ई चिठ्ठी हुनकर नाम

प्रिय संजू!

आइ नञि जानि किएक, अहाँ के चिठ्ठी लिखबाक मोन भऽ रहल अछि। ओना तऽ एहि सँ पहिनेहो कतोक चिठ्ठी लिखने छलहु, मुदा ई चिठ्ठी आन सब चिठ्ठी सँ भिन्न अछि। एहि चिठ्ठी के जखन अहां पढ़ैत रहब, तावेत धरि हम दूर ... बहुत दूर, क्षितिजक ओहि पार जा चुकल रहब। एही लेल जएबासँ पहिने हमर आंतरिक इच्छा छल जे अहाँ सँ भेट करी ... मुदा अपन सोचने थोड़बे होइत छैक ... होबाक तऽ वैह होइत छैक जे भाग्य विधाताक इच्छा रहैत छनि। आइ जेलक चाइर दीवारी में कैद भऽ कऽ ई चिठ्ठी लिखि रहल छी, सब कैदी निन्नमे छथि। अपन वार्ड मे मात्र हमहीं टा एकसरिए जागल छी। संजू ... जेलक जिनगियो बड़ अजीब होइत छैक ...। आंखिक आगू सबटा लहाशे नजरि अबैत अछि। एहिठामक सब आदमीयो एक जीवैत लहाश होइत छैक। कखनो-कखनो तऽ हमरा अपन शरीरो एक जीवैत लहाश बुझना जाइत अछि, साड़ी मे लेपटाएल, छटपाटइत लहाश ...। हम सपनो मे नञि सोचि सकैत छलहु जे एहन दिन देखऽ पड़त। एखनहुं तक बुझाइत अछि जे हम कोनो सपना तऽ नञि देखि रहल छी ...? डराएल सपना ...! मुदा यैह सत्य छैक-एक कटु सत्य!

Satish Chandra Jhaलेखक- श्री सतीश चन्द्र झा,
म.न. 119, क्रॉस रोड, संत नगर
बुराड़ी, दिल्ली- 110084
सम्पर्क- 9810231588


संजू ...! आइ हमरा अहांक स्मरण बड़ आबि रहल अछि। अहां सदिखन कहैत छलहुं ने ... अनुभा अहां बड़ सुन्नरि छी ...! सृष्टि मे अहां सँ बेसी सुन्नरि त कियो छैके नहि ... आ हम लजाइत कहैत छलहुं-धत ... अहां के हरदम एतबे ... मुदा सत्ये कहैत छी-संजू ... यैह सब बात अतीतक स्मरण बनि कऽ रहि गेल अछि। आइ हमरा बीतल बात अनायास चलचित्रक भांति स्मरण होमए लागल अछि...
हमर डैडी द्वारा अहांक अपमान। अहां तऽ जनैत छलियै जे हमर डैडी एक परंपरावादी व्यक्ति छलथिन्ह, समाज नामक कोढि़ के ओ अपन शरीर पर आक्रमण करबाक पूर्ण स्वतंत्रता दऽ देने छलथिन्ह, तखने तऽ ओ हमरा अहांक संग विवाह करबाक अनुमति नहि देले छलथिन्ह, फेर अहां गरीबक बेटा आ हमर डैडी लखपति... केहन विडंबना छल...?
आखिर कहिया धरि परीक्षा होइत रहत गरीबी आ अमीरीक बीच पिसाइत प्रेम के? हमरा मन मे हरदम एहने प्रश्न उठैत रहल छल। फेर एक दिन अहूँ हमरा सँ संबंध तोडि़ चलि गेल छलहु, हम शिकारीक बाण सँ आहत भेल हिरणी जकां छटपटाइत रहि गेल छलहुं। हम राति-राति भरि कनैत रहैत छलहुं अहांक लेल मुदा लाचार छलहुं जे विद्रोह नहि कऽ पाबि सकलहुं। आइयो नारी कतेक बेबस अछि ई बात कियो हमरा सँ पूछए। एहि बातक उत्तर आखिर हमरा सँ बेसी बढिय़ा के दऽ सकतै अछि।

