बाढ़ि आ सहोदर (कहानी)

लेखक-डा० पद्मनाभ मिश्र

बिना सस्पेन्स आ रोमान्च’क मिथिला मे आएल बाढ़ि सँ बदलैत प्रत्येक दू व्यक्तिक बीचक सँबँधक परिभाषा

(१)

प्रमोद दूइए भाए छलाह. छोट भाए शिवेन्द्र हुनका सँ आठ साल छोट छलथिन्ह. कहल जाइत छैक जे शिवेन्द्र’क दू टा पीठिया नहि जी सकल. हुनकर बाबूजी केँ साबिक मे बहुते धन सम्पत्ति छलन्हि. खेत पथार मे नीक से उपज होइत छलन्हि आ घर मे खुशहाली छलन्हि. मुदा कालक्रम मे कमला बलान अपन रौद्र रुप देखबे लागल तऽ साल मे तीन टा मे सँ एक्के फसल होमय आ बाँकी दू टा फसल मे या तऽ बाढ़ि’क पानि पसरल रहय वा नहि तऽ पानि सुखला’क बाद दलदल. साल भरि खेबाक लेल अन्न नहि उपजैत रहैन्हि. बेसाह’क स्थिति आबय लागलन्हि. बेसाह’क लेल पैसाक जरुरत पड़ैत छैक आ पैँचा लैत-लैत हुनकर समाजिक प्रतिष्ठा से खतम भऽ गेल छलन्हि. ओकर बाद एक समय एहेनो आयल जखन लोक हिनका पैँचा देबा सँ मना कऽ देलकन्हि. प्रमोद आठवाँ मे पढ़ैत छलाह. एक बेर प्रमोद’क छोट भाए केँ बुखार भेलन्हि आ शुरु मे हिनका लोक केँ होइत छलन्हि जे बुखार अछि अपने आप छुटि जायत. अपितु बात ई छल जे बुखार’क दबाइ कीनबाक पैसा नहि छलन्हि. तेँ भगवान भरोसे बुखार केँ छोड़ि अपन दैनिक चर्या मे लागल रहैथ आ ओकर बाद बुखार टायफाइड मे बदैल गेल. पैसा’क आभाव मे प्रमोद'क बाबूजी केँ खेत बेचय पड़लन्हि. शिवेन्द्र’क टायफाइड तऽ छुटि गेल मुदा एक बेर जे खेत बेचब शुरु भेलन्हि तऽ थम्हबाक कोनो नामे नहि लेलक. कोनो तरहेँ जखन प्रमोद मैट्रिक पास केलाह. प्रमोद केँ इन्टर मे नाम लिखेबाक लेल पैसा नहि छलन्हि. हुनका होइत छलन्हि जे यदि ओ कोनो काज धन्धा शुरु नहि करताह त घर बिलटि जेतन्हि. शिवेन्द्र पढ़बा मे बहुत तेज छलाह आ पैसा’क कमी’क कारण हुनकर पढ़ाई लिखाई सम्भव नहि छलन्हि.

