tag:blogger.com,1999:blog-15885037.post1225935941489641442..comments2008-06-29T15:41:40.166+05:30Comments on कतेक रास बात: विद्यापति समारोह'क स्मृति मेavinashnoreply@blogger.comBlogger6125tag:blogger.com,1999:blog-15885037.post-28446769234645751582008-06-29T15:41:00.000+05:302008-06-29T15:41:00.000+05:30अविनाशजी,अहाँक मुँहे अहाँक पद्य परसू सुनलहुँ, साहि...अविनाशजी,<BR/>अहाँक मुँहे अहाँक पद्य परसू सुनलहुँ, साहित्य अकादमी सभागारमे। नीक तँ लिखैत छीहे, सँगहि मंच सम्पादन सेहो नीक अछि अहाँक।<BR/><BR/>गजेन्द्र ठाकुर<BR/>http://www.videha.co.in/<BR/> मैथिली पाक्षिक ई पत्रिकाGajendra Thakurhttp://www.blogger.com/profile/11742535237461535200noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-15885037.post-31042578071370610862008-01-16T09:03:00.000+05:302008-01-16T09:03:00.000+05:30अहाँ'क रचना पढैत जे पहिल बात मोन में आयल ओ छल "एकट...अहाँ'क रचना पढैत जे पहिल बात मोन में आयल ओ छल "एकटा प्रगतिवादी कवि'क प्रगतिशील सृजन"। एहि कविता के आधार बना केँ यदि हम अपने'क केँ "प्रगतिशील कविक" श्रेणी में राखी तs अतिश्योक्ति नहिं हेतैक। एहि कविता के माध्यम सs जे अहाँ पाठक लोकनि'क प्यास बढा देलियैन्हि ओकरा देखैत यदि अहाँ अपन नव रचना हमरा सभहक लेल प्रस्तुत नहिं करब तs ओहि के लेल अपने'क केँ क्षमा नहिं कयल जायत।<BR/><BR/>अपने'क-<BR/>कुन्दन कुमार मल्लिक, बंगलोर (भारत)<BR/>सम्पर्क- +91-9740166527<BR/>E-mail- kkmallick@gmail.comकुन्दन कुमार मल्लिक, जय मिथिला, जय मैथिली!http://www.blogger.com/profile/03699865603391260097noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-15885037.post-48702988921554410462008-01-15T14:35:00.000+05:302008-01-15T14:35:00.000+05:30राजीव जी, कतेक रास बात नीक मंच बनि क' उभरल अछि। एह...राजीव जी, कतेक रास बात नीक मंच बनि क' उभरल अछि। एहि सं जुडि क' हम गौरवान्वित छी।अविनाशhttp://dilli-darbhanga.blogspot.comnoreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-15885037.post-17940972506978487952008-01-14T11:08:00.000+05:302008-01-14T11:08:00.000+05:30मैथिली मैथिली केनाय आ मैथिली के ओकर वास्तविक स्वरू...मैथिली मैथिली केनाय आ मैथिली के ओकर वास्तविक स्वरूप में परोसनाय दु टा फराक चीज अछि। हमर सभक प्रयास में लेखन तऽ छल मुदा स्तर नहि...कोशिश तऽ छल मुदा ओ दम नहि। अहाँ के छोट कविता हमरा सब के निश्चित रूपेन हमर सभक निम्न स्तरीय लेखन के बोध करा रहल अछि आ अहाँ के पाबि उत्साहित छी जे अहाँ के लेखन स्तर के देखैत देखैत <I>नहि मामा से कन्हा मामा </I> तऽ जरूर भऽ जायब। एनाही अपन उपस्थिति के आभास कराबै रहु जे हमरो सभक कल्याण होय।<BR/><BR/>बहुत बहुत धन्यवाद।Rajeev Ranjan Lallhttp://www.blogger.com/profile/18354335177402486449noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-15885037.post-80363112584555805002008-01-11T20:20:00.000+05:302008-01-11T20:20:00.000+05:30धन्‍यवाद पद्मनाभ जी, उत्‍साहवर्द्धनक लेल हम अहांक ...धन्‍यवाद पद्मनाभ जी, उत्‍साहवर्द्धनक लेल हम अहांक कृतज्ञ छी।अविनाशhttp://mohalla.blogspot.comnoreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-15885037.post-33151734906130082142008-01-11T18:25:00.000+05:302008-01-11T18:25:00.000+05:30"हिसाब-दौड़ी कहियो ने भेलआंगुरक बीच मे भूर अछिजे अर...<B><I>"हिसाब-दौड़ी कहियो ने भेल<BR/>आंगुरक बीच मे भूर अछि<BR/>जे अरजल सभटा राइ-छित्ती भेल<BR/>छिपली मे बांचल कनखूर अछि" </I> </B>"<BR/><BR/>अविनाश जी;<BR/><BR/>अहाँक उपर लिखल लाईन'क कीमत हम एक लाख लगाबैत छी...<BR/>कतय नुकायल छलहुँ यौ. अहीँ सन सन लोकनिक जरूरत अछि. एतय हम अहाँ'क हम प्रशँशा नहि करब. प्रशँशा'क जिम्मेदारी बाँकी लोकनिक उपर मे छोड़ि हम केवल शिकायते टा करब. आ शिकायत अछि जे "एहेन बढियाँ कविता लिखि केँ फेर सँ निपत्ता नहि भ' जायब. अहाँ सन लोकनि के एहि ब्लोग पर पाबि धन्य भेलहुँ अहा कलम के लगाम नहि लगायब इएह टा आशा आ अपेक्षा...<BR/><BR/>पद्मनाभ मिश्रपद्मनाभ मिश्रhttp://www.blogger.com/profile/00743001936020943683noreply@blogger.com