tag:blogger.com,1999:blog-15885037.post7728216329231219494..comments2007-12-31T20:17:09.709+05:30Comments on कतेक रास बात: अखबारक चोरीRajeev Ranjan Lallhttp://www.blogger.com/profile/18354335177402486449noreply@blogger.comBlogger5125tag:blogger.com,1999:blog-15885037.post-74992765551068063262007-12-31T20:17:00.000+05:302007-12-31T20:17:00.000+05:30प्रिय राजीवजी नमस्कार,अहाँक प्रेरणा सs किछु लिखय क...प्रिय राजीवजी नमस्कार,<BR/>अहाँक प्रेरणा सs किछु लिखय के प्रयास कय रहल छी. आई भोर स बहुत रास मैथिली रचना पढ़य के भेटल. अहाँक हम बहुत आभारी छी जे अहाँ हमरा अपन मातृभाषा के एतेक नजदीक आनलहूँ. कोन रुपें अहाँ के धन्यवाद कही समझ में नहीं आयत अछी. कहल जायत छैक जे-<BR/><BR/>जिसे निज देश, निज गौरव, न निज भाषा का मान हैं,<BR/>वह नर नहीं नर पशु निरा हैं और मृतक समान हैं!<BR/><BR/>एखन धरि हिंदी आ उर्दू सिखय के चक्कर में जेना मैथिली बहुत पाछू छुटि गेल. मुदा एखनो ज्यादा देर नहीं भेल अछि. कहल जायत छैक जे "भोर के बिसरल जदी सांझ के घर आबी जाय त ओकरा बिसरल नहीं कहल जायत छैक." ए अहं के प्रेरणा छी जे आई हम पहिल बेर मैथिली में किछु लिखय के प्रयास क रहल छी. एही स पहिने किछु-किछु हिंदी में लिख लैत छलहूँ. अहाँ के अखबार के चोरी के बारे में पढ़लहूँ, दुःख भेल!<BR/>मुदा एही कारणे दुःख नहीं भेल जे अहाँ के अखबार चोरी होयत छल और अहाँ अपन आदतानुसार भोर में अखबार नहीं पढी पाबैत छलहूँ.<BR/>दुःख एही कारणे भेल जे समाज में बढ़ैत बेरोजगारीक समस्या और बदलैत सामाजिक स्वरुप मानव के एहनो कर्म करय के लेल बाधित कs दैत छैक. बात सिर्फ दू-चारि टका के नहीं छैक, बात छैक बदलैत सामाजिक परिवेश के.<BR/>अहाँ अपन रचना के एकटा व्यंगक रूप दs के छोड़ी देलीयैक. हमरा विचार में यदि अहाँ सिक्का के दोसर पक्ष पर किछु ध्यान दैतियैक त ई रचना के स्वरुप किछु और होयतैक. एही ठाम अहाँ विचार करू जे ओ व्यक्ति (ओकरा चोर कहनाई उचित नहीं) कोन विवशता स ई कर्म करैत छल. एहिथाम हमरा एकटा कहानी याद आबि रहल अछि जे किछु दिन पहिने हिंदी साहित्य पत्रिका "हंस" में प्रकाशित भेल छल. एखन हमरा कहानी आ ओकर रचनाकार के नाम मोन नहीं आबि रहल अछि. ओही कहानी में छल कोना अपन बेटा-पुतोहू सs उपेक्षित एकटा वृद्ध अपन छोट-छोट जरुरत के लेल पड़ोस के बारी सs फूल चोरी करैत छल.<BR/>की एकरे नाम विकास छैक? की एही कारणे स हमर देश आर्थिक महाशक्ति बनत? की एकरा सेंसेक्स के आसमान छुबैत स कोनो संबंध छैक? एहन बहुत रास प्रश्न सब छैक जकर उत्तर भेटनाई बहुत मुश्किल अछि.<BR/>बहुत बात भेल. पहिलम बेर मैथिली में लिख रहल छी. किछु गलती भs गेल होयत त क्षमाप्रार्थी छी. एही पर अपनेक टिप्पणीक प्रतीक्षा रहत. <BR/><BR/>धन्यवाद-<BR/>कुन्दन कुमार मल्लिक,<BR/>ग्रुप सनोफी अवेंटिस,<BR/>बंगलोर (भारत)<BR/>दूरभास- +९१-९७४०१६६५२७. <BR/>E-mail- kkmallick@gmail.com<BR/>kundanmallick@yahoo.comKundan Kumarhttp://www.blogger.com/profile/03699865603391260097noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-15885037.post-40946230575925408652007-12-22T11:44:00.000+05:302007-12-22T11:44:00.000+05:30राजीव जी, आन्हा के अखबार त चोरी होइत च्हल लेकिन ह्...राजीव जी, <BR/>आन्हा के अखबार त चोरी होइत च्हल लेकिन ह्म्मर अखबार त हमरा आन्खिक सामने स हमर परोसी ल लैत च्हल और कहैत च्हल जे "पध्ने के बाद मे दे देन्गे". साफ दकैती.<BR/>आन्हाक ई लेख खूब नीक लागलS M Jhanoreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-15885037.post-26006343066415228692007-11-01T16:00:00.000+05:302007-11-01T16:00:00.000+05:30अहाँ के अख़बार चोरी भेला सं हमरI अपन मोन परे य , ह...अहाँ के अख़बार चोरी भेला सं हमरI अपन मोन परे य , हमरो अख़बार आ रोजगार समाचार कियो चोरा ले य मुदा लेखक त लेखक होई य बड़ निक लागल अहाँ के लेखSantos Jhahttp://www.blogger.com/profile/10696320052096183400noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-15885037.post-30009275743395130982007-08-22T17:24:00.000+05:302007-08-22T17:24:00.000+05:30namaskar.... hamara lag dewnagari lipi nahi ahi, t...namaskar.... hamara lag dewnagari lipi nahi ahi, tahi duare roman san kaaj chalaa rahal thikaun.... ahaank prayaas prashamsaniya ahi... akhbaar chori hoyba san hamro dukh bhel... muda aab etbe kaamnaa karait chhii je ehen ahaan ker sang ehen phero nahi homay!luvlotushttp://www.blogger.com/profile/05424588356250490890noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-15885037.post-31449176299200097882007-08-20T09:14:00.000+05:302007-08-20T09:14:00.000+05:30राजीव जी;बहुत दू:ख भेल अपनेक अखबार चोरी भेला सँ. म...राजीव जी;<BR/><BR/>बहुत दू:ख भेल अपनेक अखबार चोरी भेला सँ. मुदा सँगहि खुशी से भेल एतेक बढ़ियाँ सँ अपने एकरा लिखलहुँ. एके तरह के आर्टिकल देखि केँ मोनोटोनस लागैत छल. अपनेक लेख एकर शोभा बढा देलक. अपनेक प्रयास जारी रहत इएह हमर इच्छा.<BR/><BR/>धन्यवादडा. पद्मनाभ मिश्रhttp://www.blogger.com/profile/00743001936020943683noreply@blogger.com