छोट लोक - सुभाष चंद्र

छोट लोक धरती पर जन्मैत छैथ
दूबि जकाँ बढ़ैत छथि
पयर सँ दबाओल जाइत छैथ
आ कोनो चर्च के मारल जाइत छैथ !

पैघ लोक आकाश मे जन्मैत छैथ
आकाशे मे रहैत छैथ
जमीन की होइछ
ओ नहि जनैत छैथ !

बाचल, मध्यम
जे नहि कर्ता आ नहि पाचक
दूनू अधिकार सँ तिरोहित
ओ उगैत छैथ,
बढ़ैत छैथ लत्ती जकाँ
आओर,
सतह पर रहैत छैथ अचेतन मे
सपना देखैत संग
जूझैत छैथ स्वयं सँ
अंतरिक्ष सँ आगाँ नहि जा पबैत छैथ !
त्रिशंकु जकाँ बनि
ईच्छाक संग
स्वयं अपन स्वप्न कें
केंद्र बिंदु बनैत छैथ !!

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