सब किछु सोचि बिचारि केँ प्रमोद इएह निर्णय लेलाह जे बाहर जाए पैसा कमेबाक चाही. हुनका लेल दू टा रास्ता छलन्हि या तऽ दिल्ली जा केँ नौकरी ताकैथ वा कलकत्ता मे. गाम’क बहुत लोक कलकत्ता मे प्राइवेट नौकरी करैत छलाह. तेँ कलकत्ता जेबा मे बेसी नीक बुझलैथि. कलकत्ता मे किछु दिन भटकला’क बाद हुनका डाकयार्ड मे नौकरी भेट गेलन्हि. बहुत पैघ पैघ व्यपारी’क किछु समान सब समुन्द्र’क रास्ता सँ कलकता आबैत छल. कस्टम अधिकारी ओहि व्यपारी सँ मनमाना शुल्क असुलैत छल. ई जाहि कम्पनी मे काज करैत छलथिन्ह ओकर काज छल जे कानूनी वा गैर कानूनी रुप सँ व्यापारी केँ कम सँ कम शुल्क लागय देबाक कोशिश. ओहि कम्पनी केँ शुल्क मे दियाओल गेल छुट मे सँ किछु हिस्सा हिनकर कम्पनी केँ भेटैत छल. मासिक दरमाहा के अलावा हिनका व्यापारी लोकनि खुश भऽ केँ किछु इनाम’क तौर पर किछु दऽ दैन्हि. पैसा नियमित रुप सँ आबए लागलन्हि. पहिने तऽ कर्जा सब चुका देलाह ओकर बाद खेत सब जे भरना लागल छल ओ सब छुड़ा लेलन्हि. किछुए दिन मे गाड़ी फेर सँ पटरी पर दौड़ए लागलन्हि.
प्रमोद केँ बहुत इच्छा छलन्हि जे ओ आगू पढ़ाई कैरतथि. मुदा परिस्थिति सँग नहि देलकन्हि. किछुए साल मे विवाह सेहो भऽ गेलन्हि. ओकर बाद तऽ पढ़ाई लिखाई’क लेल कोनो जगहे नहि बचलन्हि. अक्सर होइत अछि जे अपन अपूर्ण लालसा केँ लोक अपन सन्तान द्वारा पूर्ण होइत देख’ चाहैत छथि. मुदा प्रमोद’क लेल स्थिति भिन्न छल. ओ चाहैत छलाह जे परिस्थितिवश हुनकर पढ़ाइ छुटि गेलन्हि तेँ शिवेन्द्र केँ कोनो दिक्कत नहि होइबाक चाही. ओ चाहैत छलाह जे हुनकर प्रत्येक अपूर्ण इच्छा शिवेन्द्र पूरा करैथि. तेँ शिवेन्द्र केँ बिना कहने हुनका गाम मे गणित आ अँग्रेजी’क ट्यूशन लगबा देलथिन्ह. शिवेन्द्र से हुनका निराश नहि केलकन्हि. मैट्रिक मे ८० प्रतिशत अँक सँ पूरे जिला मे टाप केलाह. प्रमोद केँ भेलन्हि हुनकर मेहनत आब फलित भऽ रहल अछि. आओर बेसी उत्साह सँ शिवेन्द्र केँ बनेबा’क हेतु लागि गेलाह. आई.एस.सी मे हुनकर नाम लिखाओल गेल. मुख्य विषय गणित राखल गेल. तरह तरह के किताब आ ओकर बाद ट्यूशन, प्रमोद हुनका कोनो तरह’क कमी नहि होमय देबय चाहैत छलाह. शिवेन्द्र से हुनका कोनो तरह सँ निराश होमय नहि देलथिन्ह. खुब मेहनत सँ पढ़ाई करैत छलाह.

दू साल बाद शिवेन्द्र इन्जिनीयरिन्ग के प्रवेश परीक्षा मे बढियाँ रैँक के साथ उत्तीर्ण भेलाह. आर.आई.टी जमशेदपूर मे ईलेक्ट्रिकल इन्जीनिरिँग मे एडमिशन भऽ गेलन्हि. प्रमोद के भेलन्हि हुनकर स्वप्न’क पहिल सीढ़ी पार कऽ गेलाह. चारि साल बाद शिवेन्द्र इन्जिनीयरिँग पास कऽ के निकललाह आ तुरन्ते यू.पी.एस.सी सँ हुनका सेन्ट्रल गोवर्नमेन्ट के दूरसँचार विभाग मे असिस्टैन्ट इन्जिनीयर के पद पर लखनऊ मे नौकरी लागि गेलन्हि. फेर खूब धूम धाम सँ शिवेन्द्रक विवाह सम्पन्न भेल. पैघ घर मे हुनकर विवाह भेल छलन्हि विवाह मे ओहि जमाना मे हुनका टेप-रिकार्डर आ मोटरसाइकिल भेटल छलन्हि.

