विवाह’क तेसर सप्ताह (कहानी)

लेखक- आदि यायावर
(मूल नाम- डा. पद्मनाभ मिश्र)

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राति भरि कछ-मछ करैत उर्मिला’क मोन उबिया गेल छलैन. आधा राति'क बादे हुनकर पति बेडरूम में आएल छलाह। एखन ओ एना फोंफ काटि रहल छलाह मानु जे बेटी’क विवाह एखने खतम भेल होन्हि। नौकर चाकर सब सुतल छल. आ बगल वाला फुलवारी मे झिंगूर किलोल करैत छल। चारु दिस आततायी सन्नाटा पसरल छल. हठाते बगल वाला आम गाछी पर टिह-टिहहिया आपन चिर परिचित आवाज देलक। ओहो आवाज कोनो टहँकार सँ कम नहि, सन्नाटा कें चीरैत ओ आवाज हुनकर हृदय कें बेधि देलकनि। एकर संगे टिह-टिहिया इहों सूचना देलकनि जे आब तेसरो पहर बीति गेल अछि। एक बेर ओ फेर सँ अपन पतिक मुंह देखे लागलीह. की सुन्दर दैदिव्यमान मुखमंडल छल, मानु, जेना कोनो गन्धर्व एखने पृथ्वी पर उतरल हो. एहेन सुन्दर छवि जे मात्र साहित्य में पढबा में भेटैत छैक. दैदिव्यमान मुँहे टा किएक, पछिला तीन सप्ताह'क घटना क्रम में हुनका ज्ञात भेलनि जे जतबी ओ देखबा में सुन्दर छलाह ओतबी हुनकर व्यक्तित्व सेहो नीक छनि. हुनकर पिता'क यश पुरे समाज में पसरल छलनि. विवाह सँ कतेक साल पहिने सँ एहि परिवार'क बारे में ओ सुनि चुकल छलीह. ओ लोकनि जतबी धनीक छलैथ ओतबी संस्कारी सेहो. हुनकर पति अपन पुरखा'क अर्जित धन संपत्ति में कोनो रूचि नहीं देखाबैत छलाह. ओ कहैत छलाह जे आदमी कें अपन दुनिया अपने बसेना चाही. विवाहोपराँत ई सब जानि उर्मिला कें बहुत खुशी भेल छलनि. आजुक समय में अरेंज्ड मैरेज'क बाद सब किछु एतेक बढियाँ भेटब हुनका पूर्व जन्म'क कोनो नीक काज बुझाना गेलनि. अपना आप कें ओ भाग्यशाली बुझए लागल छलीह.

मुदा पहिल सप्ताह के बादे एत्तेक किछु भऽ गेल जकर हुनका कोनो आशा नहि छलैन. आब तीने सप्ताह में सब किछु एतेक बदैल जेतैन तकरो हुनका कोनो अंदेशा नहि छलैन. विवाह'क उपरांत प्रत्येक स्त्री'क लेल सासूर एक रहस्य सँ कम नहि होएत छैक. पहिने तँ कोशिश केलथिन अडजस्ट करबाक लेल मुदा आब हुनका लागए लागलैन जे हुनकर कोनो दोष नहि. आब हुनका होइत छलैन जे हुनकर सासूर'क लोक बिलकूल अलग तरहक छैथ. विवाह'क मात्र तीन सप्ताह'क अंतराल में जतय एतेक नाटक भेल हो, ओहि बात कें ओ सामान्य कोना मानि सकैत छलीह. जखन हुनकर अपन पतिदेवे उपेक्षा करए छथि तऽ दोसरा'क कोन गप्प. पछिला तीन सप्ताह में कोनो दिन एहेन नहिं भेल छल जखन हुनकर पति एको घंटा'क लेल आबि कें हुनका सँ प्रेम सँ बात केने होइथ. हुनकर उम्र'क स्त्री लोकनि की-की सपना देखैत छथि. ओ त’ एतेक अनुशाषित जीवन जीबाक पक्ष में छलीह. लेकिन तीन सप्ताह में आब हुनका विश्वाश होमए लागलैन जे हुनकर उपेक्षा भ' रहल छन्हि. जखन हुनकर पतिए के अपन कारोबार आ पारिवारिक समस्या सँ निकलबाक लेल समय नहि छलैन तखन बेकारे विवाह केलैथ. उपेक्षा सँ विद्रोह'क भावना उत्पन्न होइत छैक, हुनका सेहो भेलैन. मुदा द्विरागमन'क समय में अपन पिता'क देल गेल वचन याद आबए लागलैन. एक प्रतिष्ठित परिवार में जन्म लेला'क बाद आ एक तथाकथित प्रतिष्ठित परिवार में विवाह भेला'क बाद विद्रोह करब हुनका ओप्शने मे नहि रहैन. ओनाहींए हुनकर सासु'क अनसन सँ सब किओ परेशान छल. हिनकर कोनो भी एक गलत स्टेप नैहरा'क प्रतिष्ठा कें हानि पहुंचा सकैत छल.

