tag:blogger.com,1999:blog-15885037.post3494308730721618860..comments2008-05-16T13:57:07.897+05:30Comments on कतेक रास बात: फाँस- कुन्दन कुमार मल्लिककुन्दन कुमार मल्लिकhttp://www.blogger.com/profile/03699865603391260097noreply@blogger.comBlogger6125tag:blogger.com,1999:blog-15885037.post-12490251510595890492008-05-16T13:57:00.000+05:302008-05-16T13:57:00.000+05:30हमरा कनेक देर भेल एहि कविता पर टिप्पणी देब' मेँ। क...हमरा कनेक देर भेल एहि कविता पर टिप्पणी देब' मेँ। क्षमाप्रार्थी छी। कविता के छंद में तुकबंदी छल की नहि से त' ओते पारखी नहि छी हम मुदा जे भाव छल से ओ मोन के छू गेल। बुझायल जे कविता हमरे लेल लिखल गेल होय।<BR/><BR/>बहुत बढिया, एनाही मैथिली साहित्य के योगदान दियौक।<BR/><BR/>धन्यवाद,<BR/>राजीव रंजन लालRajeev Ranjan Lallhttp://www.blogger.com/profile/18354335177402486449noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-15885037.post-2286801933164375842008-04-17T14:51:00.000+05:302008-04-17T14:51:00.000+05:30अतुलजी, केशवजी आ राजीव "अमरजी",उत्साहवर्द्धन के ले...अतुलजी, केशवजी आ राजीव "अमरजी",<BR/>उत्साहवर्द्धन के लेल सादर धन्यवाद। केशवजी, अपनेक लेखन सँ हम परिचित छी। ताहि पर अहाँ के इ कहनाय जे अहाँ पर माता सरस्वती केँ कृपा नहिं छन्हि से कहनाय अतिश्योक्ति अछि।<BR/>राजीव "अमरजी" अहाँक विचार केँ हम सम्मान करैत छी। वार्ता'क क्रम में अपनेक कहलहुँ जे हमर कविता सभ में निराशा भरल अछि। हमर विचार सँ एहि में हमर निराशा नहिं अपितु व्याकुलता अछि जे हमर अपन माता आ मातृभूमि के लेल अछि। हमरा बुझना सँ व्याकुलता आ निराशा इ दू अलग-अलग चीज छैक।<BR/>पद्मनाभजी,<BR/>अपनेक इ टिप्पणी हमर पूरा कविता पर भारी पडल। अपनेक टिप्पणी सदिखन हमर उत्साहवर्द्धन करैत अछि। हम राजीव रंजन लाल जी केँ आभारी छी जिनक प्रेरणा सँ मैथिली में लिखनाय प्रारम्भ कयलहुँ। किछु-किछु लिखय के आदत तs अष्टम वर्ग सँ अछि मुदा मैथिली अध्ययन आ लेखन सँ बहुत दूर छलहुँ। राजीवजी सँ परिचय भेला के बाद 'कतेक रास बात' एहन मंच भेटल। एहि कविता सँ पहिने जे किछु लिखने छलहुँ ओ पहिने हिन्दी में लिखलहुँ फेर ओकरा मैथिली में अनुवाद कयलहुँ। आब सीधे मैथिली में लिखि रहल छी। एहि बात केँ हम स्वीकार करैत छी जे हमर कविता सभ में कथ्य, शिल्प, सौन्दर्य आ मात्रा'क गणना केँ दृष्टिकोण सँ बहुत सुधार'क आवश्यकता अछि। हमर प्रयास अछि जे भविष्य में एहि मंच केर माध्यम सँ किछु आओर रचना लय के आयब।<BR/>पद्मनाभजी, अहाँ'क बकबास (http://mera-bakvaas.blogspot.com/) पढलहुँ। एहन तरह'क बकबास यदि अपने मैथिली में सेहो करी त महो-महो भ जायत।<BR/><BR/>सादर-<BR/>कुन्दन कुमार मल्लिककुन्दन कुमार मल्लिकhttp://www.blogger.com/profile/03699865603391260097noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-15885037.post-60131183246275037192008-04-16T16:55:00.000+05:302008-04-16T16:55:00.000+05:30कबई माछ'क झोर,अदौरी, चरौरी, कुम्हरौरी,मुरौडी, तिसि...कबई माछ'क झोर,<BR/>अदौरी, चरौरी, कुम्हरौरी,<BR/>मुरौडी, तिसियौरी सब एक्के सँग<BR/>चौरचन'क मरड़,<BR/>कन्चु'क साग, <BR/>अर्द्रा'क खीर,<BR/>सँक्रान्ति'क लाई,<BR/>लवाण'क चुड़ा,<BR/>दालि-भात-भुजिया,<BR/>आर <B>कतेक रास बात</B>...<BR/>मिथिला अपन मिथिला अपन मैथिली.<BR/><BR/>कुन्दन जी प्रयास जारी राखू. अहाँक नाम कतेक रास बात मे एक नया अध्याय जोड़त.<BR/><BR/>पद्मनाभ मिश्रपद्मनाभ मिश्रhttp://www.blogger.com/profile/00743001936020943683noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-15885037.post-8152282133513336532008-04-16T12:26:00.000+05:302008-04-16T12:26:00.000+05:30कविता बहुत सुंदर आ भावर्पुन अछि.उम्मिद जे अहांक ई ...कविता बहुत सुंदर आ भावर्पुन अछि.<BR/>उम्मिद जे अहांक ई फ़ांस जल्दी खत्म हुवे आ हमरा सब के अहाक सदेह दर्शन. एकटा बात, अहां जीवन के बारे में कतैक जनैत छि लेकिन कि ई पर्याप्त अछि कि किछु येहन अछि जे छुटि रहल अछि<BR/><BR/>अहांक<BR/>अमरजीRajivhttp://www.blogger.com/profile/06715420265457290534noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-15885037.post-60236580159829675572008-04-15T17:10:00.000+05:302008-04-15T17:10:00.000+05:30कुन्दन जी,कविता बड भावुक अछि ! "जननि जन्मभूमिश्च स...कुन्दन जी,<BR/>कविता बड भावुक अछि ! "जननि जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसि" ! आधुनिक कृत्रिमता में भुतियायेल अप्पन मातृभूमि के खोजबा'क एहन भाव प्रधान प्रयास निश्चय प्रशंसनीय अछि ! जे पीड़ा अपने'क ह्रदय में कुलबुला के एहन सुंदर कविता के जन्म देलक, हमहु सदि खान वैह पीडा में तल्फैत रहैत छी, मुदा हमरा पर सरस्वती ओहन सहाय नै छथि, जे ओकरा शब्द-रूप द सकी !! <BR/>पुनश्च एहन सुंदर रचना'क लेल अपने'क बहुत बहुत धन्यवाद !करण समस्तीपुरीhttp://www.blogger.com/profile/10531494789610910323noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-15885037.post-21417300385275379892008-04-15T15:26:00.000+05:302008-04-15T15:26:00.000+05:30बहुत भावुक कविता. गाव की महक के साथ.बहुत भावुक कविता. गाव की महक के साथ.अतुलhttp://www.blogger.com/profile/17662104942306989873noreply@blogger.com