tag:blogger.com,1999:blog-15885037.post8300092782229754498..comments2008-01-24T18:57:33.735+05:30Comments on कतेक रास बात: अपन अपन खुशी (मैथिली कहानी)आदि यायावरnoreply@blogger.comBlogger2125tag:blogger.com,1999:blog-15885037.post-28629618639719438172008-01-24T18:57:00.000+05:302008-01-24T18:57:00.000+05:30एक झलक में त' कहानी बुझा पड़ल, मुदा पढ़ला के बाद पता...एक झलक में त' कहानी बुझा पड़ल, मुदा पढ़ला के बाद पता चलल जे कतेक बारीकी से अहाँ एकटा चरित्र के सहजे उतारि के राखि देने छिये। <BR/><BR/>अहाँ के मनोविश्लेषण पूर्णतः वैज्ञानिक होयत अछि आ जेना जेना अहाँक कहानी आगाँ बढ़ल जायत अछि ओही में जीवंतता आबैत जायत अछि। <BR/><BR/>कुनौली वाली के व्यक्तित्व मिथिला के आम नारी के थिक आ ओकर मनोदशा के परिपूर्ण रूपेन व्यक्त केनाय शायद एहि से नीक संभव नहि।<BR/><BR/>बड्ड बढ़ियाँ, एनाही लेखनी के पकड़ मजबूत केने रहु।<BR/><BR/>धन्यवाद,<BR/>राजीव रंजन लाल्Rajeev Ranjan Lallhttp://www.blogger.com/profile/18354335177402486449noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-15885037.post-12296667303088086882008-01-24T16:38:00.000+05:302008-01-24T16:38:00.000+05:30very well described n very well writtenvery well described n very well writtenAlpana (Jha)http://www.blogger.com/profile/04147186096294986127noreply@blogger.com