अपेक्षा

---अल्पना मिश्रा
हमर पहिल प्रयास, प्रोत्साहन’क निवेदन


मोकड़ा केँ देखलहुँ जाल बुनैत
एक बिन्दु’क चारु कात
अपना, बिना ओहि मे फँसैत
अनवरत गोल गोल घुमैत
बिना कोनो अपेक्षा आ थकान सँ ।


खजूर’क फुनगी पर बैसल
चोँचा के सेहो देखलहुँ खोता बुनैत
सहस्र काठी परिश्रम केर जुटबैत,
एहि पार सँ ओहि पार करैत
डेढ़ कनमा’क चोँचा तीन सेर’क खोता बनबैत ।



आ हम देखलहुँ चितकबरी कुतिया केँ,
पूस’क महीना मे,
एक सँग अपन तीन बच्चा केँ,
अपने मुँह मे उठाए टहलैत,
एक ठाम सँ दोसर ठाम राखैत ।


आ देखलहुँ ओहि तीनोँ केँ एक सँग
भरि दुपहरिया मे हमरा मुँह दूसैत,
हमर प्रत्येक यत्न
सुखल बालु’क तरहेँ आँजुरि सँ बहि गेल,
इर्ष्या द्वेष हमरा मोन मे
खीचैत चलि गेल एकटा पैघ लक्ष्मणरेखा,
आ भरैत गेल हमरा मोन केँ एकाकी आ अवसाद सँ ॥

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कथा....भैरवी विवाहक पाँचम बरखक बाद अनायास भैरवीसँ चन्द्रेश्वर बाबाक मन्दिरमे भेट भेल छल। नरक निवारण चर्तुदशीक व्रत केने रही। मायक जिदपर...