कोशीक ताण्डव- डॉ. (प्रो.) अशोक सिंह तोमर

यौ भाय! कहाँ छै न्याय हमरा लेल?
कहाँ छै देवी आ देवता?
निबर आ दुबर केँ देखनिहार
ओकर दुःख आ व्यथा सुननिहार
कियो नहि अछि।
पचास बरखक बाद
कोशीमाय अपन पुरना मार्ग सँ
उठैत-बजरैत
जल प्रलयक महाताण्डव सँ
गामक-गाम विलीन कs देलकैत।
कियो नहि बचि सकलैक
जे कियो बचलहुँ
तकरा भोजनक कोन गप्प
पानी नसीब नहि भ’ सकल।
एहि राष्ट्रीय आपदा मे
सभ दिस सँ
सरकारी- गैर सरकारी संस्था
मदति कर’ लागल
मुदा नेताक चमचा आ
कलिकालक उद्दण्ड लोक सँ
नहि बचि सकलहुँ
प्राकृतिक प्रलयंकारी लीला मे
ओकरा सभ केँ
कनियो टा दरेक नहि रहलैक
वस्त्र आ राशन-पानीक कोन गप्प
जुआनी देह केँ नहि बकसलकैक।
ककरा कहबै
के सुनतैय बाढि पीडीतक एहि पीडा केँ।
नोर सँ कथ्य-कथा ओर सँ
व्यक्त व्यथा
हम शब्दहि मे कहि सकैत छी।
एहि सँ नीक तँ
ओ सभ छल
जकरा कोशीमाय
अपना मे समा लेलकैक।

नाम : डॉ. (प्रो.) अशोक कुमार सिंह
साहित्यिक
नाम : डॉ. (प्रो.) अशोक सिंह
‘तोमर’
जन्म : 05 जनवरी, 1959
ई.
जन्मस्थान : बारा (मधेपुरा जिला), बिहार
स्थायी
पता : ग्राम+पो.- खुटहा, भाया- मेरीगंज, थाना-
भरगामा,

जिला- अररिया (बिहार)
वर्त्तमान एवं पत्राचार पता : भैरव भवन, तोमर निवास,
विद्यापति नगर,
सहरसा (बिहार), पिन- 852 201,
दूरभाष : 06478-
226533 एवं 098354 63061
सम्प्रति कार्यरत : व्याख्याता, मैथिली विभाग,
सर्व ना. सिंह राम कुमार सिंह
महाविद्यालय, सहरसा।
शिक्षा :
मैट्रीक 1977, आई.ए. 1979, बी.ए. प्रतिष्ठा (मैथिली) 1981,
एम.ए. 1983
(57.50%), पी-एच.डी.- 15 फरवरी, 1992
लेखन भाषा : मैथिली एवं
हिन्दी
लेखन विधा : कविता, कथा, एकांकी, उपन्यास, निबन्ध,
आलोचना।
मैथिली मे प्रकाशित पोथी : ‘कोशी परिसर मे साहित्य साधना (मार्च
2003, अनुसन्धान एवं आलोचना), कविता- ‘पाँखि काटल पडवा’- वैदेही पत्रिका (अप्रैल,
1991), ‘सत्ताक स्वार्थ मे देशक हाल’- वैदेही (जून, 1996) ‘उजडल जिन्दगी’-
मिथि-मालिनी, भागलपुरक 2004 अंक।
आलोचना : ‘सहरसा जिलाक मैथिली साहित्य ओ
साहित्यकार’
वैदेही, दरभंगा सँ जुलाई 1992 अंक, अखिल भारतीय साहित्य परिषद्,
स्मारिका (रेत के रसगीत में विभिन्न कविता प्रकाशित), ‘कोशीक साहित्यिक संस्कृति’-
‘सूत्रधार’ पत्रिका-2002 मे प्रकाशित।
हिन्दी मे प्रकाशित कविता : ‘बिन सत
गुरु नहीं दिव्य-दृष्टि’- साहित्य सृजन (दिसम्बर, 2004), ‘मेरा परिचय’- ‘शुभकामना’
पत्रिका 2003 मे प्रकाशित, ‘असली गाँधी’- रेत के रसगीत स्मारिका- 2002
अंक।
प्रकाशन के प्रतीक्षा मे : प्रस्तुत पुस्तक ‘कोशी परिसर में साहित्य
साधना'क दोसर भाग।
कथा संग्रह : ‘नोरक भाषा’
उपन्यास : ‘प्रेम
परीक्षा’, ‘प्रत्यक्षम् किम प्रमाणम्’
पुनश्चर्या में दू बेर भाग लेलथि
(दरभंगा)
1. 28 फरवरी, 1997 से 20 मार्च 1997 तक
2. 05 जनवरी, 1999 से 25
जनवरी 1999 तक।
सम्मान : अखिल भारतीय साहित्य परिषद् द्वारा ‘भारतीय
साहित्य सम्मान’- 2004, ‘महादेवी वर्मा’ साहित्य सम्मान सँ सम्मानित।

4 comments:

करण समस्तीपुरी said...

जय हो ! तोमर जी के पस्तुत रचना एकदम परिपक्व, सम्पूर्ण आ आदर्श अछि ! भाव के साधारणीकरण एहन जे पढ़ए के साथे करेज मे उतरि जाएत आ शिल्प एहन जे बेर-बेर पढ़बाक मोंन करत ! मुदा हम असमंजस मे छी कि प्रतिक्रिया कथी पर दी ? कविता पर वा कवि-परिचय पर ? रचना से पैघ रचनाकारक परिचय हमारा कनेक अजगूत लागल ! हम तोमरजी कें व्यक्तित्व आ कृतित्व दुन्नु के प्रति अगाध श्रद्धा आ सम्मान राखैत छिऐन्ह मुदा ई कहबा मे हमारा कुनो धोख नहि अछि जे कविता के उपरांत अतेक दीर्घ परिचय पढैत-पढैत कविताक मजा फीका भए जाएत अछि ! आखिर कविता से कवि के पहचान अछि कि कवि से कविता के ? कि तोमर जी के प्रस्तुत कविता से हुनक उपलब्धि के प्रतिविम्ब नहि छैन्ह ?? प्रस्तुत कविता संपादक मंडल द्वारा प्रकाशित कएल गेल अछि आ तैं ई हमरा किछु बेसी खेदकर लागि रहल अछि ! कुनो तरहक पूर्वाग्रह सम्पादकीय विभाग के प्रवृति नहि होएबा चाही ! संघे जौं सभ टा इनपुट के जस के तस प्रकाशित कए देल जाए तहान फेर सम्पादकीय विभाग के औचित्य की ? पुनश्च, ई सभ हम्मर व्यक्तिगत विचार अछि ! अहि से रचनाक गरिमा मे कोनो आंच नहि आबे चाही !! "कतेक रास बात" मे तोमरजी के हार्दिक अभिनन्दन आ आदर्श रचनाक बधाई !!!

आदि यायावर said...

केशव जी सँ हम सत प्रतिशत सहमत छी. कोपी पेस्ट केवल ओफिसे टा मे नीक लागैत छैक, एतय सम्पादकीय कर्तव्य’क पालन करबाक चाही.

सुभाष चन्द्र said...

रचना निक अछि.
संपादक जी, की रचना संगे लेखक के एते नाम चाकर परिचय देने उचित अछि ?

google biz kit said...

tumhari racna to bhut accha ha