एक रहस्यमयी सासूर'क वातावरण में हुनकर कुंठित भावना अवसाद में बदलल जा रहल छल. एक बेर फेर सँ अपन पति'क दैदीप्यमान मुखमंडल के देखबाक कोशिश करए लागलीह. एहि बेर हुनका तामस नहि उठलैन. अपितु हुनका अपन पति'क ऊपर में दया आबए लागलैन. आजुक समय में, के एहेन आदमी होएत छैक जे अपन नव विवाहिता पत्नी कें छोडि अपन जेठ भाए'क कारोबार में हाथ बंटेबाक लेल गाम सँ दूर चलि जैत छैक? हुनका लग में त’ इहो ऑप्शन नहि छलनि जे ओ कहि सकैत छलीह जे हुनकर पति जे करय जा रहल छैथ, ओ मात्र बेवकूफी’क अलावा अओर किछु नहि थीक. स्त्री एक मजबूरी'क नाम सेहो थीक. कतेक दिन सँ अपन भावना कें दबा के रखने छलीह। आब मोन करैत छलैन जे ठोहि पाडि कें कानैथ. मुदा डर इहो छलैन जे पतिदेव कहीं उठि नहि जैथ आ हुनकर एखन धरि'क त्याग कहीं स्वार्थ में नहि बदली जैन्ह।

ओ उठि के बैसि गेलीह. सिरहौने मे ठेहुन मोड़ि कें अपन नाक आ मुह कें दुनू ठेहुन मे नुकौने रहलीह। किछु देर बाद नहुए नहुए केहुनी’क नीचा मे गेडुआ आएलन्हि आ नहि जानि कखन नीन्न आबि गेलनि। जखन आँखि फुजलनि त देखलैथ जे पतिदेव एखन धरि सुतल छैथ. नित्य क्रिया सँ निपटि केँ फुलवारी मे राखल आरामकुर्सी पर ई सोचि बैस रहलीह जे जखन पतिदेव उठताह तऽ हुनका ताकैत ताकैत एतय जरूर एताह. आब ओ चुप नहि रहतीह. विद्रोह नहि तऽ तर्क तऽ काइए सकैत छलीह. कम सँ कम पुछबाक तऽ चाही जे घर मे जँ एत्तेक नाटक लेल पहिने सँ तैयारी रहैन तऽ एकटा शरीफ लोकनि बेटी सँ विवाहे किएक केलनि. एक हजार प्रश्न फुरैत छलैन. मुदा स्त्री’क मोन मर्यादा’क सीमा मे बान्हल छल. तेँ मोने मोन विचारए लगलीह जे कोन कोन प्रश्न पुछबाक छैन्ह, जाहि सँ मर्यादा’क सीमा’क उलँघन नहि होमए.

विवाह’क पहिल किछु सप्ताह मे नवविवाहिता की करैत छैथ? जेना प्रत्येक बच्चा देखबा मे क्यूट होएत छैक, जेना विवाह मण्डप पर बैसल कनियाँ सुन्दर होएत छैक. इहो बात ओतबी सत्य जे प्रत्येक नवकनियाँ के ई होएत छनि जे अमुक विवाह कए ओ धन्य भऽ गेलीह. ई अग्नि’क चहु दिस सात फेरा’क ई कमाले थीक जे नवकनियाँ के हुनकर पति पुरे दुनियाँ मे सब सँ नीक लोक लागए लागैत छन्हि. नवविवाहिता के निगेटिव बात नहि फुरए छनि आ फुरबाको नहि चाही. प्रत्येक सामान्य विवाह मे कनियाँ के होएत छनि जे हुनका सपना’क राजकुमार भेटल छनि.

उर्मिला फुलवारी मे राखल लकड़ी’क आराम कुर्सी मे धँसल यैह सोच मे छलीह. अपन काल्पनिक दुनियाँ मे ओ अपन राजकुमार केँ परीकथा सदृश्य उज्जर उज्जर घोड़ा पर दूर सँ आबैत देखैत छलीह. मुदा यथार्थ हुनका झमान भऽ पटैक दैत छलनि. लोक सपना सँ तखने आन्दित भऽ सकैत छैक जखन ओहि मे किछु वास्तविकता होइछ. अन्यथा एहेन सपना लोक केँ डरा जैत छैक. उर्मिला अपन कल्पना सँ नहि डेराइत छलीह. बल्कि हुनका अपन भाग्य पर आब शक होमए लागलनि.

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