आएल दिवाली…. !

आएल दिवाली, छाएल नव-प्रकाश !
जरल खुशी के दीप, भेल तमक नाश !!
आएल दिवाली, छाएल नव-प्रकाश !!
एहि नव-प्रकाश मे जग जग-मगाएल !
पर प्रवासी जीवक देश मोन आएल !!
एतय लक्ष्मी बल पर दिवाली अछि सदिखन !
ओतय आँखि बिछौने होयेता स्नेही परिजन !!
गामक एकपरिया लगौने होएत आश !
आएल दिवाली, छाएल नव-प्रकाश !!
कतेक रास बात करैत होएत चौपालक साथी !
झींगुर दास बनौने होएत स्पेशल लुक्का पाती !!
आँखि मे रोकने नोरक धार !
माय सजौने होयति दीपक थार !!
कयने होयति हमरा ले लक्ष्मीक उपास !
आएल दिवाली, छाएल नव-प्रकाश !!
मोन पडैत अछि ओ ज्योतिर्मय सांझ !
माटिक दियाक अमसिया पर राज !!
चम-चम चमकैत निशा बिन मयंक !
कि जानि किनका ले बिछौने निज अंक !!
शुभ्र-वसन, सजल नयन, रजनिक उच्छवास !
आएल दिवाली, छाएल नव-प्रकाश !!

सुधि पाठक लोकनि,
रोटीक संघर्ष कतेक दिन से कलम पर लगाम लगौने छल मुदा दिवाली के दस्तक सभटा बंधन तोरि फेर से हमरा स्मृति लोक मे पहुंचा देलक! ओतय हम जे देखल से अहाँ लोकनिक लेल नेने आएल छी. आब केहन छैक, से निर्णय त' अहीं के अधिकार मे अछि !!
लुक्का पातिक शुभ कामना के साथ,
- करण समस्तीपुरी

8 comments:

manvinder bhimber said...

दीपावली पर हार्दिक शुभकामनाएँ!
दीवाली आप के और आप के परिवार के लिए सर्वांग समृद्धि लाए!

Udan Tashtari said...

दीपावली के इस शुभ अवसर पर आप और आपके परिवार को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाऐं.

आदि यायावर said...

केशव जी;
अपनेक नेप्थ्य सँ निकलल आवाज, आ कखन्हुँ कखनहुँ स्टेज पर आबि साहित्य’क छटा कतेक रास बात मे चारि टा नहि मुदा सोलह टा चान्द जोड़ि दैत छैक. अपनेक योगदान दुनू दिस सँ जारी रहत (नेप्थ्य सँ आ स्टेज सँ) तकर आशा. दीपावली’क शुभकामना.
पद्मनाभ मिश्र

Gyan said...

Ati sundar. Aab ham hun deep nai sahi candle ta barne hi aabi :)

subhash said...

bahut nik rachna, bilkul antahkaran sa niklal achhi sh. karan jee ke ee rachna.

subhash, delhi

Manoranjan Kumar said...

अपsन मातृभाषा मैथिली में कविता पढि मोन गद गद भs गेल. नीक रचना के लेल बहुत बहुत बधाई.
मनोरंजन कुमार झा
दिल्ली

करण समस्तीपुरी said...

सर्वप्रथम भीमवर जी आ उड़न तस्तरी जी के स्वागत ! ब्लॉग भ्रमण एवं प्रतिक्रया हेतु सभटा नव पुरान आगंतुक लोकनिक कोटिशः धन्यवाद ! पद्मनाभ जी, अपनेक की कहू, प्रेरणाश्रोत त' अपनहि छी !! आब कतेक रास बात बाद में कहब !
एक बेर फेर सभ केओ के धन्यवाद !!!

कुन्दन कुमार मल्लिक said...

दीवाली के संगे-संग प्रवासी जीवनक विवशता के प्रकट करैत एकटा नीक प्रस्तुति।
विलम्ब सँ प्रतिक्रिया देबय के लेल क्षमाप्रार्थी छी।

सादर- सप्रेम
कुन्दन कुमार मल्लिक

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