प्रमोद केँ दू टा बेटा आ एक टा बेटी छलन्हि. एखन धरि ओ अपन परिवार केँ कलकत्ता नहि आनलैथि. गामे मे तीनो टा धिया पूता गामे मे पढ़ैत छलन्हि. शिवेन्द्र’क विवाह’क बाद प्रमोद मे बहुत बदलाव आबि गेल. हुनका होइत छलन्हि जे ओ तऽ नहि पढ़ि सकलाह मुदा हुनकर छोट भाए पढ़ि लिखि केँ ओ सब काज केलैथि जिनकर हुनका मनोरथ छलन्हि. सफलता सँ सँतुष्टि होइत अछि, आ सँतुष्टि सँ आओर आगू बढ़बाक ललक खतम भऽ जाइत छैक. कोनो सफलता आ फेर सँतुष्टि मनुष्य’क कर्मठता केँ खतम कऽ दैत छैक. इएह बात प्रमोद सँग सेहो भेलन्हि. आब ओ डाकयार्ड मे बेसी मेहनत नहि करैथि. जेना पहिने बेसी सँ बेसी व्यपारी केँ पकड़ैत छलाह आब धीरे धीरे कम करैत जा रहल छलाह. हुनका किओ पुछैथ जे आब काज केँ कम किएक कऽ देलहुँ तऽ हुनकर जवाब होइत छलैन्हि जे आब हमरा चिन्ते कोन अछि. छोट भाए इन्जिनीयर अछि एत्तेक भागा-दौड़ी केला सँ कोन फायदा. गाम मे से, सबटा खेत पथार वापस भऽ गेल छलन्हि. एतेबे नहि अपन मरौसी मे ओ इजाफे कऽ नेने छलैथि. कम सँ कम तीन बीघा खेत एखन धरि कीनि नेने छलैथि. तेँ हुनका होइत छलन्हि जे जिन्दगी मे बहुत सँघर्ष केलहुँ आब आराम करबाक चाही. ओ लोक सबकेँ कहैत नहि अघाइत छलाह जे कोना हुनकर छोट भाए इन्जिनीरिँग परीक्षा कम्पीट केलथीन्ह आ कोना यू०पी०एस०सी० एक्के बेर मे कम्पीट कऽ गेलाह. कोनो अन्जान आदमी सँ परिचय होमय तऽ ओ अपन परिचय कम आ अपन छोट के परिचय बेसी दैत छलाह. अपितु क्रमशः ओ अपन परिचय बिसरि गेल छलाह. शिवेन्द्र’क सफलता केँ ओ अपन व्यक्तिगत सफलता बुझैत छलाह. ओना तऽ शिवेन्द्र के बनेबा मे हुनका बहुत सँघर्ष करए पड़लन्हि, मुदा ओ एहि बात केँ बिसरि गेल छलाह जे हुनकर सँघर्ष अपरोक्ष रुप सँ छल. शिवेन्द्र’क वर्तमान स्थिति मे पहुँचबा मे शिवेन्द्र’क मेहनत, लगन आ मेधा’क योगदान मुख्य छल. नहि तऽ नहि जानि कतेक लोक परीक्षा’क तैयारी करैत अछि. एक्के बेर मे एत्तेक पैघ सफलता सब गोटेँ केँ नहि भेटैत छैक. नहि जानि किएक एहि वास्तविकता केँ प्रमोद नहि सोचैत छलाह. हुनका मोन मे बसि गेल छलन्हि जे धैन हुनकर सँघर्ष जे शिवेन्द्र एत्तेक आगू बढ़ि गेलाह. मुदा मोन मे हुनका कहियो नहि आबैत छलन्हि जे शिवेन्द्र’क कारणेँ ओ आगू नहि पढ़ि सकलाह. अपितु ओ अपन सँघर्ष केँ बेसी मूल्याँकित करैत छलाह. कोनो उपराग नहि छलन्हि अपितु मोन मे विशेष सँतुष्टि छलन्हि.

(२)

