tag:blogger.com,1999:blog-15885037.post6240494185274851624..comments2007-07-31T13:08:38.149+05:30Comments on कतेक रास बात: जलकुम्भी भाग-२ (लेखिका- अल्पना)अल्पनाhttp://www.blogger.com/profile/06544386605651633648noreply@blogger.comBlogger3125tag:blogger.com,1999:blog-15885037.post-52367375549567349092007-07-31T13:08:00.000+05:302007-07-31T13:08:00.000+05:30i am pleased to know about maithali site vidyapati...i am pleased to know about maithali site vidyapati.org its a type of revolution to make a site in the 21st centuaradityahttp://www.blogger.com/profile/07849373299575941749noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-15885037.post-199126507884909372007-07-24T05:08:00.000+05:302007-07-24T05:08:00.000+05:30राजीव जी;एहि प्रोजेक्ट मे बढ़ियां बात ई जे प्रत्येक...राजीव जी;<BR/><BR/>एहि प्रोजेक्ट मे बढ़ियां बात ई जे प्रत्येक लेखक के अपन मानसिक स्थिति’क अनुसार कहानी के मोड़्बाक छुट होइत छैक. वर्षा अमोल के अपन प्रेम पाश मे बान्हत की नहि ओ अपने लोकनि (लेखक गण) पर निर्भर करैत छैक. अहां लोकनि बन्हबाईयो सकैत छी आ नहियों. मुदा पाठक कें हरदम सस्पेन्स बनल रहतैक... किएक ते जतेक लेखक अछि ओहेन तरह के मानसिकता आ ओहेन तरह के कहानी मे टर्न. उठा-पटक. ई प्रोजेक्ट हमर बुझु ते सपना थीक, आ अहां बिन ई कहियो नहि पूरा भौ सकैत अछि. <BR/>हमर आग्रह जे कहियो टाईम निकालि के (वीक्-एण्ड्स) मे एक पेज लिख दियौक. आ ओकर बादक जिम्मेदारी हमरा उपर. <BR/><BR/>कहानी मे पहिल उठा-पटक करबाक लेल अल्पना केँ धन्यवाद.डा. पद्मनाभ मिश्रhttp://www.blogger.com/profile/00743001936020943683noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-15885037.post-47991559675139374332007-07-23T09:58:00.000+05:302007-07-23T09:58:00.000+05:30अल्पना जी,पहिने दु टा कारण से अहाँके धन्यवाद:पहिल ...अल्पना जी,<BR/>पहिने दु टा कारण से अहाँके धन्यवाद:<BR/>पहिल जे अहाँ ई ब्लोग जगत में अपन उपस्थिति दर्ज केलियेक आ दोसर जे अहाँ एकरा लेल www.vidyapati.org के अपन मंच बनौलियेक।<BR/><BR/>जाहि हिसाब से ई कहानी आगाँ बढ़ल अछि से हम अधैर्य भ’ गेल छी। कोना की हेतैक रंजीत के, हुनक मर्यादा के। अमोल की वर्षा के प्रेमपाश में अपना के फंसय देता। आ सब से बेसी रोचक, जे वर्षा के मोन में अखन की चलि रहल छैक। सते ओ अमोल के चाहय लागली आ की कनेक देर के लेल हुनका कोनो चीज अप्रतिम लागय लागलैन? आ ई बाल-बच्चा के चाहने आ की नहि चाहने तीनु गोटाक माँ-बाबूजी पर की बीततैन? <BR/><BR/>अहाँ बढ़ रोचक धर्मसंकट बला स्थिति बना देने छियेक। आब तऽ इंतजार रहतैक अगला कड़ी के जे कहानी कोना किम्हर टघरै छैक।<BR/><BR/>अहाँ सन आउर कियौ जे एहि कहानी के आगाँ बढ़ाबै छथि तऽ एहि धारावाहिक के महारूप देखबा में आबि सकैत छैक। आशा जे किछु गोटा आगाँ औता एकरा गति देबाक लेल। तखन धरि एहि में कोनो शक नहि जे अहाँ के उदाहरण बहुतो पाठक वर्ग के उत्साहित करत मैथिली लिखबाक लेल।<BR/><BR/>सादर,<BR/>राजीव रंजन लालRajeev Ranjan Lallhttp://www.blogger.com/profile/18354335177402486449noreply@blogger.com