उठू मैथिल भेलै भोर- विनित ठाकुर

जय जय मैथिल जय मिथिला
हर–हर गङ्गे जय कमला

Binit Thakurकवि- श्री विनित ठाकुर
जन्म- 01 मार्च, 1976 ई.
शिक्षा: बी. एड.
प्रकाशित कृति: बाँकी अछि हमर दूधक कर्ज
सम्प्रति: शिक्षक (प्रगति आदर्श ई. स्कूल, लगनखेल, ललितपूर, नेपाल)
स्थायी पता: मिथिलेश्वर मौवाही–६, धनुषा, नेपाल


उठू यौ मैथिल भेलै भोर
चुनमुन चिरैया करैय शोर
कोशी कमला अमृत जल धारा
आलस छोरु कहे भुरुकवा तारा

माटि पानिके लगाक छाती
बुढिया दादी गावे पराती
गाई महिष खोललक चरवाहा
हर लऽ विदाह भेल हरवाहा

मन्दिर मस्जिद मिथिलाक शान
रुप अनेक एकऽही भगवान
जनक सलहेशक ई कर्मभूमि
स्वर्ग समान बनाऊ मातृभूमि

7 comments:

ग‌गेश गु‌जन said...

विनित जी अपनेक उत्तक्रिष्ठ रचनाक लेल बहुत बहुत धन्यवाद । बहुत वढियाँ गित लागल । अहिना अपन रचनाक उतक्रिष्ठ स्वाद सँ हमरा सबक अनन्द उत्साह आ उठ लेल आगामी दिनमा उत्प्रेरणा प्रदान करैत रही त क्रितग्य हीयब ।

गंगेश गुंजन झा
काठमाण्डु नेपाल

सुभाष चन्द्र said...

नीक रचना के लेल बधाई.

Anonymous said...

विनीत बाबु बहुत बिढया
अहिना लीखु
हमर सबहक शुभकामना

श्रवीण मिश्र

Anonymous said...

उतक्रिष्ट
बहुत निक
रकनाक लेल
धन्यवाद

दयाकान्त said...

विनीत जी अहांक कविता बहुत बेसी नीक लागल जहिना अहाँ शिक्षक छी तकर पुर्णतः निर्वाह केलहु ई कविता पाठ पुस्तक में शामिल हेवाक चाही ! धन्यवाद

Anonymous said...

विनीत जी
निक लिखैत छी
अहिना लीखैत रहु ।
बहुत बहुत शुभकामना ।

कुन्दन कुमार मल्लिक said...

विनीत जी "कतेक रास बात"क सम्पादक मण्डली आ समस्त पाठकगण दिस सँ अहाँक स्वागत करैत छी। एहि मंच पर अपनेक पहिल प्रस्तुतिक लेल हार्दिक बधाई। एहिना अहाँक सहभागिता बनल रहत तकरे अपेक्षा।

पाठकगण,
विनीत जीक एहि गीत केँ श्रव्य रुप (Audio format; MP3) मे सेहो रिकार्ड कयल गेल अछि। किनको यदि चाही त' editor@vidyapati.org पर सम्पर्क कयल जाय।

धन्यवाद-
कुन्दन कुमार मल्लिक
,
सम्पादक, "कतेक रास बात"