उम्हर लखनऊ मे शिवेन्द्र केँ बड़का टा सरकारी बँगला भेटल छलन्हि. कनियाँ जिद्द केल्थिन्ह तऽ द्विरागमन’क एक मास’क बादे ओ हुनक अपन सँग लऽ केँ चलि गेलाह. शिवेन्द्र केँ से ओत्तेक टा बँगला मे असगर नीक नहि लागैत छलन्हि. ओना प्रमोद’क कनियाँ’क मोन छलन्हि जे कम सँ कम दू-तीन साल शिवेन्द्र’क कनियाँ गामे मे रहैथि. ओहि सँ हुनका बहुत किछु समाजिक रीति-रीवाज सीखबाक मौका भेटतैन्हि. मुदा कनिया नव छलथिन्ह आ बाँकी लोकनि हुनकर जिद्द’ आगू मे कोनो वाद-विवाद नहिएँ करबा मे उचित बुझलथिन्ह. मुदा एहि पूरा प्रकरण सँ प्रमोद’क कनियाँ मे हीन भावना उत्तपन्न भऽ गेलन्हि जे ओहो चाहितथि तऽ प्रमोद’क सँग कलकत्ता मे रहि सकैत छलीह. मुदा प्रमोद केँ पढ़ाई मे कोनो दिक्कत नहि हो ताहि लेल जरूरी छल जे कलकत्ता मे कम सँ कम खर्चा होमय ताहि लेल ओ अपन गामे मे रहि गेलीह. ओ बहुत प्रयास कयलन्हि जे प्रमोद सँ एहि बात पर चर्चा काएल जाए. शिवेन्द्र केँ जहिया सँ नौकरी भेलन्हि प्रमोद ओही दिन सँ खुशी मना रहल छलाह. एहि खुशी’क मौका पर छोट छोट मुद्दा मे माथ खपाए केँ कोनो फायदा नहि बुझना जाइत छलन्हि. तेँ प्रमोद हुनका बात पर कोनो कान नहि देल्थिन्ह. नारी सभ’क उपेक्षा सहि सकैत छथि मुदा अपन पति’क उपेक्षा हिनका लोकनि केँ सहल नहि जाइत छन्हि. भारतीय नारी’क एकटा दोसर अभिन्न विशेषता होइत अछि. जे अपन पति केँ खुश देखि बेसी देर धरि दूःखी नहि रहि सकैत छथि. प्रमोद’क खुशी मे हुनकर कनियाँ से बराबरी’क सँग दैत छलीह.
समय धीरे-धीरे करऽट बदलि रहल छल. प्रमोद केँ गाम घर मे खेती पथारी नीक सँ होइत छल. कलकत्ता मे कमाय सेहो. मुदा हुनकर पेशा एहेन छलन्हि जाहि मे हुनका व्यापारी आ कस्टम के अधिकारी दुनू लऽग मे चिरौरी करय पड़न्हि. व्यापारी लऽग मे एहि लेल, जे हुनकर कम्पन्नी केँ बेसी सँ बेसी मुनाफा होइन्हि जाहि सँ हिनकर दरमाहा बेसी सँ बेसी होमय. आ कस्टम अधिकारी लऽग एहि लेल जाहि सँ कस्टम अधिकारी बेसी सँ बेसी समान केँ बिना ड्यूटी के छोड़ि दैन्हि. दुनू परिस्थिति मे प्रमोद केँ मोन मारि केँ काज करय पड़न्हि. फेर हुनका होइत छलन्हि जे हुनकर छोट भाए सँ पद मे ई कस्टम इन्स्पेक्टर छोटे हेताह मुदा हुनको लोकनि सँ चिरौरी करय पड़ैत छन्हि. आ चिरौरी केहेन जाहि मे अपन इमान केँ बेचय पड़ैत छन्हि. एक गैर सँवैधानिक काज’क लेल हुनका एत्तेक नीचाँ झुकय पड़ैत छन्हि? एतबी नहि गाम’क खेत पथार बटाय लागल छन्हि आ बटेदार लोकनि नाम मात्रे फसल बाँटि के दैत छन्हि. हुनकर अनुपस्थिति मे खेत पथार बिलटि रहल छन्हि. गाम मे केओ आओर नहि छन्हि जे स्थिति केँ सुधारि दैथि.
इएह सब किछु सोचैत सोचैत हुनका मोन भेलन्हि जे यदि ओ गाम मे रहताह आ खेती पथारी अपने सँ करताह तऽ ओ ओत्तबी कमा सकैत छथि जतेक कलकत्ता मे कमाबैत छथि. आ उपर सँ हुनका सरकारी बाबू आ सेठ सँ कोनो चिरौरी नहि करय पड़तन्हि. अपन खेत अपन काज अपना ढँग सँ करताह. एकर सँगहि बहुत किछु फायदा हेतन्हि. बच्चा सबहक सँग रहताह. तीज-त्योहार मे घर मे रहताह. दूँ साँझ’क सिद्ध अन्न भेटतन्हि. आ सब सँ पैघ बात जे जखन शिवेन्द्र एत्तेक बड़का आफिसर बनि गेलाह अछि तऽ हुनका चिन्ते कोन बात’क अछि. कोनो एहेन समय-कुसमय मे ओ सम्हारिए लेताह. अपन कनियाँ सँ एहि सम्बन्ध मे बात चीत केलथिन्ह आ हुनकर कनिया पहिने तँ मना केल्थिन्ह मुदा बाद मे ओ हामी भरि देलथिन्ह. हुनका भेलन्हि जे समय कुसमय पर कम सँ कम घरवाला तऽ सँग मे रहताह. इएह सब सोचि-विचारि ओ एक दिन ओ गेलाह आ अपन इस्तीफा’क दर्खाश्त दऽ देल्थिन्ह. पी.एफ़. के सब पैसा निकालि गाम चलि एलाह.

