अंतर (सुभाष चंद्र)

हुनका आ हमरा मे
अंतर अछि एतबा
ओ परहित चाहैत छथि
हम आत्महित चाहैत छी।

हुनका आ हमरा मे
मतभेद अछि एतबा
ओ राष्ट्रहित चाहैत छथि
हम स्वहित चाहैत छी।

बड मोसकिल अछि
दू पीढि़क मध्य
ओ काज चाहैत छथि
हम नाम चाहैत छी।

जहन कखनो निर्णय केल जाइत अछि
देशक तकदीर
ओ आदर पाबैत छथि
हम कुर्सी पाबैत छी।

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