फाँस- कुन्दन कुमार मल्लिक

कतेक बेर कानल होयब,
पार्श्व में गीत बाजि रहल छल,
“चिठ्ठी आई है, आई है,"
आई दू साल भs गेल गाम गेला
काल्हि फोन पर कहैत-कहैत
माँ कानय लागल, कहलक, बाउ,
कतेक बरख भ गेल अहाँ’क देखला
दशहरा बीतल, दीवाली बीतल
छठ बीतल, चौठ-चन्द्र बीतल
आब त पाबनि-तिहार याद नहिं रहैत अछि
दीवाली’क राति छल
असगरे छत पर बैसल छलहुँ
आस-पडोस’क छत जगमगा रहल छल
मुदा दीया-बाती’क स्थान बल्ब लय लेने छल
कतओ-कतओ दिया-बाती सेहो छल
जे बल्ब सभहक बीच घिरल
अपन अस्तित्व के लेल जुझि रहल छल
चारु तरफ फटक्का’क शोर छ्ल
ओहि शोर में खोजि रहल छलहुँ
शायद अपन अस्तित्व केँ
जेकर स्थिति ओहिना छल
जेना जड विहीन गाछ
हमर छटपटाहट बढि रहल छल
लागय छल जेना गला में कोनो फाँस अछि
हमर दम घुटि रहल छल
मोन एकदम बेगर भs गेल
ओहि फाँस के काटय लगलहुँ
मुदा हरेक चेष्टा के साथ ओ बढय लागल
अंत में थाकि के गिर पडलहुँ
फेर एकटा चेतना भेल
जे एकदिन हम सफल होयब
एहि फाँस के काटय में
फेर हम घुमि के जायब
आ एकदिन ओहि माटि-पानी में
हमर अस्तित्व विलीन भ जायत।

- कुन्दन कुमार मल्लिक,
ग्राम- बलियारी, डाक- झंझारपुर,
जिला- मधुबनी (बिहार)- ८४७४०४
ई-मेल- kkmallick@gmail.com
सम्पर्क-+९१-९७३९००४९७० (बंगलोर)

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