आयल सावन- कुन्दन कुमार मल्लिक

(सावनक पहिल फुहार केँ समर्पित हमर इ नव प्रस्तुति)

गरजि रहल मेघ,
बाजय टर-टर बेंग,
दामिनी रहि-रहि दमकय,
दादुर, झिंगुर संगहि बाजय,
सब मिलि के बाजि रहल अछि,
आयल-आयल सावन,
लागय बड मनभावन,
खेत-पथार हरियायल,
गर्मी भागि परायल,
पोखरि-डबरा सभ भरि गेल,
पोठी-टेंगरा सहज भs गेल,
बहादुर भैया बरद हाँकलथि,
रोपनी आब शुरु भs गेल,
निहुर-निहुर रोपय बहिना,
रमखेतारी बाली गीत उठौलक,
आयल-आयल सावन,
लागय बड मनभावन,
सखी-बहिनपा झूला झूलथि,
कजरी-मल्हार सँगहि गाबथि,
सभहक हाथ मेँहदी लागल,

प्रियंका भौजी घोघ उठाओल,
हुनक जे मधुश्रावणी आयल,

रंग-बिरंगी बतगबनी गायल,
सखी-सहेली फूल लोढय चललथि,
खेलथि झूमरि, सभ मिलि गाबथि,
आयल-आयल सावन,
लागय बड मनभावन।

(विशेष सुधार आ अंतिम पैरा श्री राजेश रंजन झा, नई दिल्ली, मो.- +९१-९८१८५५४०४६ द्वारा लिखल गेल। राजेश जी केँ धन्यवाद।)

- कुन्दन कुमार मल्लिक, सम्पादक, "कतेक रास बात",
सम्पर्क- +९१-९७३९००४९७० (बेंगलुरु)

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