नव बरखक बहाने- कुन्दन कुमार मल्लिक

इ की भेल,
अनचोँकहि मे नीन टूटल
बाहर पट्टखाक शोर छल
करैत लोक अनघोल छल
तखन बुझना मे आयल
इ त’ स्वागत करैत
नव बरखक बोल छल
केओ नव वसन मे चमकैत
केओ मदिरा सँ बहकैत
त’ केओ सुन्दरी संग नाचैत
ओहि मोहल्ला मे एकटा घर एहनो छल
जतहि ने कोनो शोर छल
नहि कोनो अनघोल छ्ल
आइयो ओकर चूल्हि छल मिझायल
पेट जेना पीठ मे धँसल
छलहुँ हम अपना सँ पुछि रहल
की ओकरा लेल नव बरखक कोनो मोल छल?

-कुन्दन कुमार मल्लिक, बेंगलुरु (कर्नाटक), सम्पर्क- +91-97390 04970

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