इ सपना केकर अछि- कुन्दन कुमार मल्लिक

मुम्बई- 23 मार्च, 2008
इ सपना केकर अछि,
अन्न नहिं, जल नहिं, सडक नहिं,
मुदा मोबाइल नेटवर्क अछि,
माथा पर छत नहिं आ नहिं अछि अस्पताल,
आ नहिं धिया-पूता’क लेल स्कूल,
जेतय एखनो धिया-पूता सभ ईंटा भठ्ठा में
अपन बालपन झोंकि रहल अछि,
मुदा ओतय मोबाइल नेटवर्क अछि!

बिडला, अम्बानी आब तरकारी बेचि रहल अछि,
तरकारी बेचय बला सभ भीख माँगि रहल अछि,
शहर में धराधरि अट्टालिका बनि रहल अछि,
मुदा एखनो आम आदमी छतविहीन अछि,

गली-गली में पिज्जा हट, के.एफ.सी. खुलि गेल अछि,
ओतय कतेक पेट पीठ में धँसल अछि,
माय अपन करेजाक टुकडा बेचि रहल अछि,
स्त्रीगण अपन अस्तित्व बेचय लेल बाध्य अछि,

वैश्वीकरण के मायाजाल में फँसल
इ सपना केकर अछि?

- कुन्दन कुमार मल्लिक, बंगलोर, सम्पर्क- +91-9739004970

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