गाम मे खेती बढ़ियाँ होइत छलन्हि. पहिने दू साल बहुत बढियाँ खेती भेलन्हि. तीन टा फसल आ दू मोने कट्ठा किछुए दिन मे दलान पर छोट सन बखारी बनबए पड़लन्हि. मुदा मिथिला मे लोक’क खुशी कोसी आ कमला बलान’क दया पर निर्भर करैत छैक. एहि बेर कमला बलान’क बाढ़ि मे ठेहुन्ह भरि बालु पटा देलकन्हि. राजस्थान’क दृश्य समुचे पसरि गेल. एहेन बालु जाहि पर पटेरो केर गाछ नहि उगए. ओहि मे धान गेहुम के बाते जुनि पुछल जाए. बखारी मे राखल धान सँ किछु महीना काज चलल. दबाइ दारु, तेल साबुन सब किछु ओहि बखारी’क धान बेचि के होमए. ओकर बाद पी.एफ़ केर पैसा सँ बेसाह चलए लागल. मुदा बेसाह’क अन्न आ भषाठ’क जारनि मे कहियो वृद्धि भेल अछि. किछुए दिन मे पैसा खतम भऽ गेलन्हि. पैसा खतम भेला’क बाद प्रमोद शिवेन्द्र केँ चिट्ठी दए खबरि केलन्हि जे अगिला पाँच मास’क लेल बेसाह’क लेल पैसा मनीआर्डर द्वारा पठा देल जाए. शिवेन्द्र जल्दीए हुनका पठा देलकन्हि. एकर बाद प्रमोद केँ पूर्ण रुप सँ शिवेन्द्र पर निर्भर रहय पड़न्हि.


एहि कथा’क बाँकी हिस्सा हमर पोथी "भोथर पेन्सिल सँ लिखल" मे देल गेल अछि. पोथी’क बारे मे विशेष जानकारी आ कीनबाक लेल प्रक्रिया निम्न लिन्क मे देल गेल अछि. http://www.bhothar-pencil.co.cc/ .
मैथिली भाषा’क उत्थान मे योगदान करु. पोथी कीनि साहित्य केँ आगू बढ़ाऊ.

6 comments:

अजित कुमार झा said...

ओना लम्बा चौडा लेख पढ्बाक समय त नहि अछी मूदा समय निकालि जरूर पढब | धन्यबाद |

करण समस्तीपुरी said...

हूँ.... !! एहि बेर नव अवतार नेने छी ! साइज़ किछु नमहर अछि मुदा प्रभावो जोरगर ! बिल्कुल अमिताभ बच्चन जेंका !!! कहानीक प्लाट एकदम भारतीय विकेट जेना फ्लैट अछि ! चलू, विश्वास भेल जे अपने रहस्य-रोमांच से अलगो किछु नीक लिखी सकैत छी... !!
बेस त' जे कोसी मैय्याक कृपा !!!!!

Muchkund Thakur said...

bahut bdhiya aaga sabd nai vet rahal achi prasansha ke lel.

subhash said...

parivartan nik achhi. dekhba mein nam-chakar, muda padhba mein rasgar, sahityak chasni sa sarobar.

subhash, new delhi

कुन्दन कुमार मल्लिक said...

बाढि त' एकटा बहाना अछि, कतेको आन कारण होयत अछि जाहि सँ सम्बन्ध अपन परिभाषा बदलैत रहैत अछि।
नव सुआद, नीक मनोवैज्ञानिक विश्लेषण आ एक बेर फेर सँ एकटा नीक प्रस्तुति।

Rajesh said...

Bahut din ke bad aai ham site dekhloun fursatak abhav me..
Ahan sab san dur rahi

E kahani nik lagal muda ant me aur kichhu bhavnatamk ladai sambhav chhal. AA snehak milan hebak chahi hamra hisabe..

Bishes Dosar Ber..
Rajesh Jha