डैडी हमर विवाह एक लखपतिक बेटा जयदीप सँ कऽ देलनि मुदा जयदीप आ हमर कुण्डली हरदम एक दोसराक विपरीते रहल। तइयो हम समय सँ समझौता करैत रहलहुं। जयदीप क्रूर स्वभावक व्यक्ति छल तखनो हम हुनक पूरा-पूरा खियाल रखैत छलियैन मुदा भाग्य के हुनक ई पूर्णता मंजूर नहि छलनि। संभवत: रुपयैवला व्यक्ति रुपैयाक सबसँ बेसी भुखाएल रहैत अछि से हमरा ओही समय ज्ञात भेल छल। सासुरक रहन-सहन सबसँ भिन्न छल। घरक सब सदस्य रुपैया प्राप्त करबा लेल किछुओ करबा पर तैयार रहैत छलाह, तखने तऽ हमरा अपन डैडी के घर सँ लाख-डेढ़ लाख रुपैया मंगबाक लेल पठाओल जाए लागल आ हम अपन डैडीक समक्ष निघोरत भऽ कऽ सब बातक बखान कऽ दैत छलियन्हि, किएक तऽ डैडी जहिया सँ अहां के अपमानित कएने रहथि तहिया सँ हमर हुनका पर सँ विश्वासे उठि गेल छल। डैडी हमर बात के चुपचाप सुनि हमर हाथ पर लाख-डेढ़ लाख रुपैया गट्ïटी दऽ दैत छलाह। ... मुदा ... डैडी के जेना जयदीप सँ धीरे-धीरे घृणा होमए लागल छलन्हि। कारण जयदीप बिना मतलबे हमरा मारहु लागल छल। पराकाष्ठा पर तखन भऽ गेल, जखन डैडी अपन सबटा जमीन-जाल, घर-घराड़ी अपन भगिनाक नामे लिखि देने रहथिन आ एहि संसार के अंतिम प्रणाम कऽ गेल रहथिन्ह। चूंकि हमर कोनो भाई नहि छल एहि दुआरे हमर पति आ हुनक परिवारक अन्य सदस्यगण हमरा सँ लाखोंक सम्पत्ति के आस लगओने रहथि, मुदा एहन नहि होबाक कारणे ओ लोकनि उग्र रूप धारण कऽ लेलनि।

संजू ...! हम अपन कान सँ सुनने छलियै जे ओ सब हमरा मारबाक योजना बना रहल छल। फेर घर मे आबि कऽ हम खूब कानऽ लागल छलहुं मुदा हमर नार पोछनिहार कियो कहां छल ...? एहन मे हमरा अहां बड़ याद अएलहुं संजू ... बड़ याद अएलहुं। मन तऽ होइत छल जे भागि कऽ अहां लग चलि आबि मुदा आगिक समक्ष लेल गेल सात फेराक सप्पत रोकि देने छल।

ओहि राति जखन हम थाकल ढेहिभाएल सुति रहल छलहुं कि जयदीप हमरा देह पर मटिया तेलक डिब्बे उझइल देने छल, हम हरबड़ाकऽ उठि गेल रहि आ लाइटर जरबैत पति के देखि ओहिठाम सँ भागबाक प्रयास करऽ लागल छलहुं, एहि भागम-भागक स्थिति मे सासु हमर साड़ीक खूट के खूब जोर सँ पकडि़ लेने रहथि। हम हुनको धक्का दइत केबार खोलि सड़क पर आबि गेल छलहुं। लेकिन ओतहु हम रुकलहुं नञि, दौड़ैत चलि गेलहुं ... नञि जानि कखन तक दौड़ैत रहलहुं ... तखने हमरा लागल जे हम स्टेशन पर आबि गेलहुं अछि आ बिना बुझने-सुझने सीटी मारैत एकटा गाड़ी पर चढि़ गेल छलहुं।
अंतहीन यात्रा दिस हमर डेग बढि़ गेल छल। गाड़ी रुकल ... खुजल ... रुकल, मुदा हम ओहि मे सँ तखने उतरहुं जत्तए ओहि गाड़ी के अंतिम पड़ाव छलैक। चूंकि हमरा लग टिकट नहि छल ताहि दुआरे हम पकडि़ कऽ जेल पठा देल गेलहुं ...
जेल मे हमरा एकटा महिलासँ परिचय भेल, जे हमरा नारी कल्याण नामक एकटा संस्थाक नाम कहने छल। जखन हम जेल सँ छोड़ल गेलहुं तऽ सीधे ओही नारी कल्याण संस्था गेल रहि, अपन कल्याणक हेतु, मुदा तखन हम ई नञि बुझि सकल छलहुं जे हम एक नर्क से दोसर नर्क मे पहुंचि गेलहुं अछि।

संजू ... जाहि ठोर आ आंखिक प्रशंसा करैत अहां अघाइत नहि छलहुं से आइ वैह ठोर आ आंखि हमर जानक दुश्मन बनि गेल अछि। नारी कल्याणक सचिव हमरा हरदम अपन शरीर केँ बेचबाक हेतु विवश करैत रहैत छल। एक राति तऽ ओ हमरा सामने एकटा हठ्ठा-कठ्ठा खूंखार आदमी के हमर अस्मत लूटबाक लेल कहने छलैक! आ हम कोनो तरहे ओहि ठाम सँ जान बचाकऽ भागल छलहुं।

