बहुत दिन’क बाद

१०० वाँ रचना
कवि-श्री विवेकानन्द झा

आइ प्रातः
इजोतक यात्रा संऽ पूर्व
हमर पदचाप सुनि
कनेके काल पहिने
सूतल हमर मॊहल्लाक खरंजा
अपन गाढ़ निन्न संऽ
जागि उठल

Vivekanand Jha मधुबनी जिलान्तर्गत मधेपूर थाना अन्तर्गत तमौरिया स्टेशन लऽग’क बाथ नामक गाम’क निवासी श्री विवेकननद झा सम्प्रति नई दुनियाँ मे पत्रकार छथि. हिन्दी साहित्य’क अतिरिक्त हिनका मैथिली साहित्य मे विशेष रुचि छन्हि. प्रस्तुत कविता हुनक कतेक रास बात’क लेल प्रथम रचना छिअन्हि


बहुत दिनक बाद
हमर आंखि मे
अरुणिमा पहिने उलहन दैत
आ बाद मे मुसकिआएत
बहुत दिनक बाद
मऽन पड़ल एकटा पांति

'अलस पंकज
दृग अरुण मुखतरुण
अनुरागी प्रिय
यामिनी जागी'

4 comments:

आदि यायावर said...

विवेकानन्द जी;
कतेक रास बात’क इतिहास मे अहाँक कविता १००वाँ रचना थीक. हमरा विश्वास अछि जे अपन सँख्याँ’क अनुसारेँ अहाँक रचना कतेक रास बात’क लेल मील’क पत्थर सिद्ध होयत. अगिला रचना’क बाट ताकि रहल छी.

डा० पद्मनाभ मिश्र

करण समस्तीपुरी said...

बड नीक विवेकानंद जी,
अप्पन आदत सों लचार, हम अपनेक कविता में किछु छेद खोजबाक भरिसक प्रयास कएलौंह, मुदा अंत मे कहय पर बाध्य छी कि, ई एक टा सम्पूर्ण रचना थीक ! पद्मनाभ जी के कहब सोलह आना सही छैन्ह जे अपनेक कविता कतेक रास' बात में अपन क्रम संख्या के अनुसार मील्क पत्थर साबित होएत ! चलू, आई मानय पडत कि निन्यानवे प्रयासक बादे एहन दुर्लभ मोती प्राप्त होएत अछि !!

कुन्दन कुमार मल्लिक said...

१०० आ नाबाद!
"कतेक रास बात" परिवार सँ जुडल समस्त पाठकगण, रचनाकार आ सम्पादक मण्डली केँ हार्दिक बधाई आ धन्यवाद। मोन राखब जे एखन त' शुरुआत अछि आ उपलब्धिक कतेक रास नव आयाम स्थापित करय के बाकी अछि जाहि लेल अपनेक लोकनिक सहयोग अपेक्षित।

@ श्री विवेकानन्दजी,
समस्त "कतेक रास बात" परिवार के तरफ सँ अहाँक हार्दिक अभिनन्दन करैत छी। अहाँक कविता केर सन्दर्भ मे एतबे कहब जे जिनक पहिल प्रस्तुति एहि मंचक उत्कृष्टता एतेक बढा देलक निश्चय ओ अपन प्रस्तुति सँ एकर नव-नव आयाम स्थापित करैत रहताह। एहिना अहाँक सहयोग बनल रहत तकरे अपेक्षा।

@ पद्मनाभजी,
विवेकानन्दजी केँ अगिला रचना के लेल उलहन वा बाट ताकय के आवश्यकता नहि अछि। ओ अपन दोसर रचना सेहो पठा देने छथि। यथाशीघ्र ओकरा प्रकाशित कय देब।

अपनेक-
कुन्दन कुमार मल्लिक,
सम्पादक, "कतेक रास बात"

subhash said...

vivikenad jee ke kawita nik achhi aa sab sa nik gapp ee je hunak rachna sakhyan sanjoy ke rakhay wala achhi.

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