लाचार

कवि - श्री सुभाष चन्द्र

ओकरा बह्लेबक लेल

ओकरा लग अओर किछू नै छले

ओही दू गोट

घिन्चायल तिरआइल

हद स फाजिल चुसल

दू उरोजक सिवाय

जकराबेर बेरी ओ ठुंसी देत छल ओकर मुंह में

चाहे इच्छा व अनिच्छा

चाहे ऊ कनैत होई

रोटीक लेल

अथवा

कोनो खिलोनक लेल

कथा....भैरवी

कथा....भैरवी विवाहक पाँचम बरखक बाद अनायास भैरवीसँ चन्द्रेश्वर बाबाक मन्दिरमे भेट भेल छल। नरक निवारण चर्तुदशीक व्रत केने रही। मायक जिदपर...