एहि अंतराल धरि हम भीतरि सँ टूटि गेल छलहुं। मन आजीज-आजीदन भऽ गेल छल, कोनो रस्ता शेष नहि रहि गेल छल तखन हम सीधे थाना पहुंचलहुं आ ओहिठाम अपन व्यथा कथा सुनेलहुं। नारी कल्याणक विरुद्ध रिपोर्टों लिखबएने छलहुं। इंसपेक्टर अवनि सं जखन हम सबटा बात कहलियनि तऽ ओ तुरंते एस.पी. महोदय सँ फोन पर संपर्क केलनि। इंसपेक्टर हमरा संध्या सात बजे एस.पी. महोदयक निवास पर जएबाक बात कहलन्हि। निवासक बात सुनितहि तऽ हमर मन फेर डराऽ गेल छल आ भरिदेह पसेनाक बुन्न छोडि़ देने छल, मुदा ... दोसर रस्तो तऽ नहि छल ... सात बजे एस.पी.क निवास पर पहुंचलहुं।

एस.पी. महोदय बड़ स्नेह सँ भीतरि बजेलन्हि आ बैसबाक इशारा देलन्हि। जाहि स्नेह आ अपनत्वक प्रदर्शन ओ कएने रहथि, ओकरा देखि कऽ तऽ हम एकदम निश्चिन्त भऽ गेल रही, आ पूर्ण सुरक्षित सेहो बुझऽ लागल छलहुं। एस.पी. साहेब सबटा बात के ध्यान सँ सुनने छलाह, मुदा... मुदा किछुए कालक बाद गिरगिट जकाँ रंग बदलऽ लागल छलाह ... आ हमरा लगमे आबि कऽ बैसि गेल छलाह। एकाएक हमरा भरि पाँज ...! हम कसमसाए लागल छलहुं ... ओ धमकी दैत हमरा आत्मसमर्पण करबा लेल बाध्य कऽ रहल छलाह ...। हमर सुतल नारीत्व जागि उठल छल आ हम टेबुल पर राखल तरकारी काटऽवला चक्कू उठा कऽ एस.पी. के डराबए लागल छलहुं ... मुदा हवसक भुखाएल ... मानऽबला कहां छल, ओ हमरा लग अबैत गेल... कि तखने हम पूरा जोर सँ चक्कू ओकर पेट मे घोंपि देने छलियैक ...। नञि जानि कोन दैवीक प्रेरणा हमरा एहन करबा लेल विवश कऽ देने छल। चेतना जखन वापस आएल तऽ हम चिचिआ उठलहुं आ भागबाक प्रयास करऽ लगलहुं, मुदा कतऽ मांगि सकैत छलहुं ...? हम पकडि़ लेल गेलहुं आ हमरा पर मुकदमा दायर कऽ देल गेल, अदालत फांसीक सजा सुनेलक अछि। काल्हिए हमरा फांसी पड़बवला अछि। ऐहन विकट स्थिति मे अहां बहुत याद आबि रहल छी। मधुर स्मृति तऽ सौ वर्षक बादो ओहिना टटका बनल रहैत छैक ने ...?

संजू ... हमरा ज्ञात भेल अछि जे अहां एखन धरि विवाह नहि कएलहुं अछि। की! अहां हमर एकटा बात मानब ...?
विवाह अवश्य कऽ लेब ... आब तऽ अहां के प्रमोशन सेहो भऽ गेल हैत! संजू ... जाधरि अहां विवाह नहि करब ताधरि हमर आत्मा के शांति नहि भेटि पाएत! एक वचन अहां सँ हम आओर लेबऽ चाहैत छी, बाजू पूरा करब ने ...?
अहां अपन पत्नीके खूब पे्रम करबनि। हमरो हिस्साक प्रेम अहां हुनकहि देबनि, जाहि सँ हमर आत्मा सेहो अपन हिस्साक प्रेम पाबि कऽ हरदम अहांक लगेने रहत ... हरदम अहांक लगेने रहत ...।

अहींक अनुभा, सेंट्रल जेल।

4 comments:

Kumar Radharaman said...

सधल,भावमय प्रस्तुति।
www.krraman.blogspot.com

करण समस्तीपुरी said...

मर्मस्पर्शी नहि एकरा हम मर्मभेदी कहय चाहैत छी !

SANDEEP KUMAR said...

Anavsayak Vistar..... aichh ehi katha ke...... kam shabd ke istemal karu apan baat vyaqt karai ke lel. padhai vala bore bhay jai chhatin.

Anonymous said...

Bhahoot neek sa lekhal katha chaik.Achanak hum ahan ke blog dekhaloon,food blog ke link dawara.

कथा....भैरवी

कथा....भैरवी विवाहक पाँचम बरखक बाद अनायास भैरवीसँ चन्द्रेश्वर बाबाक मन्दिरमे भेट भेल छल। नरक निवारण चर्तुदशीक व्रत केने रही। मायक जिदपर...