केकर दोष- राजेश रंजन झा

चेहराक चमक लागय सुखायल,
मुँह लागय छन्हि बिधुयायल,
आँखि जेना रहन्हि ऊँघायल,
दिस ताकि रहल दूबि पडक ओस,
मुदा एहि में बेटी के कोन दोष,

राति संगी के विवाह देखय गेलीह,
गीत-नाद गेने छलीह,
भोरे मुँह लटकौने एलीह,
मोन विवाहक लेल छल निभरोस,
मुदा एहि में बेटी के कोन दोष,

Rajesh Ranjan Jhaकवि- श्री राजेश रंजन झा, जन्म- 31 जनवरी, 1980। पिता- श्री सुनील कुमार झा, ग्राम- महतबार, पोस्ट- घनश्यामपुर, जिला-दडिभंगा (बिहार)। वर्ष 2001 में ल. ना. मि. विश्वविद्यालय, दडिभंगा सँ भौतिकी विज्ञान में स्नातक। लेखनक शौक बच्चे सँ, हुनक इ पहिल प्रकाशित रचना। सम्प्रति I.T.C. में Logistic Executive के पद पर कार्यरत। सम्पर्क- +91-9818554046 (नई दिल्ली)



बाबूजीक हाथ पर टाका नहि छन्हि,
पैंचो-उधार केओ नहि दन्हि,
बेचबाक लेल जमीनो नहि रहन्हि,
बन्द चारु कात सs मुद्राक कोष,
मुदा एहि में बेटी के कोन दोष,

बेटा के बाप छिट्टा सन मुँह केने,
लाख टका आ ग़ाडी के जिद्द धेने,
एकहि बात के रट्ट लगेने,
कनिया चाही पढल फर्रोश,
मुदा एहि में बेटी के कोन दोष,

आब आगाँ लागय अन्हार जेकाँ,
अपनो लोक अनचिन्हार जेकाँ,
इ जिनगी लागय पहाड जेकाँ,
ताना मारय छय टोल पडोस,
मुदा एहि में बेटी के कोन दोष,

दहेज प्रथा जौं ने जायत हटायल,
गरीब जेता एहिना उजाडल,
बेटी सभ जायत जरायल,
तखन अहीं कहबै अछि अफसोस,
मुदा एहि में बेटी के कोन दोष?

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