe drishya madhyam (devnagiri)mein rupantarit ka daitey ta basi neek. sab lag wo pahunchait...
Subhash
new delhi
jaldiye karbaak koshish karab
विजय जी,
"कतेक रास बात" में अहाँक माताजीक स्वर विविधता आनि रहल अछि आ ई हमरा सभक लेल अहोभाग्य जे ई मंच के अहाँ उपयुक्त माध्यम बुझलौं। अखन बहुत रास प्रयास के जरूरत छैक तकनीक के सहज रूपे आम आदमी के लेल कारगर बनाबै के लेल।
आशा अछि जे अहाँक देल विविधता (दृश्य/श्रव्य माध्यम) "कतेक रास बात" के आगाँ बेसी मनोरंजक बनाओत।
धन्यवाद,
राजीव रंजन लाल
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