tag:blogger.com,1999:blog-15885037.post8241149590299786084..comments2007-11-03T15:20:24.100+05:30Comments on कतेक रास बात: जलकुम्भी (कड़ी १)आदि यायावरnoreply@blogger.comBlogger5125tag:blogger.com,1999:blog-15885037.post-32744990297434775522007-11-03T15:20:00.000+05:302007-11-03T15:20:00.000+05:30बहुत निक लागल. एकर दोसर भाग्क पर्तिक्श क र्हल च्हि...बहुत निक लागल. एकर दोसर भाग्क पर्तिक्श क र्हल च्हि.Ashuhttp://www.blogger.com/profile/11441729692573480727noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-15885037.post-67019892019868228562007-06-25T13:41:00.000+05:302007-06-25T13:41:00.000+05:30राजीव जी,अपनेक एहि धारावाहिक मे योगदानक हम बाट ताक...राजीव जी,<BR/><BR/>अपनेक एहि धारावाहिक मे योगदानक हम बाट ताकि रहल छी. कहिया प्रस्तुत क’ रहल छी ???डा. पद्मनाभ मिश्रhttp://www.blogger.com/profile/00743001936020943683noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-15885037.post-33730439700597889122007-06-22T17:32:00.000+05:302007-06-22T17:32:00.000+05:30अपने एहि बातक जिक्र केलहुं जे रुद्रबाबूक मानसिकता ...अपने एहि बातक जिक्र केलहुं जे रुद्रबाबूक मानसिकता आओर वर्षाक मानसिकता में अन्तर अछि, जाहि ठाम रुद्रबाबू अपन गामघरक परिवेश में बचपन बितौने छथि, ओहि ठाम वर्षा मुम्बई सन स्वप्न नगरी में एहि इन्टरनेटक दुनिया में पलल-बढ़ल छथि तेँ ई अन्तर स्वभाविक अछि...... कोन तरहें एकगोट तरुणीक मन में भावनाक संचार होइत अछि.... एहि बातक सुन्दर प्रस्तुतीकरण.... संगहि कतेको छुपल बात सामने अछि आओर आयत जे मैथिल आओर मिथिला समाजक रीति-रिवाज बनल अछि......प्रस्तुतीकरण अति आनन्ददायक...।<BR/>आगाक अंकक प्रतीक्षा रहत......vijayhttp://www.blogger.com/profile/03994429154980458183noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-15885037.post-54554016669838766752007-06-17T12:25:00.000+05:302007-06-17T12:25:00.000+05:30"तड़प रहे हैं कोटी-कोटी ग्राम देवताअक्षत और जल के ..."तड़प रहे हैं कोटी-कोटी ग्राम देवता<BR/>अक्षत और जल के बिना ही नग्न मूर्छित हो,<BR/>सूखी आंत, मींचे दांत, पथ्राये हुए नैन<BR/>टकटकी लगाए हैं, पाटने कि ओर, दिल्ली कि ओर ।"<BR/>-- अमोघ<BR/>-- तार स्वर शीर्षक से (मैं तो तेरे पास में)Abhishek Mishrahttp://www.blogger.com/profile/12093818682511281896noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-15885037.post-87295814564337064142007-05-21T19:34:00.000+05:302007-05-21T19:34:00.000+05:30पद्मनाभ जी, धारावाहिक के शुरुआत नीक बुझा रहल अछि। ...पद्मनाभ जी, धारावाहिक के शुरुआत नीक बुझा रहल अछि। एकर दोसर भाग कहिया प्रस्तुत क’ रहल छी?Rajeev Ranjan Lallhttp://www.blogger.com/profile/18354335177402486449noreply@blogger.com