मिथिला दर्शन

कवि- शिवेश झा "शिव"
हकासल छी पियासल छी 
मिथिला दर्शन के आशल छी!
मदारी छी भिखारी छी 
मिथिला दर्शन लेल पागल छी!!

कवि- शिवेश झा "शिव".
मधुबनी जिलाक राघोपुर बलाट गामक निवासी श्री भोला झाक सुपुत्र 21 वर्षीय शिवेश जी दिल्ली सँ मल्टीमीडीयाक अध्ययनक संग मैथिली साहित्य मे सेहो प्रयासरत छथि। एहि अल्पवयस मे हुनक लिखल किछु नाटकक मंचन सेहो भ' चुकल अछि. एहि मंच पर इ हुनक पहिल प्रस्तुति अछि.



देखब पावन सीता केर धाम
तहन जायब विद्यापति गाम
चरण रखबा स पहिनहि हम 
माथ माटी में साटब 
जतय आयल छला शंकर 
बनय विद्यापति के चाकर

किछु दूर और जायब हम
जायब उच्चैठ देवी हम 
जतय कालीदास के देवी 
वरदान दय विलीन भेली 
पूजब हुनकर ओही प्रतिमा के 
करब सुमिरन ओही महिमा के 

देखब वाचस्पति नगरी के
करब गुणगान पगरी के 
जतय के रीति अछि सबदीन 
"साग खाई बरु जीबन काटब 
नई झुक देब पगरी के
अतिथि देवो भव हम सबदीन
जपिते रहब अई कथनी के"

हकार कोजगरा के पूरब 
पान मखान लए क घुरब
सामा चकेबा चौठी चंदा 
ब्रत करब हम छैठ के
सप्ता बिप्ताक कथा सुनि क 
ध्यान करब गुरुदेब के 

जायब राघोपुर एक बेर हम 
करब दर्शन ओहि धरती के
जतय विद्याधर जनम लेला
जिनक कामेश्वर सिंह छला चेला 

देखब मिथिला केर पेंटिंग 
जकर गुणगान चाहू दिश
जखन घुरी आबय लगाब हम 
एक टुक माटिक लायब संग
नित उठी माथ स साटब
करब सुमिरण ओहि मिथिला के 
विसरब ने मिथिला दर्शन के

11 comments:

Manikant "manish" said...

Bhai dur rahito ahank e kavita Purn rup san MITHALAK Darshan karai delak. Ati sunder apnek e kavita, e MITHALA DARSHAN nahi purn mithala thik.

Anonymous said...

THIS IS VERY GOOG ABOUT MAITHILA .
THANKS

sankar said...

Bas Eke Word Kaha Chahait Chi. Atti-utkrist , Bahut nik lagal padhi ke

Dhanyabad

Prakash Mishra

Raghav said...
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Raghav said...

'Mithila Darshan'padhi ka hamro mon me 'Kataek Ras Bat' umari aayal achhi. Hamar Parichaya Raghav jha (Ugana)S/o: Mr. Jitendra Jha,Raghopur(Balat),Madhubani.Muda e hamre ta nahi umari rahal acchi, e kateko maithil ke mon me hoyat chhain je kichhu hamhu, kichu hamhu nahi mithila darshan kichu dosre chij likhi, muda kichhu bat achhi je ham ki kahu sab ta janite haibai jekra karan O ne ta likh pabait chhathi aa ne likhlaha ke padhi pabaith chhaith. Khair, chhoru aahi bat ke, ham bhai 'Shivesh Kumar ji' ke hriday sa dhanyabad dait chhiyain je O ahina 'MITHILA DARAHAN'ke puchhai pura Bharat Barsh ke mathilik importance ahina Darshan, Gungaan ke rup me bhujhabathin.Muda Ekta bat hamhu kahab.. se ki...'Rai bauwa nahi jo dilli, nahi jo bambai, jo tu Mithila Dham, Harau, Jatai bhetatau Maldah Aam! Harau, Maldah khebe, Bambai Khebe kinihe Pan Makhan"Jai jai Mithila Jai jai Mithila".

Anonymous said...
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करण समस्तीपुरी said...
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करण समस्तीपुरी said...

शिव जी,
अपनेक लेखनी हमरा बड़ प्रभावित केलक. मातृभूमि के प्रति उमरैत नैसर्गिक उदगार मिथिला के भौगोलिक आ सांस्कृतिक विरासत के वर्णन में चारि नहि सोलह चान लगा देलक. मुदा कविता के शिल्प अपेक्षाकृत कमजोर अछि. अनुप्रास पर देल गेल अतिरिक्त बल, उद्दाम अभिव्यक्ति में किछु अवरोध कए रहल अछि आ अनुप्रास स्वयं जगह-जगह पर सेहो टूटि रहल अछि. आश अछि जे अपने ई आलोचना के सकारात्मक रूप में ग्रहण कए एहि ब्लोगक पर नव अध्याय के सृजन करए लेल अहिना प्रतिबद्ध रहब ! स्वागत आ शुभ-कामना !!

Anonymous said...

badd nik lagal
gaam sa baahar rahito appan
gaam mann padi gail.

Manish said...

Jehne sunder mithila dham, tene achhi e gungan,bahut bahut dhanywad bhai



Manish Kumar

Manish said...

Jehne sunder mithila dham, tene achhi e gungan,bahut bahut dhanywad bhai



Manish Kumar
Sherpur darbhanga